अमाल मलिक का खुलासा: 'सूरज डूबा है' की करोड़ों की कमाई, कंपोजर को मिला मामूली हिस्सा

संगीतकार अमाल मलिक ने भारतीय संगीत उद्योग में रॉयल्टी वितरण की विसंगतियों पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके सुपरहिट गाने 'सूरज डूबा है' ने लेबल के लिए करोड़ों रुपये कमाए, जबकि रचनाकारों को इसका बहुत छोटा हिस्सा मिला। मलिक ने मास्टर राइट्स और वैश्विक मानकों पर भी चर्चा की।

भारतीय संगीत उद्योग के जाने-माने संगीतकार अमाल मलिक ने हाल ही में संगीत जगत में रॉयल्टी और कमाई के ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। एक साक्षात्कार के दौरान मलिक ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे बड़े म्यूजिक लेबल गानों के माध्यम से भारी मुनाफा कमाते हैं, जबकि उन गानों को बनाने वाले संगीतकारों और गीतकारों को वित्तीय रूप से वह लाभ नहीं मिल पाता जिसके वे हकदार हैं। अमाल मलिक ने विशेष रूप से 2015 की फिल्म 'रॉय' के अपने चार्टबस्टर गाने 'सूरज डूबा है' का उदाहरण देते हुए इस आर्थिक अंतर को स्पष्ट किया। उनके अनुसार, संगीत निर्माण की प्रक्रिया में शामिल मुख्य रचनाकारों के पास अक्सर अपने ही काम के मास्टर अधिकार नहीं होते हैं।

रॉयल्टी प्रणाली और जावेद अख्तर का संघर्ष

अमाल मलिक ने बताया कि भारत में 2020 से रॉयल्टी प्रणाली लागू है, जिसे कानूनी रूप से स्थापित करने के लिए प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने एक लंबा संघर्ष किया था। हालांकि, नियमों में बदलाव के बावजूद, मलिक का तर्क है कि गानों के मास्टर अधिकार अभी भी काफी हद तक म्यूजिक लेबल के पास ही सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने कहा कि अक्सर यह माना जाता है कि किसी बड़े अभिनेता की उपस्थिति से गाना हिट होता है, लेकिन यह केवल 50% सच है। शेष 50% सफलता का श्रेय गीतकार, संगीतकार, निर्देशक और गायक को जाता है। मलिक के अनुसार, गायक महत्वपूर्ण हैं लेकिन वे गाने के मूल रचयिता नहीं हैं, फिर भी संगीत के इन चारों स्तंभों को अक्सर उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है।

'सूरज डूबा है' का वित्तीय विवरण और कमाई

वित्तीय आंकड़ों का विवरण देते हुए अमाल मलिक ने बताया कि 'सूरज डूबा है' जैसे बड़े हिट गाने के निर्माण के लिए उन्हें लगभग ₹8 lakh मिले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि का उपयोग घर चलाने और गाने के निर्माण में किया गया था। उनके अनुसार, उस समय गाने को तैयार करने में कुल लागत लगभग ₹8-10 lakh के बीच आई थी, जिसमें साउंड इंजीनियर, स्टूडियो का किराया और अन्य तकनीकी खर्च शामिल थे। मलिक ने दावा किया कि उनकी समीक्षा के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में इस अकेले गाने ने औसतन ₹65 crore की कमाई की है। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय तक यह आंकड़ा ₹100 crore को पार कर चुका होगा, जबकि रचनाकारों को केवल ₹15-20 lakh के आसपास ही प्राप्त हुए।

मास्टर राइट्स और वैश्विक मानकों के साथ तुलना

अमाल मलिक ने भारतीय संगीत उद्योग की तुलना पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका से की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार टेलर स्विफ्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि पश्चिम में कलाकारों के पास मास्टर रॉयल्टी के अधिकार होते हैं और टेलर स्विफ्ट के पास अपने मास्टर राइट्स हैं, जिससे वह अपने एल्बम को वापस खरीद सकती हैं और उन्हें अपने तरीके से पुन: रिलीज कर सकती हैं। मलिक के अनुसार, भारतीय प्रणाली इस मामले में वैश्विक मानकों से काफी पीछे है। भारत में संगीत निर्माताओं के पास अपने स्वयं के गानों पर वह नियंत्रण नहीं होता जो पश्चिमी देशों में इस श्रेणी के रचनाकारों को प्राप्त है।

संगीत निर्माण के चार स्तंभ और अधिकार

मलिक ने संगीत की सफलता के लिए जिम्मेदार 'चार स्तंभों'—गीतकार, संगीतकार, निर्देशक और गायक—के बीच अधिकारों के समान वितरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगीत लेबल अक्सर मास्टर अधिकारों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं, जिससे दीर्घकालिक रॉयल्टी का लाभ रचनाकारों तक नहीं पहुंच पाता। अमाल ने यह भी साझा किया कि एक संगीतकार के रूप में उन्हें अपनी पहचान और उचित पारिश्रमिक के लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि फिल्म उद्योग में काम करने के बावजूद, स्वतंत्र संगीत और अधिकारों की लड़ाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अमाल मलिक का करियर और सार्वजनिक उपस्थिति

अमाल मलिक बॉलीवुड के एक प्रतिष्ठित संगीत परिवार से आते हैं और उन्होंने अपने करियर में कई सुपरहिट गाने दिए हैं। संगीत के अलावा, वह अपनी स्पष्टवादिता और निजी जीवन से जुड़े बयानों के कारण भी चर्चा में रहते हैं और हाल के वर्षों में, उन्होंने रियलिटी शो 'बिग बॉस' में अपनी भागीदारी के माध्यम से भी सुर्खियां बटोरी थीं, जहां उनकी व्यक्तित्व शैली को दर्शकों ने काफी सराहा था। मलिक का यह हालिया बयान संगीत उद्योग में पारदर्शिता और रचनाकारों के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए चल रही बहस को फिर से तेज कर सकता है।