मोदी और पुतिन की महाबैठक: न्यूक्लियर एनर्जी और ट्रेड सहित कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

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मोदी और पुतिन की महाबैठक: न्यूक्लियर एनर्जी और ट्रेड सहित कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में एक अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई है। ब्रिक्स समिट के इतर आयोजित इस बैठक में दोनों नेताओं ने विभिन्न वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। भारत मंडपम पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों नेता एक-दूसरे के गले मिले और यह बैठक लगभग 45 मिनट तक चली, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयामों को तलाशने पर जोर दिया गया।

सांस्कृतिक भेंट और आत्मीयता

मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल के महान कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल के रूसी अनुवाद की एक पुस्तक भेंट की। यह उपहार दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों और एक-दूसरे के साहित्य के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह भेंट दर्शाती है कि भारत और रूस के रिश्ते केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक स्तर पर भी बहुत गहरे हैं।

औद्योगिक सहयोग और व्यापारिक विस्तार

दोनों नेताओं की बातचीत में भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। INNOPROM जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए नए अवसरों को तलाशने पर चर्चा हुई, ताकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिल सके।

न्यूक्लियर एनर्जी और फर्टिलाइजर सेक्टर में सहयोग

सिविल न्यूक्लियर सहयोग को और मजबूत करना इस बैठक का एक प्रमुख एजेंडा रहा और इसमें फ्यूल साइकिल और लाइफ साइकिल सपोर्ट से जुड़े तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा, मोबिलिटी सेक्टर में सहयोग बढ़ाने और रूस में भारतीय स्किल्ड वर्कफोर्स (कुशल कार्यबल) के लिए नए अवसर पैदा करने पर भी बातचीत हुई। रणनीतिक जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से फर्टिलाइजर सेक्टर में सहयोग बनाए रखने और इसे और अधिक बढ़ाने पर चर्चा हुई, जो दोनों देशों की कृषि व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

वैश्विक संकट और रणनीतिक साझेदारी

द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ दोनों नेताओं ने अहम वैश्विक परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श किया। इसमें ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष का मुद्दा विशेष रूप से शामिल रहा। इसके अलावा, जरूरी मिनरल्स (खनिज) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। यह बैठक भारत और रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने वाली साबित हुई है।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य

इससे पहले विदेश मंत्रालय ने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे बहुआयामी संबंधों को रेखांकित किया। रूस के राष्ट्रपति पुतिन के भारत पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दोनों देशों के रिश्तों को मल्टीफेसटेड और लॉन्गस्टैंडिंग बताया। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं, जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं।

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