अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी दो दिवसीय चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक के दौरान दोनों वैश्विक नेताओं के बीच कई संवेदनशील और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के समापन के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों के साथ बातचीत की और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विषयों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान ताइवान की सुरक्षा, हथियारों की बिक्री, साइबर हमले और व्यापारिक समझौतों जैसे विषयों पर तीखे सवाल पूछे गए, जिनका ट्रंप ने अपने विशिष्ट अंदाज में उत्तर दिया। बैठक के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब शी जिनपिंग ने कहा कि अमेरिका पतन की ओर जा रहा है। इस पर ट्रंप ने अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि वह इससे 100 फीसदी सहमत हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थिति जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान थी।
ताइवान की रक्षा और हथियारों की बिक्री पर ट्रंप का रुख
जब एक पत्रकार ने राष्ट्रपति ट्रंप से सीधा सवाल किया कि यदि ताइवान पर हमला होता है, तो क्या संयुक्त राज्य अमेरिका उसकी रक्षा के लिए आगे आएगा, तो ट्रंप ने इस पर कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता जताने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कहना चाहता। " ट्रंप ने खुलासा किया कि बैठक के दौरान स्वयं राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनसे यही सवाल पूछा था। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने शी जिनपिंग को स्पष्ट कर दिया था कि वे इन विषयों पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं करते हैं और जब रिपोर्टर ने दोबारा पूछा कि क्या उन्होंने सेना भेजने के बारे में बात की, तो ट्रंप ने दोहराया कि शी ने उनसे पूछा था कि क्या वह ताइवान की रक्षा करेंगे, जिस पर ट्रंप का जवाब था कि वह इस बारे में चर्चा नहीं करते। ताइवान को हथियारों की बिक्री के संबंध में पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने संकेत दिया कि इस पर जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है।
शी जिनपिंग का नेतृत्व और साइबर हमलों का मुद्दा
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह शी जिनपिंग को एक तानाशाह मानते हैं, तो उन्होंने बहुत ही कूटनीतिक उत्तर दिया। ट्रंप ने कहा, "वह एक शासक हैं। वह चीन के राष्ट्रपति हैं। मैं इस बारे में नहीं सोचता। जो स्थिति है, उसी के अनुसार काम करना पड़ता है। मैं उनका सम्मान करता हूं। वह बहुत बुद्धिमान हैं और अपने देश से प्यार करते हैं। " साइबर हमलों के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच सीधी बात हुई। ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्होंने शी जिनपिंग से अमेरिका में चीन द्वारा किए गए साइबर हमलों के बारे में बात की। इसके जवाब में शी जिनपिंग ने चीन में अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का मुद्दा उठाया।
ईरान, पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय संबंध
ईरान के मुद्दे पर बात करते हुए ट्रंप ने एक महीने के युद्धविराम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें शायद कुछ "सफाई" करनी पड़ सकती है क्योंकि यह युद्धविराम अन्य देशों के अनुरोध पर किया गया था। ट्रंप ने विशेष रूप से पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान पर एहसान करते हुए यह युद्धविराम किया था और उन्होंने पाकिस्तान के लोगों, वहां के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए उन्हें "शानदार" बताया। इसके अलावा, जब उनसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के इस्तीफे के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि वह ऐसा नहीं कहेंगे और उन्हें लगता है कि स्टारमर वास्तव में एक अच्छे इंसान हैं।
बोइंग और जनरल इलेक्ट्रिक के साथ बड़े व्यापारिक समझौते
चीन के साथ व्यापारिक संबंधों पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कुछ बड़े आंकड़ों का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कई बेहतरीन व्यापारिक समझौते हुए हैं। इसमें बोइंग से 200 से अधिक विमानों का ऑर्डर और भविष्य में 750 विमानों का वादा शामिल है। ट्रंप ने कहा कि अगर बोइंग इन 200 विमानों का सफलतापूर्वक उत्पादन करता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा ऑर्डर साबित होगा। इसके साथ ही, जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के इंजनों की खरीद का भी समझौता हुआ है। चीन कुल मिलाकर लगभग 400-450 इंजन और 200 विमानों का ऑर्डर दे रहा है, जिसे भविष्य में 750 विमानों तक बढ़ाया जा सकता है।
बीजिंग में हुए इस शिखर सम्मेलन के दौरान ताइवान को लेकर शी जिनपिंग ने ट्रंप को जो चेतावनी दी, उसे विश्लेषक "असामान्य रूप से स्पष्ट" मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस चेतावनी ने दोनों देशों के संबंधों में संभावित रूप से गंभीर खतरे पैदा कर दिए हैं और हालांकि, कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इसका तात्कालिक प्रभाव शायद सीमित रहे, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह अमेरिका-चीन संबंधों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।