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राहुल गांधी के किसान संबंधी आरोपों पर पीयूष गोयल ने दी सफाई

राहुल गांधी के किसान संबंधी आरोपों पर पीयूष गोयल ने दी सफाई
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा किसानों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर दिए गए बयानों के बाद संसद में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस समझौते में किसानों के हितों को कुचल दिया है और यह बराबरी की शर्तों पर नहीं किया गया और इन आरोपों के जवाब में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई केंद्रीय मंत्रियों ने सरकार का पक्ष रखते हुए इन दावों को पूरी तरह से निराधार करार दिया है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का आधिकारिक स्पष्टीकरण

राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सदन में सरकार का बचाव किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वाणिज्य मंत्री के रूप में वह देश को आश्वस्त करना चाहते हैं कि सरकार द्वारा लिए गए सभी निर्णय किसानों के कल्याण को केंद्र में रखकर लिए गए हैं। गोयल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के दौरान भारतीय किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है और विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं।

संसदीय आचरण और भाजपा का कड़ा रुख

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए इसे संसदीय गरिमा के प्रतिकूल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता सदन में भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। त्रिवेदी ने कहा कि संसदीय कार्यवाही के दौरान कांग्रेस का व्यवहार सड़क किनारे होने वाले हंगामे जैसा था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सदन में जिस तरह से विरोध प्रदर्शन किया गया, वह संसदीय परिवेश के लिए अशोभनीय है।

डेटा सुरक्षा और प्रक्रियात्मक नियमों पर मंत्रियों का तर्क

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डेटा सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा और उन्होंने कहा कि भारत का डेटा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत एक सुदृढ़ कानूनी ढांचे में सुरक्षित है। उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि संवेदनशील क्षेत्रों पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि की जानी चाहिए। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के भाषण में इस्तेमाल किए गए शब्दों पर आपत्ति जताई। रिजिजू ने कहा कि बिना किसी सबूत या पूर्व सूचना के लगाए गए आरोपों और असंसदीय शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार राजनीतिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बजट सत्र के दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि जहां विपक्ष किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार अपने नीतिगत निर्णयों को डेटा और सुरक्षा के तर्कों के साथ मजबूती से पेश कर रही है। मंत्रियों द्वारा राहुल गांधी के बयानों को 'तथ्यहीन' बताना यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी रक्षात्मक स्थिति में नहीं है।

फिलहाल, संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने दोहराया है कि भारत की संप्रभुता और किसानों के हितों के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया गया है। यह विवाद अब संसदीय रिकॉर्ड और प्रक्रियात्मक सुधारों की ओर मुड़ता दिख रहा है।

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