मुकुल चौधरी: कौन हैं LSG के नए हीरो? सिर्फ दूसरे नाइट मैच में मचाया धमाल

लखनऊ सुपर जायंट्स के 21 वर्षीय खिलाड़ी मुकुल चौधरी ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ 27 गेंदों में 54 रनों की नाबाद पारी खेलकर अपनी टीम को 3 विकेट से रोमांचक जीत दिलाई। राजस्थान के झुंझुनू से आने वाले इस युवा बल्लेबाज ने केवल अपने दूसरे नाइट मैच में यह कारनामा किया है।

लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच खेले गए मुकाबले में एक नया सितारा उभरकर सामने आया है। 21 साल के युवा बल्लेबाज मुकुल चौधरी ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से न केवल मैच का पासा पलटा, बल्कि अपनी टीम को हार के मुंह से बाहर निकालकर शानदार जीत दिलाई। 182 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए लखनऊ की टीम एक समय 16 ओवर में 128 रन पर 7 विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी, लेकिन मुकुल चौधरी की नाबाद 54 रनों की पारी ने असंभव को संभव कर दिखाया।

मुकुल चौधरी की तूफानी पारी और मैच का रुख

कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ जीत के लिए लखनऊ को अंतिम ओवरों में तेजी से रनों की दरकार थी। मुकुल चौधरी ने क्रीज पर आते ही आक्रामक रुख अपनाया और महज 27 गेंदों पर 54 रनों की नाबाद पारी खेली। उनकी इस पारी में 2 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। जब टीम के अनुभवी बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे, तब मुकुल ने जिम्मेदारी संभाली और केकेआर के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। उनकी पावर हिटिंग की बदौलत लखनऊ ने 3 विकेट शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।

सिर्फ दूसरा नाइट मैच और बड़ा कारनामा

मैच के बाद मुकुल चौधरी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का केवल दूसरा मैच था जो दूधिया रोशनी (अंडर लाइट्स) में खेला गया था। इससे पहले उन्होंने अपना पहला नाइट मैच भी इसी आईपीएल सीजन में खेला था। आमतौर पर खिलाड़ियों को नाइट मैचों के माहौल और रोशनी के साथ तालमेल बिठाने में समय लगता है, लेकिन मुकुल ने कम अनुभव के बावजूद पेशेवर अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने स्वीकार किया कि अंडर लाइट्स खेलना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन उन्होंने इसे खुद को साबित करने के अवसर के रूप में देखा।

पिता का सपना और झुंझुनू से सफर

मुकुल चौधरी राजस्थान के झुंझुनू जिले के गुढ़ागौड़जी कस्बे के रहने वाले हैं और उनकी सफलता के पीछे उनके पिता का अटूट विश्वास और संघर्ष छिपा है। मुकुल के अनुसार, उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा एक पेशेवर क्रिकेटर बने। जब मुकुल पहली बार क्रिकेट की ट्रेनिंग के लिए अपने गांव से निकले थे, तब उनके पिता ने उनसे कहा था कि जब तक वह एक सफल क्रिकेटर बनकर सम्मान हासिल न कर लें, तब तक गांव वापस न लौटें। इसी जिद और जुनून ने उन्हें आज आईपीएल के बड़े मंच तक पहुंचाया है।

सीकर से दिल्ली और आईपीएल तक का रास्ता

मुकुल की क्रिकेट यात्रा आसान नहीं रही। उनके गृहनगर सीकर में शुरुआत में अच्छी क्रिकेट अकादमियों का अभाव था। उन्होंने सीकर की एबीएस क्रिकेट एकेडमी में शुरुआती ट्रेनिंग ली, लेकिन अपने खेल को निखारने के लिए उन्हें दिल्ली और गुड़गांव का रुख करना पड़ा। वहां विभिन्न क्लब मैचों और टूर्नामेंटों में हिस्सा लेने से उन्हें प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का अनुभव मिला। मुकुल ने बताया कि वह बचपन से ही बड़े छक्के मारने के शौकीन रहे हैं और आईपीएल में भी उन्होंने इसी नैसर्गिक खेल को जारी रखा।

मैच के बाद मुकुल की प्रतिक्रिया

अपनी पारी के बारे में बात करते हुए मुकुल ने कहा कि उनका लक्ष्य अंत तक बल्लेबाजी करना था। उन्होंने बताया कि पिछले दो मैचों में वह एक भी छक्का नहीं लगा पाए थे, इसलिए इस मैच का पहला छक्का उनके लिए बेहद खास था। मुकुल के अनुसार, उन्हें पता था कि गेंदबाज स्लॉट में गेंद जरूर डालेंगे और वह बस उसी मौके का इंतजार कर रहे थे और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय भगवान और अपने परिवार के समर्थन को दिया, जिन्होंने कठिन समय में भी उनका साथ नहीं छोड़ा।