नागौर से सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बेनीवाल ने इस बजट को पूरी तरह से निराशाजनक बताते हुए दावा किया कि इसमें राजस्थान की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत' के नारे के बीच धरातल पर आम आदमी के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं।
राजस्थान की अनदेखी पर उठाए सवाल
सांसद हनुमान बेनीवाल ने बजट भाषण में राजस्थान का उल्लेख न होने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने केंद्र को बड़ी संख्या में सांसद दिए हैं और राज्य में कई महत्वपूर्ण रेलवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर परियोजनाएं चल रही हैं। इसके बावजूद बजट में राज्य के लिए किसी विशेष योजना या आवंटन का जिक्र नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है और बेनीवाल के अनुसार, रेल मंत्री और रेल राज्य मंत्री दोनों का संबंध राजस्थान से होने के बावजूद राज्य की इस तरह की उपेक्षा समझ से परे है।
किसानों और युवाओं की समस्याओं पर प्रहार
कृषि और रोजगार के मुद्दों पर बोलते हुए बेनीवाल ने कहा कि देश का किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर बजट में कोई स्पष्ट और ठोस घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और बेनीवाल के मुताबिक, सरकारी विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं, लेकिन बजट में रोजगार सृजन के जो साधन बताए गए हैं, वे वास्तविक रोजगार बढ़ाने में सक्षम नहीं दिखते। उन्होंने इसे युवाओं के साथ छलावा करार दिया।
महंगाई और आर्थिक रोडमैप की आलोचना
बेनीवाल ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। उन्होंने सोना-चांदी की कीमतों में हो रही वृद्धि पर भी चिंता जताई। 'विकसित भारत' के लक्ष्य पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के पास इसका कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है कि यह लक्ष्य कब तक प्राप्त होगा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यह सौ या दो सौ साल बाद होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का दृष्टिकोण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हनुमान बेनीवाल का यह रुख राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने और केंद्र सरकार के खिलाफ किसानों व युवाओं के मुद्दों को हवा देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि बजट में क्षेत्रीय आवंटन की कमी को विपक्ष एक बड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है। बेनीवाल ने इस बजट को देश के लिए 'जीरो' और राजस्थान के लिए 'डबल जीरो' की संज्ञा दी है।
निष्कर्ष के तौर पर, हनुमान बेनीवाल ने बजट 2026-27 को मध्यम वर्ग, किसानों और राजस्थान के हितों के खिलाफ बताया है। उनके अनुसार, यह बजट केवल आंकड़ों का मायाजाल है जिसमें आम जनता के लिए कोई वास्तविक राहत मौजूद नहीं है।
