अमेरिकी विशेष बलों ने ईरान की सीमा के भीतर एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाले बचाव अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है और ईरान में क्रैश हुए अमेरिकी F-15 फाइटर जेट के पायलट को लगभग 36 घंटे तक चले मिशन के बाद सुरक्षित निकाल लिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन तब शुरू हुआ जब शुक्रवार को एक अमेरिकी लड़ाकू विमान तकनीकी खराबी या हमले के कारण ईरानी क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस मिशन की सफलता में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) की रणनीतिक चालों और पायलट की विशेष सैन्य ट्रेनिंग ने निर्णायक भूमिका निभाई।
F-15 क्रैश और शुरुआती घटनाक्रम
घटना की शुरुआत शुक्रवार को हुई जब अमेरिकी वायुसेना का एक F-15 फाइटर जेट ईरान के हवाई क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। रिपोर्टों के अनुसार, विमान में दो पायलट सवार थे। एक पायलट को घटना के तुरंत बाद रेस्क्यू कर लिया गया था, लेकिन दूसरा पायलट पैराशूट के जरिए क्रैश साइट से काफी दूर एक दुर्गम पहाड़ी इलाके में उतरा और द सन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस जेट को गिराने के लिए रूस निर्मित उन्नत शोल्डर-फायर्ड मिसाइल सिस्टम का उपयोग किया गया था। विमान के गिरते ही ईरानी सेना और स्थानीय सुरक्षा बल सक्रिय हो गए और लापता पायलट की तलाश शुरू कर दी गई।
पायलट की SERE ट्रेनिंग और 55 किलोमीटर का सफर
लापता पायलट ने अपनी जान बचाने के लिए अपनी विशेष सैन्य ट्रेनिंग का उपयोग किया, जिसे SERE (Survival, Evasion, Resistance, and Escape) कहा जाता है। दुश्मन के इलाके में फंसने के बाद, पायलट ने सबसे पहले अपने सिग्नल और लोकेशन सूट के स्विच ऑफ कर दिए ताकि ईरानी रडार और ट्रैकिंग सिस्टम उसे ढूंढ न सकें। वह घायल होने के बावजूद लगभग 55 किलोमीटर तक पैदल चलकर 7000 फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में पहुंच गया। पायलट के पास आत्मरक्षा के लिए केवल एक पिस्तौल थी। SERE ट्रेनिंग के तहत सैनिकों को सिखाया जाता है कि कैसे प्रतिकूल परिस्थितियों में भोजन और पानी के बिना जीवित रहना है और दुश्मन की पकड़ में आने से बचना है।
सीआईए की रणनीति और ईरानी सेना को गुमराह करना
जब ईरानी सेना ने पायलट को पकड़ने के लिए ₹55 लाख का इनाम घोषित किया और स्थानीय लोगों को तलाशी में लगाया, तब अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने एक रणनीतिक चाल चली। सीआईए ने जानबूझकर यह अफवाह फैलाई कि अमेरिका ने पायलट को पहले ही खोज लिया है और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। इस गलत सूचना ने ईरानी सुरक्षा बलों का ध्यान भटका दिया और उनकी तलाशी की दिशा बदल गई और इसी समय का लाभ उठाते हुए, अमेरिकी विशेष बलों और 12 से अधिक जेट और हेलीकॉप्टरों की एक टीम ने वास्तविक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।
तकनीकी सुरक्षा के लिए अमेरिकी विमानों का विनाश
इस रेस्क्यू मिशन के दौरान अमेरिका को अपने कुछ सैन्य संसाधनों का बलिदान भी देना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने अपने ही दो C-130 परिवहन विमान और एक MH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर को नष्ट कर दिया। ये विमान मिशन के दौरान तकनीकी खराबी या भौगोलिक बाधाओं के कारण ईरान में ही फंस गए थे। अमेरिकी सेना ने इन्हें इसलिए नष्ट किया ताकि इनकी उन्नत तकनीक, संचार प्रणाली और संवेदनशील डेटा ईरानी सेना या उनके सहयोगियों के हाथ न लग सके। इस पूरे मिशन की अनुमानित लागत लगभग ₹2000 करोड़ बताई जा रही है।
मिशन की सफलता और वर्तमान स्थिति
36 घंटे के तनावपूर्ण घटनाक्रम के बाद, अमेरिकी स्पेशल फोर्स पायलट को सुरक्षित रूप से एयरलिफ्ट करने में सफल रही। रेस्क्यू किए गए पायलट को तुरंत कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने इस मिशन को सैन्य इतिहास के सबसे सफल और साहसिक अभियानों में से एक बताया है। दूसरी ओर, ईरानी सेना ने दावा किया है कि उन्होंने अमेरिकी हस्तक्षेप का कड़ा मुकाबला किया और उनके कई विमानों को निशाना बनाया। हालांकि, प्राथमिक उद्देश्य पायलट की सुरक्षित वापसी थी, जिसे अमेरिका ने पूरा कर लिया है।
