विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' को लेकर उत्तर भारत के कई राज्यों में विरोध की आग सुलग उठी है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में सवर्ण समाज के छात्र और विभिन्न संगठन इस कानून के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कानून समाज को बांटने वाला और सवर्णों के हितों के खिलाफ है।
यूपी में पोस्टर वॉर और इस्तीफे का दौर
उत्तर प्रदेश के मेरठ, हापुड़ और अमेठी जैसे जिलों में विरोध प्रदर्शन काफी उग्र हो गया है। हापुड़ के सिंभावली क्षेत्र में दर्जनों घरों के बाहर 'सवर्ण अगेंस्ट बीजेपी' के पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों पर साफ लिखा है कि 'भाजपा नेता वोट मांगने न आएं, यह सवर्ण समाज का घर है। ' वहीं, अमेठी में इस कानून के विरोध में भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि यह कानून उनके वैचारिक और सामाजिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
करणी सेना की दिल्ली कूच की चेतावनी
राजस्थान में भी इस कानून का कड़ा विरोध हो रहा है। अलवर में करणी सेना ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बिल समाज में गहरी खाई खोदने का काम करेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर इस कानून को वापस नहीं लिया गया, तो वे पूरे देश में आंदोलन करेंगे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। करणी सेना का मानना है कि इस बिल का सीधा असर सवर्ण समाज की आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।
बिहार में चुप्पी और गाजियाबाद में नजरबंदी
बिहार के मधुबनी और वैशाली जिलों में भी सवर्ण समाज के लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वैशाली में जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया, तो वे सवालों से बचते नजर आए और दूसरी ओर, गाजियाबाद में डासना पीठ के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि को पुलिस ने उस समय नजरबंद कर दिया जब वे इस कानून के विरोध में दिल्ली जाकर अनशन करने वाले थे। उन्होंने योगी सरकार पर सवर्णों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
क्या है विवाद की असली वजह?
यूजीसी ने हाल ही में 'यूजीसी एक्ट 2026 इक्विटी रेगुलेशन' लागू किया है। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी (SC), एसटी (ST) और अब। ओबीसी (OBC) के लिए 'समान अवसर प्रकोष्ठ' बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। विवाद इस बात पर है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी 'जातिगत भेदभाव' की सूची में शामिल किया गया है। जनरल कैटेगरी के छात्रों का तर्क है कि जब ओबीसी को पहले से ही आरक्षण मिल रहा है, तो उन्हें इस विशेष श्रेणी में रखकर सवर्णों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।