अखिलेश यादव ने चंद्रशेखर आजाद को झटका देकर कही बड़ी राजनीतिक बात: जानिए क्या है पूरा मामला

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के साथ गठबंधन से इनकार किया है और कहा है कि उनके बिना भी पार्टी चुनाव जीत रही है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां पूरी गति के साथ तेज हो चुकी हैं। सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतर चुके हैं और अपने अपने स्तर पर प्रचार प्रसार में पूरी तरह से जुट गए हैं। इस चुनावी माहौल के बीच विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं भी लगातार जारी हैं। इसी राजनीतिक सरगर्मी के क्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आजाद समाज पार्टी कांशीराम के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है और उनके साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन की संभावना से साफ तौर पर इंकार कर दिया है और इसके अलावा अखिलेश यादव ने ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी तीखा राजनीतिक निशाना साधा है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सांसद चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी कांशीराम के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर स्पष्ट रूप से बात करते हुए कहा कि चंद्रशेखर आजाद से क्यों गठबंधन हो जाएगा और उन्होंने आगे आत्मविश्वास के साथ यह भी कहा कि उनके बिना भी हमारी पार्टी चुनाव जीत रही है। अखिलेश यादव ने इस दौरान किसी का नाम लिए बिना एआईएमआईएम पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने ओवैसी के ऊपर तंज कसते हुए कहा कि डोर आखिर किसके हाथ में है। पतंग उतनी ही ऊपर जाती है जितनी उसे ढील दी जाती है। जब डोर ही खत्म हो जाएगी तो पूरा खेल ही खत्म हो जाएगा और सच्चाई तो यह है कि पीछे से जितनी ज्यादा ढील दी जाएगी, पतंग उतनी ही अधिक ऊंचाई तक जाएगी। अखिलेश यादव ने अपने इस बयान को आगे बढ़ाते हुए यह भी दावा किया कि इस बार चुनाव में कोई अस्सी और बीस का खेल नहीं चल रहा है, बल्कि यह नब्बे और दस का खेल है। उन्होंने कहा कि जितने भी लोग पीड़ित हैं, वे सभी इस नब्बे प्रतिशत के दायरे में आते हैं।

अखिलेश यादव की तरफ से आए इस स्पष्ट बयान से पहले सोमवार को सांसद चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की राजनीतिक टेंशन को काफी बढ़ा दिया था। चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को सार्वजनिक रूप से गठबंधन का खुला ऑफर दिया था। चंद्रशेखर ने अपनी बात रखते हुए कहा था कि अगर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाना है, तो अखिलेश यादव को सभी छोटे और बड़े दलों को साथ लेकर चलना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि गठबंधन के तहत सभी पार्टियों को उनका पूरा और वाजिब हक देना पड़ेगा, तभी भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला मजबूती के साथ किया जा सकता है। लेकिन अखिलेश यादव ने इस ऑफर को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

दूसरी तरफ इस पूरे घटनाक्रम से पहले एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा था। ओवैसी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि असलियत में जो भी नेता मुसलमानों के हक और अधिकारों की बात करता है, अखिलेश यादव उसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान लेते हैं। ओवैसी ने अपनी बात को समझाते हुए कहा कि जिस समय उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भीषण दंगे हुए थे, उस वक्त अखिलेश यादव की पार्टी के पास कुल सैंतालीस मुस्लिम विधायक मौजूद थे, लेकिन उनमें से किसी ने भी मुजफ्फरनगर के पीड़ित मुसलमानों की कोई सुध नहीं ली। ओवैसी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि उस दौरान अखिलेश यादव अपने गृह जिले सैफई में बैठकर आराम से डांस का कार्यक्रम देख रहे थे। ओवैसी ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को दाढ़ी और टोपी वाला हर एक शख्स केवल रावण की तरह नजर आता है। ओवैसी ने अंत में यह भी कहा कि जब वह मुसलमानों के हक और इंसाफ की बात करते हैं, तो अखिलेश यादव उन्हें भारतीय जनता पार्टी का एजेंट बताने लग जाते हैं।