राजस्थान के शहरी विकास और आवास (UDH) मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने नगर निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। सीकर दौरे के दौरान मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से चुनाव कराने में कोई बाधा नहीं है, लेकिन आरक्षण के प्रावधानों को लेकर कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। मंत्री के अनुसार, जब तक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग 'ट्रिपल टेस्ट' के तहत सर्वे कर अधिकृत आंकड़े सरकार को नहीं सौंपता, तब तक ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में नगर निकायों के पुनर्गठन और परिसीमन की प्रक्रिया पर चर्चा तेज है।
ट्रिपल टेस्ट की अनिवार्यता और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2022 और 2023 के फैसले अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के उदाहरण देते हुए बताया कि शीर्ष अदालत ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए 'ट्रिपल टेस्ट' को अनिवार्य बनाया है और 00% से अधिक न होने देना शामिल है। मंत्री के अनुसार, राजस्थान सरकार इन कानूनी मापदंडों का उल्लंघन नहीं कर सकती और आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनावी अधिसूचना जारी करना कानूनी जटिलताएं पैदा कर सकता है।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में देरी के कारण
मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन पहले ही किया जा चुका है और आयोग ने अपने कार्यकाल में वृद्धि भी करवाई थी। हालांकि, आयोग ने पूर्व में मार्च तक आंकड़े देने की बात कही थी, लेकिन वर्तमान स्थिति के अनुसार जिलों से प्राप्त आंकड़ों में कई विसंगतियां पाई गई हैं। आयोग का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सटीक और त्रुटिहीन डेटा जुटाने के लिए नए सिरे से अध्ययन और सर्वे की आवश्यकता है। मंत्री के अनुसार, आयोग द्वारा अधिकृत आंकड़े सौंपे जाने के बाद ही सरकार आरक्षण की श्रेणी और वार्डों की स्थिति स्पष्ट कर पाएगी।
परिसीमन और राजस्थान हाईकोर्ट का हालिया फैसला
नगर निकायों के पुनर्गठन और वार्डों के परिसीमन पर चल रहे विवाद के बीच मंत्री ने राजस्थान हाईकोर्ट के 6 मार्च के फैसले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अदालत ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 10 की वैधता को बरकरार रखा है। इस धारा के तहत राज्य सरकार को नगर निकायों का परिसीमन और वार्डों के पुनर्गठन का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किया गया पुनर्गठन का कार्य पूरी तरह से कानूनी है और इसे अदालत ने भी मान्यता दी है। सरकार ने अपने स्तर पर पुनर्गठन का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया है और अब गेंद पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग के पाले में है।
सितंबर तक प्रशासनिक कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य
चुनावी तैयारियों की समयसीमा पर चर्चा करते हुए यूडीएच मंत्री ने कहा कि नगर निकाय से जुड़े शेष प्रशासनिक और तकनीकी कार्य सितंबर तक पूरे कर लिए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि सभी कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि चुनावों में किसी भी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी पक्ष को परिसीमन या आरक्षण प्रक्रिया पर कोई आपत्ति है, तो वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। सरकार पारदर्शी तरीके से आंकड़ों के संकलन और वार्डों के निर्धारण के लिए प्रतिबद्ध है।
सीकर में औद्योगिक मेले का शुभारंभ और प्रशासनिक उपस्थिति
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने यह बयान सीकर के जयपुर रोड स्थित अर्बन हाट बाजार में आयोजित 'शेखावाटी पंच गौरव उद्योग' और 'राजसखी मेले' के शुभारंभ के अवसर पर दिया। इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद सुमेधानंद सरस्वती, एडीएम रतन कुमार स्वामी और जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक विकास सिहाग सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। मंत्री ने इस दौरान स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को भी सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
