ज्योतिष शास्त्र और हिंदू पंचांग में अधिकमास की पूर्णिमा का एक अत्यंत विशिष्ट और महत्वपूर्ण स्थान है। वर्ष 2026 में अधिकमास की पूर्णिमा आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा हर तीन साल में केवल एक बार आती है, जिसके कारण इस तिथि का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। पंचांग की गणना के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ बीते कल यानी 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर हुआ था। यह तिथि आज दोपहर 02 बजकर 14 मिनट तक बनी रहेगी। चूंकि आज सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान थी, इसलिए उदयातिथि के नियमानुसार आज ही के दिन पूर्णिमा का स्नान और दान किया जा रहा है।
स्नान के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त
अधिकमास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे श्रेष्ठ और उत्तम माना गया है। आज के दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 04 बजकर 03 मिनट पर शुरू हुआ और यह सुबह 04 बजकर 43 मिनट तक रहा। गंगा या अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाने के लिए यह सबसे उत्तम समय था। हालांकि, श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के कारण गंगा सहित अन्य पावन नदियों के तटों पर अभी भी स्नान का सिलसिला जारी है। वर्तमान में अमृत काल का शुभ समय चल रहा है, जो सुबह 04 बजकर 33 मिनट से शुरू हुआ है और सुबह 06 बजकर 20 मिनट तक रहने वाला है। इसके अतिरिक्त, जो लोग सुबह जल्दी स्नान नहीं कर पाए हैं, वे अभिजीत मुहूर्त में भी स्नान कर सकते हैं। आज अभिजीत मुहूर्त का समय सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, जो स्नान और पूजन के लिए अनुकूल है।
दान करने का सबसे उत्तम समय
अधिकमास की पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है। यदि आपने शुभ मुहूर्त में स्नान कर लिया है, तो दान करने के लिए भी एक विशेष समय निर्धारित है। आज पूर्णिमा पर दान करने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 08 बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में किया गया दान जातक के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आता है।
इन वस्तुओं का दान करना रहेगा फलदायी
अधिकमास की पूर्णिमा के दिन अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए और आज के दिन चावल, दाल, आटा, गुड़, घी और दूध जैसी खाद्य वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही मौसमी फलों जैसे आम या केले का दान भी विशेष फलदायी होता है। चूंकि यह समय गर्मी के मौसम का है, इसलिए जरूरतमंदों को वस्त्र, छाता और शीतल जल से भरा हुआ मिट्टी का मटका दान करना बहुत ही पुण्यकारी माना गया है। ये वस्तुएं न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भीषण गर्मी में जरूरतमंदों के लिए बहुत उपयोगी भी साबित होती हैं।
अधिकमास पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। स्वयं भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम पुरुषोत्तम प्रदान किया है, इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यही मुख्य कारण है कि अधिकमास की पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व इतना अधिक है। इस विशेष अवधि के दौरान किए गए स्नान, जप, तप, दान और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। अधिकमास की पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है। भक्त इस दिन व्रत रखकर और भगवान की आराधना करके अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं। तीन वर्षों के अंतराल पर आने वाला यह अवसर आध्यात्मिक उन्नति और पापों के क्षय के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
