विज्ञापन

ईरान ने पीएम मोदी से इजराइल दौरे पर फिलिस्तीन मुद्दा उठाने की अपील की

ईरान ने पीएम मोदी से इजराइल दौरे पर फिलिस्तीन मुद्दा उठाने की अपील की
विज्ञापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के बीच ईरान ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत से हस्तक्षेप की अपील की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक हालिया साक्षात्कार में उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान फिलिस्तीनियों के अधिकारों और गाजा की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करेंगे। अराघची ने भारत को ईरान का एक 'अच्छा और ऐतिहासिक मित्र' बताते हुए कहा कि नई दिल्ली की क्षेत्रीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

ईरान की अपील और द्विपक्षीय संबंधों का महत्व

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा को ध्यान में रखते हुए फिलिस्तीनी हितों की रक्षा का आह्वान किया है। अराघची के अनुसार, तेहरान और नई दिल्ली के बीच संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं और दोनों देश आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक क्षेत्रों में गहरी साझेदारी साझा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारत का संप्रभु निर्णय है कि वह अपनी विदेश नीति कैसे संचालित करता है, लेकिन एक मित्र राष्ट्र के रूप में ईरान को उम्मीद है कि भारत फिलिस्तीनी नागरिकों के मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाएगा। अराघची ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अपने व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों पक्ष नियमित रूप से क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार साझा करते हैं।

गाजा की स्थिति पर ईरान का आधिकारिक रुख

साक्षात्कार के दौरान अब्बास अराघची ने गाजा पट्टी में इजराइल द्वारा की जा रही सैन्य कार्रवाई की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है और इसे 'नरसंहार' की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। अराघची ने दावा किया कि गाजा में अब तक लगभग 75,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा पुष्ट तथ्य बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसे किसी भी शासन के साथ जुड़ना उचित नहीं समझता जो मानवीय संकट के लिए जिम्मेदार हो। ईरानी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत को अपनी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का उपयोग करते हुए इजराइल द्वारा किए जा रहे कथित अपराधों को रोकने का प्रयास करना चाहिए।

इजराइली संसद नेसेट में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन

अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजराइल की संसद 'नेसेट' को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने गाजा शांति पहल का समर्थन किया और इसे पूरे क्षेत्र के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का एकमात्र मार्ग बताया। प्रधानमंत्री ने इजराइल के प्रति भारत की एकजुटता व्यक्त करते हुए आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद किसी भी रूप में हो, वह वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और इजराइल दोनों ही आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का पालन करते हैं और इस खतरे से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।

आतंकवाद और मानवीय संवेदनाओं पर भारत का पक्ष

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजराइल पर किए गए हमले का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इस हमले को 'बर्बर' करार देते हुए उन सभी परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की नीति आतंकवाद के मुद्दे पर अडिग है और इसमें किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं है। उन्होंने शांति और स्थिरता की बहाली के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की भूमिका

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर जहां ईरान भारत से फिलिस्तीन के पक्ष में सक्रिय भूमिका की उम्मीद कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत ने इजराइल के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करना जारी रखा है। अराघची ने उम्मीद जताई कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करेगा। भारत ने लगातार दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) का समर्थन किया है, जिसमें इजराइल और फिलिस्तीन दोनों के लिए सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की बात कही गई है।

विज्ञापन