बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता अनीता आडवाणी द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने दिवंगत सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ अपने संबंधों को शादी के समान दर्जा देने की मांग की थी। न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ ने दिंडोशी सिविल कोर्ट के उस पुराने फैसले को बरकरार रखा जिसमें आडवाणी के दीवानी मुकदमे को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया था और इस अदालती आदेश के बाद डिंपल कपाड़िया, अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना को एक दशक से अधिक समय से चल रही कानूनी लड़ाई में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथम अपील में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया है।
राजेश खन्ना और अनीता आडवाणी के बीच कानूनी विवाद की जड़ें साल 2012 में सुपरस्टार के निधन के बाद से जुड़ी हुई हैं। राजेश खन्ना के निधन के तुरंत बाद अनीता आडवाणी ने दावा किया था कि वह अभिनेता के साथ उनके बांद्रा स्थित बंगले 'आशीर्वाद' में लिव-इन रिलेशनशिप में थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुपरस्टार के निधन के बाद उन्हें वहां से जबरन बेदखल कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया और संपत्ति में अधिकारों की मांग की थी।
कानूनी लड़ाई और अदालती कार्यवाही का विवरण
अनीता आडवाणी ने साल 2017 में दिंडोशी सिविल कोर्ट द्वारा उनके दावे को खारिज किए जाने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान आडवाणी के वकीलों ने तर्क दिया कि उनका रिश्ता 'इन द नेचर ऑफ मैरिज' यानी विवाह की प्रकृति जैसा था और इसलिए वह कानूनी संरक्षण की हकदार हैं और दूसरी ओर डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के वकीलों ने इन दावों का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि चूंकि राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया का कभी औपचारिक रूप से तलाक नहीं हुआ था, इसलिए किसी अन्य महिला के साथ उनके संबंध को कानूनी रूप से विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
घरेलू हिंसा के आरोप और लिव-इन रिलेशनशिप का दावा
अनीता आडवाणी ने बांद्रा मजिस्ट्रेट अदालत में डिंपल कपाड़िया, ट्विंकल खन्ना और अक्षय कुमार के खिलाफ घरेलू हिंसा का आपराधिक मामला भी दर्ज कराया था। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि वह राजेश खन्ना की देखभाल कर रही थीं और उनके अंतिम दिनों में उनके साथ थीं। आडवाणी का मुख्य तर्क यह था कि एक लंबे समय तक साथ रहने के कारण उनके रिश्ते को सामाजिक और कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए और हालांकि खन्ना परिवार ने हमेशा इन दावों को नकारा और इसे संपत्ति हथियाने का प्रयास बताया।
उच्च न्यायालय की पिछली टिप्पणियां और वैवाहिक स्थिति
इस मामले में साल 2015 में बॉम्बे हाई कोर्ट की एक समन्वय पीठ ने डिंपल कपाड़िया और उनके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा की कार्यवाही को रद्द कर दिया था। उस समय अदालत ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा था कि अनीता आडवाणी का राजेश खन्ना के साथ संबंध घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत 'विवाह की प्रकृति' वाला नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को विवाह जैसा दर्जा देने के लिए कुछ अनिवार्य शर्तों का पूरा होना आवश्यक है जो इस मामले में मौजूद नहीं थीं।
आशीर्वाद बंगले और विरासत पर दावों का अंत
राजेश खन्ना का बंगला 'आशीर्वाद' इस पूरे विवाद का केंद्र रहा है। अनीता आडवाणी ने दावा किया था कि उन्हें इस बंगले से बाहर निकाला जाना अवैध था। हालांकि सुपरस्टार ने अपनी वसीयत में अपनी संपत्ति अपनी बेटियों ट्विंकल और रिंकी खन्ना के नाम की थी। बुधवार को आए हाई कोर्ट के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आडवाणी के पास राजेश खन्ना की विरासत या संपत्ति पर दावा करने का कोई कानूनी आधार नहीं बचा है। अदालत ने दिंडोशी कोर्ट के उस निष्कर्ष को सही माना कि आडवाणी का मुकदमा विचारणीय नहीं था।
खन्ना परिवार के पक्ष में कानूनी तर्क
अदालत की कार्यवाही के दौरान यह तथ्य बार-बार सामने आया कि राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया अलग रहने के बावजूद कानूनी रूप से पति-पत्नी थे। भारतीय कानून के अनुसार जब तक पहली शादी वैध रूप से समाप्त नहीं हो जाती तब तक किसी अन्य संबंध को विवाह का दर्जा नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने संक्षिप्त आदेश सुनाते हुए कहा कि अपील में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है और इस फैसले के साथ ही खन्ना परिवार के लिए एक लंबे समय से चल रहा कानूनी अध्याय समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है।
