ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपनी भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई बड़े बयान दिए हैं और अराघची ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान से संबंधित किसी भी मुद्दे का कोई सैन्य समाधान नहीं है और ईरान हमेशा से कूटनीति और बातचीत के पक्ष में रहा है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए कहा कि ईरान वहां से सभी जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने देने के लिए पूरी तरह तैयार है। विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा नहीं रखी है और वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और समुद्री यातायात
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर अराघची ने स्वीकार किया कि वर्तमान में वहां के हालात बहुत जटिल हैं। उन्होंने कहा कि इस जटिलता के बावजूद, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत के जरिए समझौते के अलावा इस स्थिति का कोई और समाधान नहीं हो सकता है। अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त किया कि ईरान जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद करने की कोशिश कर रहा है और जैसे ही आक्रामकता की वर्तमान कार्रवाई पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, क्षेत्र में सब कुछ सामान्य हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज की स्थिति को सुधारने के लिए चीन द्वारा उठाए जाने वाले किसी भी कदम का ईरान स्वागत करेगा।
भारत के साथ उच्च स्तरीय वार्ता और साझा हित
अपनी भारत यात्रा के दौरान अराघची ने भारतीय नेतृत्व के साथ हुई मुलाकातों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संक्षिप्त लेकिन बहुत अच्छी बातचीत हुई और इसके अलावा, उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक लंबी और विस्तृत बैठक की। इन बैठकों के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी क्षेत्र की स्थिति सहित लगभग सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई और अराघची ने कहा कि ईरान और भारत के विचार इन मुद्दों पर लगभग एक जैसे हैं और इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में दोनों देशों की चिंताएं और हित भी समान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने भारतीय सहयोगियों के साथ निरंतर समन्वय जारी रखेगा और पश्चिम एशिया संकट पर भारत की किसी भी रचनात्मक भूमिका का स्वागत करेगा।
कूटनीति, युद्धविराम और अंतरराष्ट्रीय संबंध
ईरानी विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और मध्यस्थता के प्रयासों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति को मौका देने के लिए युद्धविराम को बरकरार रखने की पूरी कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान द्वारा की गई मध्यस्थता के बारे में उन्होंने कहा कि यह प्रयास अभी तक विफल नहीं हुए हैं और अमेरिका के साथ संबंधों पर टिप्पणी करते हुए अराघची ने कहा कि ईरान के पास अमेरिका पर भरोसा न करने के सभी पर्याप्त कारण मौजूद हैं, जबकि अमेरिकियों के पास ईरान पर भरोसा करने के सभी कारण हैं। उन्होंने दोहराया कि ईरान का लक्ष्य क्षेत्र में शांति स्थापित करना है और वह किसी भी प्रकार की आक्रामकता के समाप्त होने का इंतजार कर रहा है ताकि स्थितियां फिर से सामान्य हो सकें।
अराघची ने अंत में इस बात पर बल दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में स्थिरता सुनिश्चित करना ईरान की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच साझा हितों को देखते हुए दोनों देश इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे ही वर्तमान आक्रामकता समाप्त होगी, समुद्री यातायात और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी, जिससे वैश्विक व्यापार और सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।