पीएम मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक खत्म, 45 मिनट हुई दोनों नेताओं के बीच बातचीत

Add as Preferred Source on Google News
विज्ञापन
पीएम मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक खत्म, 45 मिनट हुई दोनों नेताओं के बीच बातचीत
विज्ञापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 (BRICS Summit 2026) से ठीक एक दिन पहले आयोजित की गई। लगभग 45 मिनट तक चली इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। इस बैठक को दोनों देशों की दोस्ती के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें व्यापार, रेलवे और डिजिटल करेंसी जैसे विविध क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

2030 तक 100 अरब डॉलर के कारोबार का लक्ष्य

बैठक का सबसे प्रमुख बिंदु द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचाना रहा। वर्तमान में भारत और रूस के बीच सालाना कारोबार लगभग 60 अरब डॉलर के करीब है। इस व्यापार में रूस से भारत को होने वाले कच्चे तेल के आयात की एक बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका है। अब दोनों देशों का लक्ष्य अगले चार वर्षों में इस व्यापार को 40 अरब डॉलर और बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाना है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 10 सितंबर को इस लक्ष्य के बारे में चर्चा करते हुए कहा था कि इसे हासिल करने के लिए दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार में लगातार दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता होगी। इसके लिए भारत और रूस नए व्यापारिक क्षेत्रों की पहचान करने, एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच बढ़ाने और रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहित करने पर गंभीरता से काम कर रहे हैं।

रेलवे से लेकर स्टील तक औद्योगिक सहयोग का विस्तार

भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना भी इस बैठक का एक अहम एजेंडा रहा। नई दिल्ली में शुरू हुए INNOPROM ट्रेड फेयर को दोनों देशों की कंपनियों के बीच नई साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। बैठक में रेलवे, टनल (सुरंग) निर्माण और स्टील सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे बिजनेस अवसर (B2B) बढ़ाने और रूस के बाजार में भारतीय सामान की पहुंच को आसान बनाने के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

परमाणु ऊर्जा और नागरिक परमाणु सहयोग

दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा (Civil Nuclear Energy) के क्षेत्र में भी अपने सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसमें परमाणु ईंधन चक्र (Fuel Cycle) से लेकर परमाणु संयंत्रों को उनके पूरे जीवन-काल तक तकनीकी और अन्य प्रकार का सहयोग प्रदान करना शामिल है। यह सहयोग दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

रूस में भारतीय कुशल कामगारों के लिए नए अवसर

बैठक के दौरान रूस में भारतीय कुशल कामगारों (Skilled Workers) की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई और दोनों देश एक ऐसी प्रणाली विकसित करने पर विचार कर रहे हैं जिससे अधिक से अधिक भारतीय पेशेवर रूस जा सकें और वहां के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान दे सकें। इससे भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अंतरराष्ट्रीय अवसर खुलेंगे और रूस की श्रम शक्ति की आवश्यकता भी पूरी होगी।

रणनीतिक खनिज और खाद की आपूर्ति

क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) आज के समय में वैश्विक स्तर पर एक बड़ी रणनीतिक जरूरत बन चुके हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य हाई-टेक उद्योगों में इनकी अनिवार्य आवश्यकता होती है। भारत और रूस इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं ताकि रणनीतिक उद्योगों के लिए जरूरी सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके और इसके अलावा, कृषि क्षेत्र के लिए खाद की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना भी चर्चा का हिस्सा रहा। दोनों देश खाद की आपूर्ति बनाए रखने के लिए रणनीतिक संयुक्त उपक्रम (Joint Ventures) स्थापित करने पर भी विचार कर रहे हैं।

मोदी-पुतिन बैठक के मुख्य निष्कर्ष

इस द्विपक्षीय बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत-रूस संबंध अब केवल रक्षा और पारंपरिक ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं।

विज्ञापन