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कीर स्टार्मर के तेवर देख झुके ट्रंप, ब्रिटिश सैनिकों को बताया 'महान योद्धा'

कीर स्टार्मर के तेवर देख झुके ट्रंप, ब्रिटिश सैनिकों को बताया 'महान योद्धा'
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच अफगानिस्तान युद्ध को लेकर छिड़ा वाकयुद्ध अब एक नए मोड़ पर आ गया है। ट्रंप, जिन्होंने पहले ब्रिटिश सैनिकों की फ्रंटलाइन भूमिका पर सवाल उठाए थे, अब पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रहे हैं और ब्रिटिश पीएम की कड़ी फटकार और माफी की मांग के बाद, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ब्रिटिश सेना की जमकर प्रशंसा की है।

विवाद की जड़: ट्रंप का वह बयान

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को एक इंटरव्यू दिया। इस इंटरव्यू में ट्रंप ने नाटो देशों की प्रतिबद्धता पर संदेह जताया था। उन्होंने विशेष रूप से अफगानिस्तान का जिक्र करते हुए कहा था कि जब युद्ध में फ्रंटलाइन पर लड़ने की बात आई, तो कई सहयोगी देशों के सैनिक पीछे हट गए थे। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर ब्रिटिश सैनिकों के अपमान के रूप में। देखा गया, जिन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी।

कीर स्टार्मर का तीखा पलटवार

ट्रंप की इस टिप्पणी ने ब्रिटेन में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे 'अपमानजनक और स्पष्ट रूप से घिनौना' बताया। स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ब्रिटिश सैनिकों ने अफगानिस्तान में भारी बलिदान दिया है और उनके साहस पर सवाल उठाना उन परिवारों का अपमान है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। स्टार्मर ने सार्वजनिक रूप से ट्रंप से इस बयान के लिए माफी मांगने की मांग की थी।

ट्रंप का यू-टर्न: 'महान और बहादुर सैनिक'

प्रधानमंत्री स्टार्मर के कड़े रुख और ब्रिटेन में बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में ट्रंप के सुर पूरी तरह बदले हुए थे। उन्होंने लिखा, 'यूनाइटेड किंगडम के महान और बहुत बहादुर सैनिक हमेशा संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रहेंगे। ' ट्रंप ने अफगानिस्तान में शहीद हुए 457 ब्रिटिश सैनिकों को 'सभी योद्धाओं में सबसे महान' बताया। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच। का बंधन अटूट है और यूके का दिल और आत्मा अद्भुत है।

फोन पर हुई लंबी बातचीत

डाउनिंग स्ट्रीट के प्रवक्ता के अनुसार, शनिवार को कीर स्टार्मर और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान स्टार्मर ने फिर से उन बहादुर सैनिकों का जिक्र किया जिन्होंने अफगानिस्तान के दुर्गम इलाकों में अपनी जान की बाजी लगाई थी। बातचीत में केवल अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि यूक्रेन युद्ध और आर्कटिक। क्षेत्र में सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि ट्रंप ने अपने पुराने बयान के लिए औपचारिक माफी नहीं मांगी, लेकिन। उनकी हालिया प्रशंसा को एक कूटनीतिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रिटेन में शहीदों के परिवारों का गुस्सा

ट्रंप के शुरुआती बयान से उन परिवारों में भारी नाराजगी थी जिनके सदस्य अफगानिस्तान में शहीद हुए थे और ब्रिटेन ने अफगानिस्तान मिशन के दौरान अपने 457 जांबाज सैनिकों को खोया था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का बयान न केवल ऐतिहासिक रूप से गलत था, बल्कि यह भविष्य के सैन्य सहयोग को भी प्रभावित कर सकता था। यही कारण था कि कीर स्टार्मर ने बिना किसी देरी के इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया।

कूटनीतिक रिश्तों पर असर

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह यू-टर्न दर्शाता है कि वह ब्रिटेन के साथ 'स्पेशल रिलेशनशिप' को खराब नहीं करना चाहते। कीर स्टार्मर ने यह साबित कर दिया है कि वह राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर किसी भी बड़े नेता के सामने झुकने वाले नहीं हैं और फिलहाल, ट्रंप की प्रशंसा ने इस कूटनीतिक तनाव को कुछ हद तक कम कर दिया है, लेकिन ब्रिटिश गलियारों में ट्रंप की विश्वसनीयता को लेकर बहस अभी भी जारी है।

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