सिरोही / स्थानीय संस्कृति को उभार रहा है ब्रह्माकुमारीज का रेडियो मधुबन, 3 राष्ट्रीय पुरस्कार जीते

Zoom News : Aug 28, 2019, 07:33 PM
ब्रह्माकुमारीज संस्थान स्थानीय संस्कृति को पोषित एवं पल्लवित कर रहा है रेडियो मधुबन के माध्यम से। यह भारत सरकार ने भी माना है और सामुदायिक रेडियो अवार्ड में रेडियो मधुबन ने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। 
केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. बी.आर. अम्बेडकर भवन में आयोजित एक समारोह में वर्ष 2018 और 2019 के लिए ‘सामुदायिक रेडियो के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार’ प्रदान किए। इस समारोह का आयोजन 7वें सामुदायिक रेडियो सम्मेलन के अंतर्गत किया गया है। उन्होंने नई सरकार के पहले 75 दिनों के महत्वपूर्ण निर्णयों पर आधारित पुस्तिका ‘जन कनेक्टः स्‍पष्‍ट नीयत, निर्णायक कदम’ जारी की। यह पुस्तिका सूचना व प्रसारण मंत्रालय के आउटरीच एवं संचार ब्यूरो द्वारा तैयार की गई है।

लोकप्रिय है मधुबन
अध्यात्मिक जगत के बड़े सेतु के रूप में काम कर रहा ब्रह्माकुमारीज संगठन का रेडियो मधुबन आबूरोड क्षेत्र में आदिवासी कल्याण, ग्रामीण विकास और संस्कृति विकास के क्षेत्र में प्रभावी काम कर रहा है। इसी के चलते उसे सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के हाथों 2018 व 2019 के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार दिल्ली में प्राप्त हुए हैं। ब्रह्माकुमारी संस्थान राजस्थान के आबूरोड में अंतरराष्ट्रीय कार्यालय के साथ काम कर रहा है और उसकी कई देशों में शाखाएं हैं। माउंट आबू व आबूरोड इलाके में इस रेडियो का खासा प्रसार और लोकप्रियता है। 

नन्हे बच्चों, समाज और संस्कृति को उभार रहा मधुबन
रेडियो मधुबन के कार्यक्रम नन्हे सितारे को 2018 का कम्युनिटी एंगेजमेंट कैटैगरी कर प्रथम पुरस्कार हासिल हुआ है। 2019 का स्थानीय संस्कृति उत्थान के लिए अवार्ड मधुबन की गांव री बातें कार्यक्रम को हासिल हुआ है। मधुबन को ही 2018 के संस्कृति उत्थान के लिए ओपनो समाज कार्यक्रम पर तृतीय पुरस्कार दिया गया है। 
मंत्री ने की सराहना
सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और देश के सभी हिस्सों में सामुदायिक रेडियो स्टेशन के प्रतिनिधियो के रूप में उनके द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना की। वर्तमान में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की संख्या 262 है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 500 स्टेशन करना है। इससे देश में सामुदायिक रेडियो के अभियान को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि रेडियो संचार का सबसे शक्तिशाली और विश्वसनीय माध्यम है। जावड़ेकर ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम की सफलता के बारे में कहा कि यह अब ‘देश की बात’ के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति के ‘दिल की बात’ बन गया है। उन्होंने सम्मेलन के प्रतिभागियों से आग्रह किया कि उन्हें अपने अनुभव साझा करने चाहिए और सामग्री तथा कार्यक्रमों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों से अनुरोध किया कि वे अपने सुझाव के बारे में मुझे पत्र लिखें। इस अवसर पर पूरे देश के सामुदायिक रेडियो स्टेशनों पर चलने वाले सभी कार्यक्रमों की सूची भी जारी की गई।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में सचिव श्री अमित खरे ने सामुदायिक रेडियो की सामग्री (कंटेंट) से सतत विकास लक्ष्यों को जोड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्‍होंने यह भी कहा कि सामुदायिक रेडियो राष्‍ट्रीय विचार प्रक्रिया और स्‍थानीय मुद्दों एवं चुनौतियों के बीच एक महत्‍वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव सुश्री टी.सी.ए. कल्‍याणी के धन्‍यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ। मंत्रालय के साथ-साथ इसके अधीनस्‍थ मीडिया यूनिटों के अनेक वरिष्‍ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
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