- भारत,
- 02-Jan-2026 12:34 PM IST
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उगाही के मामले में दोषी ठहराए गए विनोद घोगले को आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी है। अदालत ने घोगले की दोषसिद्धि पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिससे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी अयोग्यता समाप्त हो गई है। यह फैसला मुंबई के राजनीतिक और कानूनी गलियारों में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह एक ऐसे व्यक्ति को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर देता है जो पहले एक गंभीर अपराध में दोषी ठहराया जा चुका है।अदालत का महत्वपूर्ण फैसला और उसका औचित्य
अपनी दोषसिद्धि और उसके परिणामस्वरूप हुई अयोग्यता के खिलाफ, विनोद घोगले ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। उनकी अपील का मुख्य आधार यह था कि जब तक उनकी अपील पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाई जाए ताकि उन्हें चुनाव लड़ने का अपना संवैधानिक अधिकार मिल सके। अदालत में सुनवाई के दौरान, घोगले के वकीलों ने तर्क दिया कि यदि अपील लंबित रहने के दौरान दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है, तो उन्हें ऐसी अपूरणीय क्षति होगी जिसकी भरपाई बाद में नहीं की जा सकेगी और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव लड़ने का अधिकार एक लोकतांत्रिक समाज में एक नागरिक का मौलिक और महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने घोगले के तर्कों को स्वीकार करते हुए उनकी दोषसिद्धि पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि अपील पर अंतिम निर्णय आने तक दोषसिद्धि पर रोक लगाना आवश्यक है और जजों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती, तो घोगले को ऐसी अपूरणीय क्षति हो सकती थी जिसे बाद में ठीक करना संभव नहीं होता। अदालत ने यह भी माना कि चुनाव लड़ने का अधिकार हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था। का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। इस फैसले के माध्यम से, अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि किसी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों को तब तक नुकसान न पहुंचे जब तक कि उसकी अपील पर अंतिम न्यायिक निर्णय न आ जाए।
