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- 02-Jan-2026 08:51 AM IST
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के दिग्गज ओपनिंग बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा. कर दी है, जिससे उनके करियर को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है. यह घोषणा इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में होने वाले पांचवें और अंतिम एशेज. टेस्ट मैच से ठीक पहले की गई है, जो 4 जनवरी से शुरू होगा. ख्वाजा ने 2 जनवरी को सिडनी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपने संन्यास का ऐलान किया, जो उनके करियर का समापन उसी मैदान पर करेगा जहां से उन्होंने 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट से शुरुआत की थी और यह एक भावनात्मक क्षण है, क्योंकि सिडनी उनका गृह नगर है और उन्होंने यहीं से अपना फर्स्ट क्लास करियर भी शुरू किया था.
अपने संन्यास की घोषणा के साथ ही उस्मान ख्वाजा ने ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और पूर्व क्रिकेटरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि उनके पूरे करियर के दौरान और हालिया एशेज सीरीज में भी उन्हें नस्लभेद का सामना करना पड़ा. ख्वाजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि उन्हें एक अश्वेत क्रिकेटर होने के कारण अलग तरह से महसूस कराया गया और उनके साथ बर्ताव में भेदभाव था. उन्होंने विशेष रूप से पर्थ टेस्ट के दौरान हुई एक घटना का जिक्र किया, जहां पीठ में जकड़न के कारण वे बल्लेबाजी नहीं कर पाए थे, और इसके बाद मीडिया व पूर्व क्रिकेटरों द्वारा उन पर किए गए हमलों को नस्लभेद से प्रेरित बताया.पर्थ टेस्ट की घटना और मीडिया का रवैया
ख्वाजा ने पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट मैच के दौरान. फील्डिंग करते समय अपनी पीठ में हुई जकड़न का विस्तृत उल्लेख किया. इस चोट के कारण वे मैच की दोनों पारियों में बल्लेबाजी नहीं कर पाए थे. इस घटना से पहले, ख्वाजा गोल्फ खेल रहे थे, जिसके बाद उन पर सवाल उठाए जाने लगे. उन्होंने बताया कि उन्हें आलसी, खुदगर्ज कहा गया और उनकी तैयारियों पर भी सवाल खड़े किए गए. ख्वाजा ने इस बात पर जोर दिया कि कई अन्य खिलाड़ी भी गोल्फ खेलते हुए चोटिल हुए हैं, लेकिन उन्हें कभी इस तरह से निशाना नहीं बनाया गया. उनके अनुसार, यह दोहरा मापदंड उनके साथ करियर की शुरुआत से ही होता रहा है और इसमें नस्लवाद की स्पष्ट झलक दिखती है. उन्होंने कहा कि वे दो दिन तक ऐसी आलोचना बर्दाश्त कर सकते थे, लेकिन लगातार पांच. दिनों तक उन्हें यह सब झेलना पड़ा, और यह उनके प्रदर्शन से जुड़ा भी नहीं था.
