पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने 73 रिटर्निंग अधिकारियों का तबादला किया

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 73 रिटर्निंग अधिकारियों का तबादला कर दिया है। आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इन अधिकारियों को 24 मार्च तक कार्यभार संभालना होगा। राज्य में दो चरणों में मतदान होगा।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के औपचारिक ऐलान के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों का सिलसिला शुरू हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार देर रात एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्य के 73 रिटर्निंग अधिकारियों (RO) का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। यह कदम चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, चुनाव आयोग ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए तबादला प्रस्तावों की समीक्षा के बाद इस पर अपनी मुहर लगाई है।

प्रशासनिक फेरबदल और रिपोर्टिंग की समयसीमा

निर्वाचन आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक आदेश के अनुसार, स्थानांतरित किए गए सभी 73 अधिकारियों को अपने नए कार्यस्थलों पर रिपोर्ट करने के लिए सख्त समयसीमा दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों को 24 मार्च 2026 (मंगलवार) को शाम 5:00 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने आवंटित कार्यालयों में कार्यभार ग्रहण करना होगा। आयोग ने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी न करने के निर्देश दिए हैं। यह तबादले चुनावी मशीनरी को सुव्यवस्थित करने और स्थानीय स्तर पर किसी भी संभावित प्रभाव को कम करने के लिए किए गए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे कार्यभार संभालने के तुरंत बाद स्थानीय चुनावी तैयारियों का जायजा लें।

अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

स्थानांतरित किए गए रिटर्निंग अधिकारियों के लिए निर्वाचन आयोग ने एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी निर्धारित किया है। आदेश के मुताबिक, 25 मार्च 2026 (बुधवार) को सुबह 11:00 बजे से चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं और नियमों पर आधारित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में सभी 73 अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को मतदान केंद्रों के प्रबंधन, ईवीएम (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) के संचालन, नामांकन प्रक्रिया की बारीकियों और आदर्श आचार संहिता के कड़ाई से पालन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी अधिकारी चुनावी प्रोटोकॉल से पूरी तरह अवगत हों।

पश्चिम बंगाल चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल 2026 को होगा, जिसमें 152 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल 2026 को होगा, जिसमें शेष 142 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राज्य में वर्तमान सरकार का कार्यकाल 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, जिसे देखते हुए आयोग ने समयबद्ध तरीके से चुनाव संपन्न कराने की योजना तैयार की है। मतगणना और परिणामों की घोषणा 4 मई 2026 को की जाएगी, जिससे नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त होगा।

मतदाता सांख्यिकी और चुनावी तैयारियां

04 करोड़ है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी को देखते हुए आयोग ने सुरक्षा और लॉजिस्टिक के व्यापक इंतजाम किए हैं। राज्य की सभी 294 सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती और संवेदनशील बूथों की पहचान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। रिटर्निंग अधिकारियों के तबादले इसी व्यापक सुरक्षा और प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की प्रशासनिक शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी अधिकारियों को निष्पक्षता के उच्चतम मानकों का पालन करना होगा।

आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही पूरे पश्चिम बंगाल में आदर्श आचार संहिता (MCC) प्रभावी हो गई है और इसके तहत सरकारी घोषणाओं, नई परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकलुभावन योजनाओं पर रोक लगा दी गई है। चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को निर्देश दिया है कि सार्वजनिक स्थानों से राजनीतिक विज्ञापनों और होर्डिंग्स को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाए। स्थानांतरित किए गए रिटर्निंग अधिकारियों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों पर कड़ी नजर रखें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को अनुचित लाभ लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।