हूतियों पर टूटेगा यमन का कहर: राष्ट्रपति ने किया जंग का ऐलान, कब्जे वाली जमीन छुड़ाने का संकल्प

यमन के राष्ट्रपति रशद मोहम्मद अल-अलीमी ने हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस पाने के लिए सैन्य अभियान की घोषणा की है। हूतियों ने सऊदी अरामको पर हमले का दावा किया जिसे सऊदी अरब ने खारिज कर दिया है। तैज और अन्य मोर्चों पर भीषण लड़ाई जारी है।

यमन के राष्ट्रपति रशद मोहम्मद अल-अलीमी ने देश के उन हिस्सों पर फिर से नियंत्रण पाने के लिए एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की घोषणा की है जो वर्तमान में हूती विद्रोहियों के कब्जे में हैं और राष्ट्रपति अल-अलीमी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यमन आज अपने इतिहास के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश ने शांति की स्थापना के लिए अब तक बड़ी कुर्बानियां दी हैं, लेकिन अब हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों को मुक्त कराना अनिवार्य हो गया है।

सैन्य अभियान के मुख्य उद्देश्य

राष्ट्रपति अल-अलीमी के अनुसार, इस सैन्य ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य हूतियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनके अधिकारों तथा सम्मान को बहाल करना है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह सैन्य कार्रवाई आम नागरिकों के खिलाफ नहीं है। राष्ट्रपति ने मिलिशिया के नियंत्रण वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे हूतियों के सैन्य जमावड़े वाली जगहों से दूर रहें। साथ ही, उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों को इस लड़ाई में शामिल होने से बचाने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जंग सना, होदेइदा और सादा के लोगों के खिलाफ नहीं है और न ही यह किसी विशेष समूह या कबीले के विरुद्ध है।

सऊदी अरब के साथ साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय अपील

अपने संबोधन के दौरान, अल-अलीमी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यमन के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने सऊदी अरब को यमन की साझा नियति और सुरक्षा में एक सच्चा भागीदार बताया। राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के नेतृत्व और वहां की जनता द्वारा दिए गए निरंतर समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यमन और सऊदी अरब की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और यह सैन्य अभियान क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

हूतियों का अरामको पर हमले का दावा

दूसरी ओर, हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया है कि उनके समूह ने रियाद में सऊदी अरामको की एक फैसिलिटी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। हूती समर्थित अल मसीरा चैनल के अनुसार, सारी ने दावा किया कि इस ऑपरेशन ने अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया और लक्षित स्थानों पर आग लग गई और हूतियों का कहना है कि यह हमला सना और यमन के अन्य हिस्सों पर सऊदी अरब द्वारा किए गए हमलों का जवाब था। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने भी रियाद के दक्षिण में एक अरामको फैसिलिटी के पास धुआं और आग की लपटें देखे जाने की जानकारी दी थी।

सऊदी अरब द्वारा हूतियों के दावों का खंडन

सऊदी अरब ने हूतियों के इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने हूतियों के बयान को गुमराह करने वाला और एक दिखावटी जीत पेश करने की कोशिश बताया। अल-मलिकी ने कहा कि हूती मिलिशिया युद्ध के मैदान में हो रहे अपने नुकसान और जनता के बढ़ते गुस्से से ध्यान हटाने के लिए इस तरह के झूठे दावे कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तैज और अन्य मोर्चों पर हूतियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और वे अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए प्रोपेगेंडा का सहारा ले रहे हैं।

तैज और अन्य मोर्चों पर भीषण संघर्ष

यमन के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके तैज के आसपास लड़ाई काफी तेज हो गई है। यमन की सरकारी सेना ने बताया कि उन्होंने तैज और तूर अल-बहाह फ्रंट पर हूतियों के खिलाफ 97 ऑपरेशन चलाए हैं। इन कार्रवाइयों में बड़ी संख्या में हूती लड़ाकों के मारे जाने की खबर है। सरकारी सेना ने सना और सादा में भी हूती ठिकानों को निशाना बनाया है। तैज शहर वर्तमान में हूती सेना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की समर्थक सेना के बीच बंटा हुआ है, जिससे यह संघर्ष का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

वैश्विक चिंता और मानवीय संकट

यमन में फिर से शुरू हुई इस भीषण लड़ाई ने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर रेड सी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर और यह इलाका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा शिपमेंट के लिए एक अनिवार्य गलियारा है। सीजफायर के टूटने और शत्रुता में वृद्धि के कारण मानवीय संकट और गहरा गया है। प्रभावित इलाकों में भोजन की भारी कमी और बड़े पैमाने पर विस्थापन की खबरें आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों का जीवन और भी कठिन हो गया है।