नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में राजस्थान के विधायकों द्वारा किए जा रहे कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। सदन की कार्यवाही के दौरान बेनीवाल ने राज्य में विकास कार्यों के नाम पर ली जा रही रिश्वत और कमीशनखोरी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने हाल ही में एक मीडिया संस्थान द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन का संदर्भ देते हुए दावा किया कि राज्य में विधायक निधि जारी करने के बदले खुलेआम धन की मांग की जा रही है।
सदन में भ्रष्टाचार के आरोपों पर तीखी बहस
सांसद हनुमान बेनीवाल ने सदन में बोलते हुए राजस्थान के तीन विधायकों के आचरण पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास (MLA LAD) निधि जारी करने के बदले 10 लाख रुपये तक की रिश्वत मांग रहे हैं। बेनीवाल ने एक विशिष्ट घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टिंग ऑपरेशन में एक भाजपा विधायक को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए दिखाया गया है। इस दौरान जब लोकसभा अध्यक्ष ने इसे राज्य सरकार का विषय बताते हुए उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो बेनीवाल ने अपनी बात जारी रखने का आग्रह किया और इस बहस के दौरान कुछ समय के लिए उनका माइक भी बंद किया गया, लेकिन उन्होंने अपनी बात पूरी की।
विधायक निधि और कमीशनखोरी का विवरण
बेनीवाल ने सदन को बताया कि राजस्थान में योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों में बच्चों के लिए उपयोग होने वाली दरियां, जिनकी वास्तविक कीमत 4 से 5 हजार रुपये है, उनके लिए 25 से 30 हजार रुपये के बिल पास कराए जा रहे हैं। सांसद के अनुसार, विधायकों द्वारा विकास कार्यों की स्वीकृति देने से पहले ही 40 से 50% तक कमीशन की मांग की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि यह भ्रष्टाचार केवल एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न राजनीतिक पृष्ठभूमि के विधायक शामिल हैं।
प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार विरोधी नारे का संदर्भ
अपने संबोधन के दौरान हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध नारे 'ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा' का उल्लेख किया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि इस नारे की सार्थकता सिद्ध करने के लिए राजस्थान के भ्रष्ट विधायकों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। बेनीवाल ने कहा कि जब भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहिष्णुता की बात की जाती है, तो ऐसे मामलों में चुप्पी नहीं साधी जानी चाहिए। उन्होंने विधानसभा की सदाचार समिति की कार्यप्रणाली पर भी असंतोष व्यक्त किया और कहा कि वहां मामलों को लटकाया जा रहा है।
विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग
सांसद ने लोकसभा में मांग की कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए चारों विधायकों की सदस्यता तुरंत रद्द की जानी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार संसद में सवाल पूछने के बदले लाभ लेने के आरोपों में सदस्यों की सदस्यता समाप्त की गई है, उसी तर्ज पर राजस्थान विधानसभा के इन सदस्यों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए और बेनीवाल ने स्पष्ट किया कि खींवसर विधायक सहित अन्य आरोपित विधायकों के विरुद्ध सख्त कदम उठाकर ही समाज में एक कड़ा संदेश भेजा जा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
