Iran Protests News: ईरान में बगावत की आग तेज, लंदन दूतावास से हटाया मौजूदा झंडा, फहराया पुराना प्रतीक

Iran Protests News - ईरान में बगावत की आग तेज, लंदन दूतावास से हटाया मौजूदा झंडा, फहराया पुराना प्रतीक
| Updated on: 11-Jan-2026 09:06 AM IST
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की आग लगातार बढ़ती जा रही है, जिसने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। देश के भीतर आर्थिक परेशानियों को लेकर शुरू हुए ये प्रदर्शन अब एक व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर मौजूदा शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और आगजनी जैसी घटनाओं को भी अंजाम दे रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन अब ईरान की सीमाओं से बाहर निकलकर दुनिया के कई बड़े शहरों तक पहुंच गया है, जहां ईरानी प्रवासी समुदाय और अन्य समर्थक एकजुटता दिखा रहे हैं।

लंदन में ईरानी दूतावास पर ऐतिहासिक घटना

लंदन में ईरानी दूतावास पर एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने इन वैश्विक विरोध प्रदर्शनों को एक नया आयाम दिया। केंसिंग्टन इलाके में स्थित ईरानी दूतावास की इमारत पर एक प्रदर्शनकारी चढ़ गया और उसने मौजूदा ईरानी शासन के झंडे को हटा दिया। इस साहसिक कार्य के बाद, उसने उसकी जगह 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान की राजशाही से जुड़े ऐतिहासिक 'शेर और सूरज' वाले झंडे को फहराया। इस दौरान दूतावास के बाहर बड़ी संख्या में मौजूद सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारी जयकारे लगाते और मौजूदा शासन के खिलाफ नारे लगाते नजर आए। सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यह पूरा घटनाक्रम कैद है। समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, यह झंडा कुछ मिनटों तक लगा रहा, जिसके बाद उसे हटा दिया गया।

गिरफ्तारियां और पुलिस कार्रवाई

लंदन में हुई इस घटना के बाद मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया और हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि झंडा उतारने वाला व्यक्ति इन गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल है या नहीं। पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है। यह घटना दर्शाती है कि ईरानी शासन के खिलाफ विरोध की भावना कितनी गहरी है और कैसे प्रदर्शनकारी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी आवाज बुलंद करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।

'शेर और सूरज' झंडे का ऐतिहासिक महत्व

जिस 'शेर और सूरज' वाले झंडे को लंदन दूतावास पर फहराया गया, उसका ईरान के इतिहास में गहरा महत्व है। यह झंडा लंबे समय तक ईरान की राजशाही से जुड़ा रहा है और 1979 की इस्लामी क्रांति तक इसे आधिकारिक रूप से इस्तेमाल किया जाता था। शाह के सत्ता से हटने और नई धार्मिक नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में। आने के बाद, इस झंडे को हटाकर मौजूदा इस्लामिक रिपब्लिक का झंडा अपनाया गया था। तब से, 'शेर और सूरज' का झंडा मुख्य रूप से राजशाही समर्थक समूहों और मौजूदा शासन के विरोध में खड़े ईरानी प्रवासी समुदाय के कुछ वर्गों द्वारा अपनाया जाता रहा है। हालिया प्रदर्शनों में यह झंडा फिर से विरोध और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में उभरा है।

देशव्यापी प्रदर्शनों की शुरुआत और विस्तार

ईरान में इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को आर्थिक परेशानियों को लेकर हुई थी। तेहरान में दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं, जिसके बाद धीरे-धीरे यह प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया। अब लोग केवल आर्थिक मुद्दों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की मांग कर रहे हैं और इन प्रदर्शनों के दौरान समाचार एजेंसी एपी (AP) ने रविवार को रिपोर्ट किया कि अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,600 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और अमेरिकी चेतावनी

ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पेरिस और बर्लिन सहित यूरोप के अन्य बड़े शहरों में भी एकजुटता प्रदर्शन हुए हैं और वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के बाहर भी एक विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और समर्थन स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इन बढ़ते प्रदर्शनों के बीच, ईरानी शासन ने देश में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी हैं, जिससे सूचना के प्रवाह को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लगातार चेतावनी दी है कि अगर ईरानी शासन बड़े पैमाने पर हिंसा का सहारा लेता है तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। शुक्रवार को वॉशिंगटन डीसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और लोग कुछ ऐसे शहरों पर नियंत्रण कर रहे हैं, जिनके बारे में कुछ हफ्ते पहले कोई सोच भी नहीं सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हालात पर बहुत बारीकी से नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर प्रदर्शनकारियों की रक्षा करेगा। यह बयान वैश्विक स्तर पर ईरान के आंतरिक मामलों में बढ़ती दिलचस्पी और संभावित हस्तक्षेप की ओर इशारा करता है।

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