Jammu Kashmir: JK में LoC के पास फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन: 5 दिन में तीसरी घटना, सेना हाई अलर्ट पर
Jammu Kashmir - JK में LoC के पास फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन: 5 दिन में तीसरी घटना, सेना हाई अलर्ट पर
जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) पर पाकिस्तानी ड्रोनों की घुसपैठ की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और गुरुवार शाम को पुंछ और सांबा जिलों में एक बार फिर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए, जिसके बाद भारतीय सेना ने तुरंत अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और जवाबी कार्रवाई की। यह घटना पिछले पांच दिनों में तीसरी बार हुई है, जो सीमा पार से लगातार चुनौतियों का संकेत देती है।
बढ़ती ड्रोन गतिविधियां और सेना की चौकसी
सेना के सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को ये ड्रोन नियमित निगरानी के दौरान नजर आए। पुंछ में LoC पर एक पोस्ट के पास एक संदिग्ध ड्रोन देखा गया, जबकि इसी तरह की एक और घटना रामगढ़ सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर दर्ज की गई। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान से लगी सीमा पर तैनात भारतीय सैनिक हाई अलर्ट पर हैं और निगरानी बढ़ा दी गई है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि ये ड्रोन सीमा पार से घुसपैठ या अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।पिछले पांच दिनों की घटनाएं
यह पांच दिनों में ड्रोन देखे जाने की तीसरी घटना है, जो सीमा पर स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है और इससे पहले, 13 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में दो बार संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे। तब भी सेना ने तुरंत फायरिंग की थी, जिसके बाद ड्रोन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की ओर लौट गए थे और इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय क्षेत्र में अपनी ड्रोन गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास कर रहा है, जिसका उद्देश्य संभवतः भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करना या आतंकियों के लिए सामग्री पहुंचाना है।11 जनवरी को एक साथ पांच ड्रोनों की घुसपैठ
इससे भी पहले, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर, धरमसाल सेक्टर, रियासी, सांबा और पुंछ के मंकोट सेक्टर में एक साथ पांच ड्रोन स्पॉट किए गए थे। इन घटनाओं की आवृत्ति और व्यापकता ने सुरक्षा बलों को LoC पर निगरानी और चौकसी को और अधिक बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि पाकिस्तान एक समन्वित रणनीति के तहत भारतीय सीमा में ड्रोन भेज रहा है, जिसका मुकाबला करने के लिए भारत को अपनी रक्षा प्रणालियों को लगातार उन्नत करना होगा।राजौरी में IED की बरामदगी
गुरुवार को ही, ड्रोन देखे जाने की घटना से पहले, सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के काकोरा गांव। में एक एंटी-टेरर ऑपरेशन के दौरान लगभग 3 किलो वजन का एक संदिग्ध इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किया था। यह बरामदगी खुफिया सूचना के आधार पर की गई तलाशी अभियान का परिणाम थी और बम निरोधक दस्ते ने मौके पर पहुंचकर IED की जांच की और उसे सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया। IED की बरामदगी और ड्रोन की लगातार उपस्थिति के बीच एक संभावित संबंध हो सकता है, जिससे यह आशंका बढ़ जाती है कि ड्रोन का इस्तेमाल ऐसे विस्फोटक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।ड्रोन घुसपैठ के पीछे संदिग्ध इरादे
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पाकिस्तान की ओर से इन ड्रोनों का इस्तेमाल घुसपैठियों को रास्ता दिखाने, या हथियार और नशीले पदार्थ गिराने की कोशिश के लिए किया जा सकता है। न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 जनवरी को राजौरी के नौशेरा सेक्टर में तैनात जवानों ने शाम करीब 6:35 बजे गनिया-कलसियां गांव के ऊपर एक ड्रोन देखा था, जिसके बाद मीडियम और लाइट मशीन गन से फायरिंग की गई थी। इसी तरह, राजौरी के तेरियाथ के खब्बर गांव में भी शाम 6:35 बजे एक और ड्रोन देखा गया, जो कलाकोट के धर्मसाल गांव की तरफ से आया और आगे भरख की ओर बढ़ गया।सांबा और पुंछ में भी ड्रोन की हलचल
11 जनवरी को सांबा के रामगढ़ सेक्टर में चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे ड्रोन जैसी कोई चीज कुछ मिनट तक मंडराती दिखी थी। पुंछ में भी मनकोट सेक्टर में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी एक और चीज जाती हुई देखी गई। ये सभी घटनाएं एक ही दिन में अलग-अलग स्थानों पर हुईं, जो सीमा। पार से एक बड़े पैमाने पर निगरानी या आपूर्ति अभियान का संकेत देती हैं।गणतंत्र दिवस को लेकर सुरक्षा अलर्ट
इससे पहले, 9 जनवरी को सांबा में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास घगवाल के पालूरा गांव में हथियार की एक खेप मिली थी, जिसे पाकिस्तान से आए ड्रोन ने गिराया था। इस खेप में 2 पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 राउंड और एक ग्रेनेड शामिल था। यह घटना ड्रोन के माध्यम से हथियार और गोला-बारूद की तस्करी के ठोस सबूत प्रदान करती है, जिससे सुरक्षा बलों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
देश में आगामी गणतंत्र दिवस को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं और इन लगातार ड्रोन गतिविधियों को देखते हुए, सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इन ड्रोन्स का इस्तेमाल सीमा पर सेना की पोजिशन जानने या फिर आतंकियों के लिए हथियार और नशीले पदार्थ गिराने के लिए किया जा रहा है। भारतीय सुरक्षा बल इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं और सीमा पर हर संदिग्ध गतिविधि पर कड़ी नजर रख रहे हैं और loC और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और चौकसी को और मजबूत किया गया है ताकि किसी भी नापाक मंसूबे को नाकाम किया जा सके।