अमेरिका के मिसाइल भंडार में भारी कमी: ईरान युद्ध ने खाली किए गोदाम, संकट गहराया

ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध ने अमेरिका के आधुनिक मिसाइल भंडार पर भारी दबाव डाला है, जिससे पैट्रियट और टॉमहॉक जैसी मिसाइलों की कमी हो गई है और स्टॉक भरने में तीन साल लग सकते हैं।

ईरान के साथ पिछले पांच महीनों से जारी युद्ध ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने एक नई और गंभीर सैन्य चुनौती खड़ी कर दी है। दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति माने जाने वाले अमेरिका के सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों के भंडार में तेजी से कमी आने लगी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस युद्ध के दौरान अपनी कई महत्वपूर्ण मिसाइलों का लगभग पूरा स्टॉक इस्तेमाल कर लिया है। हालांकि, व्हाइट हाउस और पेंटागन की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के पास अभी भी आवश्यकता से अधिक हथियार मौजूद हैं और उनके उत्पादन की गति को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ रही है।

ATACMS और PrSM मिसाइलों पर बढ़ता दबाव

इस युद्ध का सबसे गहरा और सीधा असर अमेरिका के आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) और नई पीढ़ी की प्रेसीजन स्ट्राइक मिसाइल (PrSM) पर पड़ा है। रॉयटर्स से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इन दोनों लंबी दूरी की सटीक मार करने वाली मिसाइलों का लगभग पूरा स्टॉक अब समाप्त होने की कगार पर है और चूंकि PrSM एक बिल्कुल नया मिसाइल सिस्टम है, इसलिए इसकी शुरुआती संख्या पहले से ही काफी सीमित थी और युद्ध की जरूरतों ने इसे तेजी से खत्म कर दिया है। ये मिसाइलें अमेरिकी सेना के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनकी मदद से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित दुश्मन के ठिकानों पर बिना अपने सैनिकों को भेजे सटीक हमला किया जा सकता है।

ATACMS की मारक क्षमता लगभग 300 किलोमीटर तक है, जबकि PrSM की शुरुआती रेंज 400 से 500 किलोमीटर के बीच है। भविष्य में इसके और भी उन्नत संस्करण आने की उम्मीद है जो इससे भी अधिक दूरी तक मार कर सकेंगे और यूक्रेन युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने यूक्रेन को ATACMS मिसाइलें प्रदान की थीं, जिनका उपयोग रूस के भीतर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के साथ कोई संघर्ष होता है, तो यही मिसाइलें अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत साबित होंगी, लेकिन वर्तमान कमी इस रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

अन्य हथियारों के भंडार में भी आई भारी गिरावट

अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटैजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषण के अनुसार, केवल ATACMS ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण मिसाइलों के भंडार पर भी भारी दबाव देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का लगभग 65 प्रतिशत स्टॉक इस्तेमाल किया जा चुका है। इसी तरह, थाड (THAAD) इंटरसेप्टर का भंडार भी करीब 38 प्रतिशत तक घट गया है। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का है, जिसका लगभग आधा वैश्विक स्टॉक इस युद्ध के दौरान खर्च हो चुका है।

हालांकि रॉयटर्स ने स्पष्ट किया है कि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है, लेकिन CSIS के अनुमान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास लगभग 452 थाड और 2200 पैट्रियट मिसाइलें मौजूद थीं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दुनिया के अन्य हिस्सों में तैनात अपने मिसाइल भंडारों से हथियारों को मंगाना शुरू कर दिया है ताकि ईरान के मोर्चे पर कमी को पूरा किया जा सके।

वैश्विक सुरक्षा और चीन-रूस की चुनौती

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध की शुरुआत फरवरी में की थी। उस समय यह अनुमान लगाया गया था कि यह सैन्य अभियान जल्द ही समाप्त हो जाएगा, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी संघर्ष जारी है। अब अमेरिका के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि इसी दौरान चीन, रूस या उत्तर कोरिया की ओर से कोई बड़ा सैन्य संकट पैदा होता है, तो क्या उसके पास पर्याप्त आधुनिक हथियार उपलब्ध होंगे। यह संकट केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर यूक्रेन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। यूक्रेन अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी पैट्रियट और ATACMS पर निर्भर है, और यदि अमेरिकी भंडार कम होता है, तो यूक्रेन को मिलने वाली सहायता में कटौती हो सकती है।

उत्पादन क्षमता और भविष्य की चुनौतियां

रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंशियन और क्रिस पार्क के अनुसार, पैट्रियट, थाड और टॉमहॉक जैसे जटिल हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में मौजूदा उत्पादन क्षमता के आधार पर तीन साल या उससे अधिक का समय लग सकता है और वर्तमान में, अमेरिका हर महीने लगभग 20 पैट्रियट मिसाइल और करीब 15 टॉमहॉक मिसाइलों का उत्पादन कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रेथियॉन और पेंटागन टॉमहॉक मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नए समझौतों पर काम कर रहे हैं। वहीं, लॉकहीड मार्टिन कंपनी ATACMS, PrSM और थाड प्रणालियों के निर्माण में जुटी है।

व्हाइट हाउस और पेंटागन का पक्ष

इन तमाम रिपोर्टों के बावजूद व्हाइट हाउस पूरी तरह से सहमत नहीं है और राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि अमेरिका के पास दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में कहीं अधिक हथियार और गोला-बारूद का भंडार है। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने भी आश्वस्त किया है कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के आदेश पर किसी भी समय और कहीं भी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त क्षमता और हथियार मौजूद हैं। प्रशासन का दावा है कि पिछले वर्षों के मुकाबले अब रिकॉर्ड स्तर पर मिसाइलों का उत्पादन किया जा रहा है। हालांकि, स्वतंत्र विशेषज्ञों का तर्क है कि भले ही उत्पादन बढ़ा हो, लेकिन चीन जैसी बड़ी सैन्य शक्ति के खिलाफ लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा।