जयपुर की गुलाबी नगरी में शनिवार की शाम तीज के लोकगीतों और भक्तिमय जयकारों से गुंजायमान रही, जब तीज माता की शाही सवारी अपने पूरे वैभव के साथ निकाली गई। इस पारंपरिक उत्सव की शुरुआत सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से हुई, जहां पूर्व राजपरिवार की महिला सदस्यों ने पूरी श्रद्धा के साथ माता की पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात, माता की पालकी त्रिपोलिया गेट पहुंची, जहां पद्मनाभ सिंह ने विधि-विधान से आरती उतारी और इसके बाद माता की सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई, जिसे देखने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। परकोटे की गलियां लोकगीतों और लोककलाओं की गूंज से सराबोर नजर आईं।
लोक कलाओं और संस्कृति का अनूठा संगम
त्रिपोलिया गेट से लेकर छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार तक के पूरे रास्ते में राजस्थान की लोक संस्कृति की अद्भुत झलक देखने को मिली। इस भव्य आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग 175 लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कच्ची घोड़ी, कालबेलिया, घूमर, चंग-ढप और मांगणियार गायन की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्सव के रंग में रंग दिया और कठपुतली और बहुरूपिया कलाकारों के प्रदर्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया। सवारी के लवाजमे में सजे-धजे घोड़े और ऊंट विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जो राजस्थान की राजसी विरासत को जीवंत कर रहे थे।
बेटियों का शौर्य और महाआरती का दृश्य
शाही सवारी के दौरान शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया, जो इस बार के आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। यह प्रस्तुति राजस्थान की वीर परंपरा और महिला शक्ति की एक सशक्त झलक थी। जब सवारी छोटी चौपड़ पहुंची, तो वहां तीज माता की भव्य महाआरती की गई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री व पर्यटन मंत्री दिया कुमारी और जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा ने आरती में भाग लिया। जेल बैंड और आरएसी बैंड की सुमधुर प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी खास बना दिया। जयपुर व्यापार महासंघ की ओर से तीज माता पर फूलों की वर्षा की गई, जिसके बाद सवारी गणगौरी बाजार से होती हुई पौंड्रिक पार्क पहुंची, जहां कला मेले और अन्य लोक प्रस्तुतियां आयोजित की गईं।
डिजिटल माध्यम से अमेरिका तक पहुंची जयपुर की तीज
इस वर्ष प्रशासन ने तकनीक का उपयोग करते हुए सवारी के लाइव दर्शन की विशेष व्यवस्था की थी। शहर के 13 प्रमुख स्थानों पर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गईं ताकि लोग भीड़ में आए बिना भी सवारी देख सकें। इन स्थानों में अजमेरी गेट, न्यू गेट, मोती डूंगरी, त्रिमूर्ति सर्किल, रामबाग सर्किल, एसएमएस स्टेडियम, महाराजा कॉलेज, बिरला मंदिर, राजस्थान विश्वविद्यालय, राजस्थान कॉलेज, ओटीएस चौराहा और पत्रिका गेट शामिल थे। जयपुर की इस परंपरा का आनंद केवल स्थानीय लोगों ने ही नहीं, बल्कि राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के माध्यम से उत्तर अमेरिका में बसे राजस्थानियों ने भी डिजिटल माध्यम से लिया। पर्यटन विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इसका सीधा प्रसारण किया गया और आसमान से ड्रोन के जरिए फूलों की बारिश की गई, जिसे लोगों ने अपने घरों की छतों और झरोखों से निहारा। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि तीज जयपुर की एक ऐसी परंपरा है जिसमें आस्था, लोककला और राजसी विरासत का संगम दिखता है, और डिजिटल माध्यम से अब यह विदेशों तक पहुंच गई है।