अनिल अग्रवाल की वेदांता का धमाका, मुनाफे में 61% की भारी उछाल

अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड ने तीसरी तिमाही के नतीजों में सबको चौंका दिया है। कंपनी का शुद्ध लाभ 61% बढ़कर 5,710 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि राजस्व में भी 37% की शानदार बढ़त दर्ज की गई है।

दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की माइनिंग कंपनी वेदांता लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष। की तीसरी तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा कर दी है। कंपनी ने इस तिमाही में उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए बाजार विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। वेदांता का समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) सालाना आधार पर 61 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाकर 5,710 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है और पिछले साल की समान तिमाही में यह आंकड़ा काफी कम था।

राजस्व और मुनाफे में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि

वेदांता के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी का कुल राजस्व (Revenue) 37 प्रतिशत बढ़कर 23,369 करोड़ रुपये रहा। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) में धातुओं की ऊंची कीमतें, बेहतर सेल्स वॉल्यूम और विदेशी मुद्रा विनिमय से होने वाला लाभ (Forex Gain) रहा है। कंपनी ने न केवल अपने मुनाफे को बढ़ाया है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार किया है।

EBITDA और मार्जिन में ऐतिहासिक सुधार

वेदांता ने दिसंबर तिमाही में अब तक का सबसे अधिक तिमाही EBITDA दर्ज किया है और कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 34% और तिमाही आधार पर 31% बढ़कर 15,171 करोड़ रुपये हो गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कंपनी का EBITDA मार्जिन बढ़कर 41% हो। गया है, जो सालाना आधार पर 629 बेसिस पॉइंट की वृद्धि दर्शाता है। यह कंपनी के इतिहास का दूसरा सबसे ऊंचा मार्जिन है, जो इसकी मजबूत पकड़ को साबित करता है।

एल्युमिनियम और जिंक बिजनेस का कमाल

कंपनी के अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट की बात करें तो एल्युमिनियम बिजनेस ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया है और एल्यूमिना का उत्पादन 57% बढ़कर 794 किलो टन रहा। वहीं, एल्युमिनियम उत्पादन की लागत में 11% की कमी आई है, जिससे मार्जिन को सीधा फायदा मिला। जिंक इंडिया (हिंदुस्तान जिंक) ने भी अपना अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है। माइनिंग से निकले मेटल का उत्पादन 4% बढ़कर 276 किलो टन रहा, जबकि रिफाइंड मेटल का उत्पादन भी 270 किलो टन के स्तर को पार कर गया है।

कर्ज में कमी और भविष्य की योजनाएं

अनिल अग्रवाल की कंपनी ने अपने कर्ज प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया है। कंपनी का शुद्ध कर्ज घटकर 60,624 करोड़ रुपये रह गया है। नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात भी सुधरकर 1. 23 गुना हो गया है, जो पिछले साल 1. 40 गुना था। इसके अलावा, ऑयल और गैस बिजनेस में भी स्थिरता देखी गई है, जहां रोजाना औसत उत्पादन 84. 9 हजार बैरल रहा और आयरन ओर बिजनेस में भी कर्नाटक और गोवा ऑपरेशंस में उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

वेदांता के इन नतीजों ने शेयर बाजार में निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल पैदा कर दिया है। बेहतर उत्पादन क्षमता, लागत में कटौती और कर्ज कम करने की रणनीति ने कंपनी को एक मजबूत स्थिति में खड़ा कर दिया है। आने वाले समय में मेटल की कीमतों में स्थिरता और वैश्विक मांग में सुधार से वेदांता को और अधिक लाभ होने की संभावना है।