अर्थ आवर: राजस्थान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आवासों पर एक घंटे बिजली बंद

अर्थ आवर के उपलक्ष्य में राजस्थान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों के आवासों पर एक घंटे तक बिजली बंद रखी गई। इस दौरान राजस्थान मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्मिकों ने मोमबत्ती की रोशनी में कार्य किया। यह वैश्विक पहल जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई थी।

राजस्थान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने शनिवार रात 'अर्थ आवर' के वैश्विक आह्वान पर अपने सरकारी आवासों की लाइटें एक घंटे के लिए बंद रखीं। राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय में इस दौरान मोमबत्ती की रोशनी में काम किया गया, जबकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे आने वाली पीढ़ियों के प्रति एक महत्वपूर्ण संकल्प बताया और यह आयोजन रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक चला, जिसमें गैर-जरूरी बिजली उपकरणों का उपयोग पूरी तरह बंद रखा गया।

राजस्थान मुख्यमंत्री आवास पर मोमबत्ती की रोशनी में कार्य

राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय और निवास पर शनिवार रात को निर्धारित समय के अनुसार बिजली बंद रखी गई। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक मुख्यमंत्री आवास के सभी विद्युत उपकरण और लाइटें बंद कर दी गईं। इस एक घंटे की अवधि के दौरान, मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात कार्मिकों ने अपना आवश्यक कार्य मोमबत्ती की रोशनी में पूरा किया। यह कदम ऊर्जा की बचत और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता प्रदर्शित करने के उद्देश्य से उठाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आम जनता को बिजली की बचत के प्रति प्रोत्साहित करना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऊर्जा संरक्षण संदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस वैश्विक अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने देहरादून स्थित अपने शासकीय आवास की सभी गैर-जरूरी लाइटें एक घंटे के लिए बंद रखीं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए एक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रकृति के प्रति मानवीय जिम्मेदारियों का स्मरण कराती है। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य बताया। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से भी प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने और एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य निभाने की अपील की।

दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रभाव

अर्थ आवर का प्रभाव केवल मुख्यमंत्री आवासों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी व्यापक स्तर पर देखा गया। इंडिया गेट, अक्षरधाम मंदिर और कई अन्य ऐतिहासिक स्मारकों की लाइटें एक घंटे के लिए बंद कर दी गईं और विभिन्न सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर भी गैर-जरूरी बिजली का उपयोग बंद रखा गया। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रतीकात्मक कदम का उद्देश्य बड़े पैमाने पर बिजली की खपत को कम करना और नागरिकों को जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति सचेत करना था।

अर्थ आवर 2026 और 'गिव एन ऑवर फॉर अर्थ' की थीम

इस वर्ष अर्थ आवर अभियान अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) द्वारा आयोजित इस वर्ष के कार्यक्रम की थीम 'गिव एन ऑवर फॉर अर्थ' रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों को पृथ्वी के बेहतर भविष्य के लिए कम से कम एक घंटा समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित करना है और विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभियान अब केवल लाइटें बंद करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की दिशा में एक बड़ा वैश्विक आंदोलन बन चुका है।

अभियान का इतिहास और वैश्विक भागीदारी

अर्थ आवर की शुरुआत वर्ष 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी। तब से लेकर अब तक यह अभियान दुनिया के 190 से अधिक देशों में फैल चुका है। हर साल मार्च के अंतिम शनिवार को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में दुनिया भर की प्रसिद्ध इमारतों, जैसे एफिल टॉवर और एम्पायर स्टेट बिल्डिंग की लाइटें भी बंद की जाती हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सामूहिक प्रयास ऊर्जा की बचत के साथ-साथ वैश्विक तापमान में वृद्धि को रोकने के लिए जन-जागरूकता पैदा करने में सहायक सिद्ध होते हैं।