मुंबई में मेयर पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बीएमसी चुनाव में महायुति (बीजेपी और शिंदे की शिवसेना) को मिली शानदार जीत के बाद यह लगभग तय माना जा रहा था कि मेयर बीजेपी का ही होगा। हालांकि, शिंदे की शिवसेना द्वारा अपने पार्षदों को एक होटल में ठहराए जाने और अब कांग्रेस के भी इस दौड़ में कूदने से स्थिति काफी दिलचस्प हो गई है। कांग्रेस बीजेपी को मेयर बनने से रोकने के लिए उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मिलकर एक नई रणनीति तैयार कर रही है।
शिंदे गुट के पार्षदों का होटल में ठहराव
बीएमसी चुनावों के नतीजे आने के बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक आलीशान होटल में ठहरा दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह कदम पार्षदों को व्यस्त चुनावी माहौल के बाद तरोताजा करने और उन्हें 'प्रशिक्षण' देने के लिए उठाया गया है और हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संभावित दल-बदल या अन्य राजनीतिक जोड़तोड़ को रोकने के लिए उठाया गया है, जिससे मुंबई के मेयर पद को लेकर रहस्य और गहरा गया है। उद्धव ठाकरे के बयान के बाद यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
कांग्रेस की एंट्री और बीजेपी को रोकने का प्लान
मेयर पद की दौड़ में अब कांग्रेस भी कूद पड़ी है। कांग्रेस नेता नसीम खान ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी बीजेपी को मेयर बनने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है और बीजेपी को रोकने के लिए वे सभी विकल्प खुले रखेंगे। खान ने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे अपने पार्षदों को होटल में रखने से डरे हुए हैं और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि शिवसेना (यूबीटी) सहित कई दलों से उनके अच्छे संबंध हैं और बातचीत जारी है, जिससे भविष्य में संभावित गठजोड़ की ओर इशारा मिलता है।
महाराष्ट्र कांग्रेस की मंथन बैठक
बीएमसी चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद, उद्धव ठाकरे ने एक बयान दिया। था जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर भगवान ने चाहा तो मेयर बन सकता है। उनके इस बयान ने भी सियासी हलचल को तेज कर दिया था और यह संकेत दिया था कि शिवसेना (यूबीटी) अभी भी मेयर पद की दौड़ से बाहर नहीं हुई है और कांग्रेस के साथ संभावित गठजोड़ की खबरें उनके इस बयान को और भी बल देती हैं, जिससे बीजेपी के लिए मेयर पद की राह आसान नहीं दिख रही है।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने हाल ही में महानगरपालिका चुनाव नतीजों पर एक महत्वपूर्ण मंथन बैठक की। इस बैठक में उन महानगरपालिकाओं के परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई जहां कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप अच्छा नहीं रहा। बैठक में AIMIM फैक्टर पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई,। खासकर मराठवाड़ा क्षेत्र में AIMIM के शानदार प्रदर्शन पर चिंता व्यक्त की गई। कांग्रेस नेताओं ने सभी वर्ग के मतदाताओं का विश्वास जीतने के तरीकों। पर भी विचार-विमर्श किया, जो भविष्य की रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
बीएमसी चुनाव परिणाम: एक नजर
शुक्रवार को हुई मतगणना में, बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के गठबंधन ने 227 सदस्यीय बीएमसी में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। बीजेपी को 89 सीटें मिलीं, जबकि शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं, जिससे महायुति का कुल आंकड़ा 118 हो गया। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को 6 सीटें मिलीं और वंचित बहुजन आघाडी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने 8 सीटें जीतीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को 3, समाजवादी पार्टी (SP) को 2 और राकांपा (SP) को सिर्फ 1 सीट मिली। इन परिणामों के बावजूद, मेयर पद को लेकर चल रही खींचतान ने मुंबई की राजनीति को और भी रोमांचक बना दिया है।