देश / वरुण गांधी ने लखीमपुर हिंसा की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग की

पीलीभीत के भाजपा सांसद वरुण गांधी ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की, जिसमें चार किसानों सहित नौ लोगों की मौत हो गई। उन्होंने हिंदी में लिखे पत्र में कहा, "अगर [प्रदर्शनकारियों] को कुछ मुद्दों से समस्या है... तो हमें संयम रखना चाहिए और उनसे निपटने में धैर्य रखना चाहिए।"

लखनऊ: LakhimPur Khiri Violence : लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले में पीलीभीत से बीजेपी सांसद वरुण गांधी (BJP MP Varun Gandhi) ने भी प्रतिक्रिया दी है. वरुण गांधी ने लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में हुई हिंसा में 8 लोगों की मौत के मामले में यूपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को पत्र लिखा है. बीजेपी सांसद ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई से जांच कराने की मांग की है. लखीमपुर खीरी हिंसा में चार किसानों समेत 8 लोगों की मौत हुई है. पुलिस ने इस मामले में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा समेत 14 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है. प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) को पुलिस ने हिरासत में लेकर लखीमपुर खीरी से जाने से रोका है.

खीरी जिले के पड़ोस में ही वरुण गांधी का संसदीय क्षेत्र पीलीभीत है. वरुण गांधी ने सीएम को लिखा अपना पत्र ट्विटर पर साझा किया. सांसद ने सीबीआई जांच के साथ पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की है. वरुण गांधी ने लिखा कि धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा कायम कर सख्त कार्रवाई की जाए. पीड़ित परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया जाए.

बीजेपी सांसद ने मुख्यमंत्री से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि भविष्य में किसानों के साथ इस प्रकार का कोई भी अन्याय या ज्यादती न हो.  सांसद ने कहा, '3 अक्टूबर को खीरी में प्रदर्शन कर रहे किसानों को निर्दयतापूर्वक कुचलने की हृदयविदारक घटना हुई है, उससे  पूरे देश में एक पीड़ा और रोष है.'' इस घटना से एक दिन पहले ही देश ने अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी जी की जयंती मनाई थी. अगले ही दिन लखीमपुर खीरी में हमारे अन्नदाताओं की जिस घटनाक्रम में हत्या की गई वह किसी भी सभ्य समाज में अक्षम्य है.

वरुण ने लिखा, आंदोलनकारी किसान भाई हमारे अपने देश के नागरिक हैं. अगर कुछ मुद्दों को लेकर किसान भाई पीड़ित हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं तो हमें उनके साथ बड़े ही संयम एवं धैर्य के साथ बर्ताव करना चाहिए. हमें हर हाल में अपने किसानों के साथ केवल और केवल गांधीवादी व लोकतांत्रिक तरीके से कानून के दायरे में ही संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए.

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