लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज 21 फरवरी को महाराष्ट्र के ठाणे जिले की भिवंडी अदालत में पेश होने के लिए पहुंचे हैं। यह पेशी साल 2014 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ दिए गए एक कथित विवादास्पद बयान से जुड़े मानहानि मामले में हो रही है। राहुल गांधी सुबह लगभग 11:00 बजे अदालत परिसर में उपस्थित हुए। इस मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन तकनीकी कारणों से उन्हें आज फिर से अदालत के समक्ष उपस्थित होना पड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, यह उनकी इस मामले में चौथी आधिकारिक पेशी है।
मामले की पृष्ठभूमि और 2014 का विवादित बयान
यह पूरा मामला साल 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है। राहुल गांधी ने भिवंडी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संदर्भ में कुछ टिप्पणियां की थीं। इन टिप्पणियों को लेकर आरएसएस के स्थानीय कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने आपत्ति जताई थी। कुंटे ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के बयान से संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है और यह मानहानि का मामला बनता है। इसके बाद कुंटे ने भिवंडी की मजिस्ट्रेट अदालत में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 499 और 500 के तहत एक निजी परिवाद दायर किया था। तब से यह मामला अदालत में विचाराधीन है और समय-समय पर इस पर सुनवाई होती रही है।
नए जमानतदार की आवश्यकता और कानूनी औपचारिकताएं
आज की पेशी का मुख्य कारण जमानत की प्रक्रिया को नियमित करना है। कानूनी जानकारों के अनुसार, राहुल गांधी को इस मामले में पहले ही जमानत मिल गई थी। उस समय पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल ने उनके लिए जमानतदार (गारंटर) के रूप में हस्ताक्षर किए थे और हालांकि, शिवराज पाटिल के निधन के बाद अब कानूनी रूप से एक नए जमानतदार की आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। राहुल गांधी को आज अदालत के समक्ष एक नया गारंटर पेश करना है जो उनकी जमानत की जिम्मेदारी लेगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उनकी जमानत को नियमित माना जाएगा। यह एक अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया है जिसे गारंटर की मृत्यु की स्थिति में पूरा करना आवश्यक होता है।
सुल्तानपुर से भिवंडी तक अदालती कार्यवाही का सिलसिला
राहुल गांधी के लिए यह लगातार दूसरा दिन है जब वे किसी अदालत में पेश हो रहे हैं और इससे ठीक एक दिन पहले, यानी 20 फरवरी को, वे उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हुए थे। सुल्तानपुर का मामला भी एक मानहानि से जुड़ा हुआ था, जो 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणी से संबंधित था। सुल्तानपुर में अपनी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के तुरंत बाद राहुल गांधी महाराष्ट्र के लिए रवाना हुए। भिवंडी कोर्ट में उनकी उपस्थिति को लेकर कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफी हलचल देखी जा रही है, हालांकि राहुल गांधी ने इसे पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया बताया है।
कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े प्रबंध और पुलिस बल
राहुल गांधी की पेशी को देखते हुए भिवंडी कोर्ट और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। ठाणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत बम निरोधक दस्ते (बी़ीडीएस) और डॉग स्क्वायड ने सुबह ही पूरे परिसर की गहन तलाशी ली। राहुल गांधी को मिली जेड प्लस सुरक्षा और उनके नेता प्रतिपक्ष होने के नाते सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार की ढील नहीं बरत रही हैं। अदालत के प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं और केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। स्थानीय पुलिस ने यातायात को नियंत्रित करने के लिए भी विशेष योजना बनाई है ताकि आम जनता को असुविधा न हो।
मामले में अब तक की कानूनी प्रगति
2014 में दर्ज हुए इस मामले में अब तक कई मोड़ आ चुके हैं। राहुल गांधी ने पहले इस मामले को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय का रुख भी किया था, लेकिन अदालतों ने उन्हें ट्रायल का सामना करने का निर्देश दिया था और 2018 में भिवंडी कोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया था। राजेश कुंटे की ओर से पेश वकीलों का तर्क है कि बयान सार्वजनिक रूप से दिया गया था और इसके साक्ष्य उपलब्ध हैं। वहीं, राहुल गांधी के कानूनी दल का कहना है कि यह बयान राजनीतिक आलोचना के दायरे में आता है और इसका उद्देश्य किसी की मानहानि करना नहीं था। आज की कार्यवाही मुख्य रूप से जमानत के दस्तावेजों को अपडेट करने तक सीमित रहने की संभावना है।