स्विट्जरलैंड के बर्फीले पहाड़ों के बीच दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) इस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का सबसे बड़ा अखाड़ा बन गया है। इस मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहुंचने से पहले ही माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की अमेरिकी महत्वाकांक्षा और विभिन्न देशों पर लगाए गए नए टैरिफ के प्रस्तावों ने यूरोपीय और नाटो देशों को एकजुट कर दिया है। विश्व के दिग्गज नेताओं ने एक सुर में अमेरिका के इन कदमों की आलोचना की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया है। ट्रंप बुधवार को इस सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं लेकिन उनके। आने से पहले ही उन्हें कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रीनलैंड मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय आक्रोश
दावोस में ग्रीनलैंड का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है और यूरोपीय संघ और नाटो के सदस्य देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि डेनमार्क के इस स्वायत्त क्षेत्र पर किसी भी प्रकार का अमेरिकी दबाव स्वीकार्य नहीं होगा। नेताओं ने ट्रंप के उन प्रयासों को अवैध बताया है जिसमें वे ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने की बात कर रहे हैं। इस मुद्दे ने अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगियों के साथ उसके संबंधों में दरार पैदा कर दी है। ट्रंप की इस योजना को न केवल संप्रभुता का उल्लंघन माना जा रहा है बल्कि इसे वैश्विक स्थिरता के लिए भी खतरा बताया जा रहा है।
टैरिफ की धमकी और आर्थिक युद्ध
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावोस पहुंचने से पहले ही उन देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है जो ग्रीनलैंड के मामले में अमेरिका का समर्थन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगले महीने से टैरिफ 10 प्रतिशत से शुरू होंगे और जून तक इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इस घोषणा ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि यदि ट्रंप इन टैरिफ को लागू करते हैं तो यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया अटल और एकजुट होगी और उन्होंने इसे पिछले साल हुए व्यापार समझौतों का उल्लंघन बताया है।
ट्रंप का बयान और दावोस यात्रा में बाधा
अपनी दावोस यात्रा से पहले ट्रंप ने एक टेक्स्ट संदेश के जरिए अपना रुख स्पष्ट किया था और उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री से कहा कि अब वे केवल शांति के बारे में सोचने के लिए बाध्य नहीं हैं क्योंकि उन्हें पिछले साल नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया गया। ट्रंप की यह आक्रामक शैली दावोस में उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी इस यात्रा की शुरुआत भी बाधाओं के साथ हुई। एयर फोर्स वन में आई तकनीकी खराबी के कारण उनके विमान को वापस मुड़ना पड़ा जिससे उनकी स्विट्जरलैंड पहुंचने में देरी हुई।
वैश्विक नेताओं के तीखे हमले
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप का नाम लिए बिना उन पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दुनिया में नियम आधारित व्यवस्था अब खत्म होती दिख रही है क्योंकि शक्तिशाली देश छोटे और मध्यम देशों की संप्रभुता पर हमला कर रहे हैं। वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ट्रंप के टैरिफ प्रस्तावों को पूरी तरह गलत ठहराया है। मैक्रों ने कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर नाटो और यूरोपीय देश पूरी तरह एकजुट हैं और वे किसी भी प्रकार की ज्यादती का विरोध करेंगे।
भारत की दमदार उपस्थिति और अश्विनी वैष्णव का संबोधन
इस वैश्विक मंच पर भारत ने अपना अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत का नेतृत्व करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की तकनीक पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का एक विश्वसनीय भागीदार बनकर उभरा है। वैष्णव ने 5वीं औद्योगिक क्रांति की अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि भारत की एआई तकनीक समावेशी और लोकतांत्रिक है और उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का ध्यान केवल बड़े मॉडल बनाने पर नहीं बल्कि कम लागत वाले और उच्च रिटर्न वाले समाधानों पर है। भारत की इस प्रगति की दावोस में काफी सराहना की जा रही है।