लोकसभा में बुधवार को केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान उस समय एक दिलचस्प स्थिति उत्पन्न हो गई जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के बीच तीखी लेकिन हल्की-फुल्की बहस हुई। राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान जगदंबिका पाल के राजनीतिक अतीत का उल्लेख किया, जिसके बाद सदन में दोनों ओर से टिप्पणियों का दौर चला। इस दौरान राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी और जगदंबिका पाल के बीच संवाद
सदन की कार्यवाही के दौरान जब जगदंबिका पाल राहुल गांधी को टोक रहे थे, तब कांग्रेस सांसद ने मुस्कुराते हुए कहा कि आप कांग्रेस के पुराने सदस्य हैं, इसलिए मैं आज एक खास रियायत दूंगा और राहुल गांधी ने कहा कि हम जानते हैं कि आपका दिल वहां नहीं है, बल्कि आपका दिल यहां (कांग्रेस की ओर) है। इस पर पलटवार करते हुए जगदंबिका पाल ने कहा कि वह वर्तमान में पीठासीन अधिकारी की भूमिका में हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि राहुल गांधी ने उनकी बात मानी होती, तो आज वह विपक्ष की सीटों पर नहीं बैठे होते। गौरतलब है कि जगदंबिका पाल 2014 में भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर तीखे प्रहार
राजनीतिक नोकझोंक के बाद राहुल गांधी ने व्यापारिक मुद्दों पर सरकार को घेरा और उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ किया गया व्यापार समझौता बराबरी की शर्तों पर नहीं है। राहुल गांधी ने दावा किया कि इस समझौते में भारतीय किसानों के हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में आयात शुल्क 3% से बढ़ाकर 18% कर दिया गया है, जबकि अमेरिकी उत्पादों पर भारत में शुल्क 16% से घटाकर शून्य कर दिया गया है। उन्होंने इसे देश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताया।
डेटा संप्रभुता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मुद्दा
राहुल गांधी ने डेटा सुरक्षा को राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए कहा कि अमेरिका और चीन के बीच वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत का डेटा सबसे महत्वपूर्ण है और उन्होंने तर्क दिया कि यदि विपक्ष की सरकार होती, तो वह डेटा को एक बड़ी पूंजी के रूप में इस्तेमाल करती और बराबरी के स्तर पर बातचीत करती। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समझौते के बाद अब अमेरिका यह तय करेगा कि भारत किससे तेल खरीदेगा, जिससे देश की निर्णय लेने की स्वायत्तता प्रभावित होगी।
विश्लेषकों का दृष्टिकोण और निष्कर्ष
संसदीय विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी का यह भाषण सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों पर सीधे प्रहार करने की रणनीति का हिस्सा है और विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार समझौतों पर इस तरह की बहस आगामी सत्रों में और तेज हो सकती है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन के अंत में दोहराया कि जनसंख्या भारत की त्रासदी नहीं बल्कि ताकत है, बशर्ते उसका सही दिशा में उपयोग किया जाए और सदन में हुई इस बहस ने बजट सत्र के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है।