रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देर रात तीन दिवसीय यात्रा पर भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे और वह यहां आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS समिट 2026) में हिस्सा लेंगे। दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरने के बाद विदेश राज्य मंत्री और गोंडा के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह ने उनकी गर्मजोशी से अगवानी की। भारत और रूस के बीच संबंध काफी पुराने और गहरे हैं, जो विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। पुतिन की इस यात्रा से पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और पहले डिप्टी पीएम डेनिस मंतुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं, जो इस दौरे की महत्ता को दर्शाता है।
ब्रिक्स का विस्तार और सदस्य देश
ब्रिक्स समूह के मूल सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। हालांकि, वर्ष 2024 में इस समूह का विस्तार किया गया और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों को शामिल किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह का हिस्सा बना। यह विस्तार वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। 18वें शिखर सम्मेलन के दौरान इन सभी सदस्य देशों के बीच विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
राष्ट्रपति पुतिन का व्यस्त कार्यक्रम
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उशाकोव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन आज वार्षिक ब्रिक्स कारोबार मंच (BRICS Business Forum) के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। यह सत्र ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित होने वाला एक पारंपरिक कार्यक्रम है, जो सदस्य देशों के व्यापारिक प्रतिनिधियों के बीच संवाद का एक प्रमुख जरिया है। इसके अलावा, पुतिन आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करेंगे और दोनों नेता भारत और रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालयों द्वारा आयोजित इनोप्रोम (INNOPROM) प्रदर्शनी का दौरा भी करेंगे, जहां दोनों देशों की औद्योगिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया है।
शिखर सम्मेलन की मुख्य गतिविधियां
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होगा। इस दौरान ब्रिक्स नेताओं की औपचारिक बैठक होगी, जिसमें भारतीय अध्यक्षता में प्रस्तावित विभिन्न पहलों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और बैठक का मुख्य एजेंडा राजनीति एवं सुरक्षा, अर्थव्यवस्था एवं वित्त, तथा सांस्कृतिक एवं मानवीय संबंधों के क्षेत्र में ब्रिक्स की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना है। नेता मौजूदा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। शिखर सम्मेलन के इतर पुतिन दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी जैसे वैश्विक नेताओं के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
शी जिनफिंग की भारत यात्रा और द्विपक्षीय वार्ता
चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग भी इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। पिछले सात वर्षों में यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इस यात्रा को व्यापार और निवेश के माध्यम से दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को जिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही है और अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है और इससे पहले बीजिंग में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच भी उच्च स्तरीय बातचीत हो चुकी है।
पीएम मोदी की अन्य वैश्विक नेताओं से मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कई वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। राष्ट्रपति पुतिन के साथ उनकी मुलाकात आज दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर निर्धारित है। इसके बाद, शाम 6 बजकर 15 मिनट पर वह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ बैठक करेंगे। 13 सितंबर को विस्तारित ब्रिक्स (Expanded BRICS) बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल होंगे। इस तीन दिवसीय सम्मेलन के अंत में हुए प्रमुख समझौतों और सहमतियों को एक अंतिम दस्तावेज में दर्ज किया जाएगा, जो भविष्य की रणनीतियों का आधार बनेगा।