राजस्थान राजनीतिक चंदा: भाजपा को मिला कांग्रेस से साढ़े तीन गुना अधिक फंड

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान से भाजपा को ₹87.51 करोड़ का चंदा मिला है, जो कांग्रेस के ₹25 करोड़ से लगभग साढ़े तीन गुना अधिक है। राज्य से कुल ₹112.97 करोड़ की फंडिंग हुई, जिसमें वेदांता समूह सबसे बड़ा दानदाता रहा।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राजस्थान से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 97 करोड़ का राजनीतिक चंदा विभिन्न दलों को प्राप्त हुआ है। 51 करोड़ मिले हैं, जो राज्य से प्राप्त कुल चंदे का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा है। इसके विपरीत, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को केवल ₹25 करोड़ का चंदा मिला है, जो कुल हिस्सेदारी का लगभग 22 प्रतिशत बैठता है।

राजस्थान देश भर में राजनीतिक चंदा देने वाले राज्यों की सूची में सातवें स्थान पर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में राजनीतिक फंडिंग का मुख्य स्रोत कॉर्पोरेट घराने और व्यावसायिक समूह रहे हैं। 27 करोड़ का योगदान दिया है। वहीं, व्यक्तिगत दानदाताओं की ओर से भी बड़ी राशि राजनीतिक दलों के कोष में जमा की गई है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि सत्ताधारी दल और मुख्य विपक्षी दल के बीच चंदे का अंतर काफी अधिक रहा है, जहां भाजपा को कांग्रेस की तुलना में साढ़े तीन गुना से भी ज्यादा राशि प्राप्त हुई है।

भाजपा और कांग्रेस के चंदे का तुलनात्मक विवरण

51 करोड़ की राशि ने उसे वित्तीय मोर्चे पर सबसे मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस को प्राप्त ₹25 करोड़ की राशि भाजपा के मुकाबले काफी कम है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो भाजपा ने राज्य के कुल चंदे का तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा प्राप्त किया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि बड़े दानदाताओं और कॉर्पोरेट समूहों का झुकाव प्रमुख रूप से भाजपा की ओर रहा है। चंदे की यह राशि सीधे तौर पर दलों के चुनावी और संगठनात्मक खर्चों के लिए उपयोग की जाती है।

कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत दानदाताओं का योगदान

राजस्थान में राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है और 27 करोड़ का योगदान देकर अपनी प्रमुख भूमिका दर्ज कराई है। 70 करोड़ का चंदा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट जगत से मिलने वाला चंदा अक्सर बड़े औद्योगिक समूहों के माध्यम से आता है, जबकि व्यक्तिगत चंदा छोटे व्यापारियों और समर्थकों द्वारा दिया जाता है। इस बार कॉर्पोरेट फंडिंग का बड़ा हिस्सा भाजपा के खाते में गया है।

प्रमुख दानदाता और वेदांता समूह की भूमिका

दानदाताओं की सूची में वेदांता समूह सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता समूह ने अकेले भाजपा को लगभग ₹67 करोड़ का चंदा दिया है। इसके अलावा, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए भाजपा को ₹15 करोड़ और कांग्रेस को ₹10 करोड़ का योगदान दिया। अन्य प्रमुख दानदाताओं में श्री सीमेंट ने ₹15 करोड़, वंडर सीमेंट ने ₹11 करोड़, आरएसडब्ल्यूएम लिमिटेड ने ₹5 करोड़ और श्रीराम इंडस्ट्रीज ने ₹3 करोड़ की राशि भाजपा को प्रदान की है। इन बड़े औद्योगिक समूहों के योगदान ने भाजपा की कुल फंडिंग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अन्य राजनीतिक दलों की वित्तीय स्थिति

प्रमुख दलों के अलावा अन्य राजनीतिक संगठनों को राजस्थान से मिलने वाला चंदा काफी सीमित रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्य से मात्र ₹39 लाख का चंदा प्राप्त हुआ है। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) को केवल ₹7 लाख की राशि मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा और कांग्रेस के अलावा बाकी सभी दलों को मिलाकर कुल चंदे का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा प्राप्त हुआ है। यह आंकड़े राजस्थान की राजनीति में वित्तीय संसाधनों के केंद्रीकरण को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करते हैं।