हनुमानगढ़ में किसानों से धोखाधड़ी के आरोप में कृषि पर्यवेक्षक निलंबित

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हनुमानगढ़ में किसानों से धोखाधड़ी के आरोप में कृषि पर्यवेक्षक निलंबित
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राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में किसानों के साथ हुई धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कृषि पर्यवेक्षक हरिकृष्ण पर किसानों से अवैध वसूली करने और उन्हें गुमराह कर सरकारी अनुदान हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद राजस्थान कृषि आयुक्तालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कृषि पर्यवेक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस घटना से पूरे जिले के कृषि विभाग और किसान वर्ग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर किसानों के हक की राशि की चोरी से जुड़ा है।

धोखाधड़ी का तरीका और वसूली के आरोप

निलंबित कृषि पर्यवेक्षक हरिकृष्ण वर्तमान में सूरतगढ़ के सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय के अधीन अपनी सेवाएं दे रहे थे और कृषि आयुक्तालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, हरिकृष्ण पर विभागीय योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर किसानों को ठगने का आरोप है। विशेष रूप से, कृषि यंत्रों (एग्री स्प्रेयर) के वितरण के दौरान उन्होंने किसानों से नकद और चेक के माध्यम से धन राशि एकत्र की थी। किसानों का आरोप है कि उन्हें यह बताया गया था कि यह राशि सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि वास्तव में यह एक अवैध वसूली थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि हरिकृष्ण ने किसानों के विश्वास का फायदा उठाते हुए उनसे खाली कागजों और विभिन्न प्रपत्रों पर हस्ताक्षर करवा लिए थे और इन खाली हस्ताक्षरित कागजों का उपयोग अनाधिकृत रूप से राशि हड़पने और रिकॉर्ड में हेरफेर करने के लिए किया गया। किसानों के साथ की गई इस धोखाधड़ी ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजकीय अनुदान राशि, जो सीधे किसानों के कल्याण के लिए आवंटित की गई थी, उसके दुरुपयोग का यह मामला अब विभागीय जांच के घेरे में है।

कमिश्नर का आदेश और कानूनी कार्रवाई

कृषि आयुक्तालय के कमिश्नर नरेश कुमार गोयल ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उनके द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, हरिकृष्ण को राजस्थान असैनिक सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 13(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए निलंबित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसानों से अवैध धन उगाही और सरकारी धन के गबन के आरोपों के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य था।

विभाग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। हरिकृष्ण पर लगे आरोपों की गहराई से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस धोखाधड़ी में कितने किसान प्रभावित हुए हैं और कुल कितनी राशि का गबन किया गया है। इस कार्रवाई को विभाग के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

निलंबन अवधि और मुख्यालय में परिवर्तन

निलंबन के आदेश के साथ ही हरिकृष्ण के मुख्यालय में भी बदलाव किया गया है। निलंबन की पूरी अवधि के दौरान, हरिकृष्ण का मुख्यालय संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद, डूंगरपुर रहेगा। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना अनुमति के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। सूरतगढ़ से डूंगरपुर मुख्यालय स्थानांतरित करने का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है, ताकि आरोपी अधिकारी अपने पुराने कार्यक्षेत्र के साक्ष्यों या गवाहों को प्रभावित न कर सके।

यह मामला राजस्थान में कृषि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है और किसानों को जागरूक रहने की सलाह दी गई है कि वे किसी भी सरकारी योजना के लिए किसी भी अधिकारी को अनाधिकृत नकद भुगतान न करें और न ही खाली कागजों पर हस्ताक्षर करें। विभाग अब इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकें।

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