है जवानी तो इश्क होना है

कॅटगरी रोमांटिक ड्रामा
निर्देशक डेविड धवन
कलाकार अली असगर,कुब्रा सेठ,जिम्मी शेरगिल,पूजा हेगड़े,मनीष पॉल,मनोज पाहवा,मृणाल ठाकुर,मौनी राय,राकेश बेदी,वरुण धवन
रेटिंग 3/5
निर्माता रमेश तौरानी
संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती,संदीप शिरोडकर
प्रोडक्शन कंपनी टिप्स फिल्म्स लिमिटेड
संवादकार फरहाद समजी
छायाकार अयनांका बोस
संपादक ऋतेश सोनी
लेखक डेविड धवन,फरहाद समजी,यूनुस सजावल
रिलीज़ दिनांक 05-Jun-2026
बजट ₹55 CR
अवधि 02:16:00

डेविड धवन एक बार फिर अपनी पसंदीदा कॉमेडी-रोमांस शैली में वापसी करते हैं “है जवानी तो इश्क होना है” के साथ। वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े स्टारर यह फिल्म पुराने बॉलीवुड मसाला एंटरटेनर की याद दिलाती है, जहां प्यार, गलतफहमियां, फैमिली ड्रामा और कॉमेडी का भरपूर मिश्रण देखने को मिलता है। हालांकि फिल्म कई जगह मनोरंजन करती है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और प्रेडिक्टेबल ट्विस्ट इसकी रफ्तार को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।

कहानी कैसी है? (स्पॉइलर रिव्यू)

फिल्म की कहानी एक मस्तीभरे और बेफिक्र युवक (वरुण धवन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी अचानक प्यार, गलतफहमियों और पारिवारिक दबाव के बीच उलझ जाती है।

पहले हाफ में फिल्म हल्की-फुल्की रोमांटिक कॉमेडी लगती है, जहां वरुण का किरदार मजाकिया और फ्लर्टी दिखाई देता है। लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ रिश्तों की जटिलता और भावनात्मक मोड़ सामने आने लगते हैं।

मृणाल ठाकुर के साथ वरुण की केमिस्ट्री फिल्म की मजबूत कड़ी बनती है। वहीं पूजा हेगड़े ग्लैमर और एंटरटेनमेंट फैक्टर बढ़ाती हैं।

दूसरे हाफ में कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब रिश्तों और परिवार से जुड़े छिपे हुए राज सामने आने लगते हैं। हालांकि कुछ ट्विस्ट मजेदार लगते हैं, लेकिन कई जगह दर्शक पहले ही अंदाजा लगा सकते हैं कि आगे क्या होने वाला है।

फिल्म का क्लाइमैक्स पूरी तरह बॉलीवुड स्टाइल में रखा गया है, जहां लंबे समय से चल रही गलतफहमियां कॉमिक और इमोशनल तरीके से खत्म होती हैं। हालांकि एंडिंग संतोषजनक लगती है, लेकिन कुछ दर्शकों को यह थोड़ी जल्दबाजी में खत्म होती महसूस हो सकती है।

एक्टिंग कैसी है?

वरुण धवन फिल्म की जान हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार है और इमोशनल सीन में भी वह प्रभावित करते हैं।

मृणाल ठाकुर ने संतुलित अभिनय किया है और भावनात्मक दृश्यों में काफी प्रभाव छोड़ती हैं।

पूजा हेगड़े का रोल अपेक्षाकृत हल्का है, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस अच्छी है।

सपोर्टिंग कास्ट में जिमी शेरगिल, चंकी पांडे और मनीष पॉल कई मजेदार मोमेंट्स देते हैं, हालांकि कुछ कॉमेडी ट्रैक खींचे हुए लगते हैं।

डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले

डेविड धवन ने पुरानी बॉलीवुड कॉमेडी का स्वाद वापस लाने की कोशिश की है। अगर आपको गोविंदा-स्टाइल मसाला फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म पसंद आ सकती है। लेकिन नई और फ्रेश कहानी चाहने वालों को यह थोड़ी पुरानी लग सकती है।

पहला हाफ तेज और एंटरटेनिंग है, लेकिन दूसरा हाफ थोड़ा धीमा पड़ जाता है।

म्यूजिक और टेक्निकल पहलू

फिल्म के गाने अच्छे हैं लेकिन बहुत ज्यादा यादगार नहीं बन पाते। बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी को सपोर्ट करता है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म को रंगीन और विजुअली आकर्षक बनाती है।

हालांकि एडिटिंग थोड़ी और बेहतर हो सकती थी, खासकर दूसरे हाफ में।

फाइनल वर्डिक्ट

“है जवानी तो इश्क होना है” एक वन-टाइम एंटरटेनिंग बॉलीवुड मसाला फिल्म है, जो कॉमेडी, रोमांस और फैमिली ड्रामा पसंद करने वालों को पसंद आ सकती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत वरुण धवन की एनर्जी और कॉमिक टाइमिंग है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले और प्रेडिक्टेबल ट्विस्ट इसे शानदार बनने से रोकते हैं।

अगर आप हल्की-फुल्की एंटरटेनमेंट फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह आपके लिए अच्छी चॉइस हो सकती है।