अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और इस भू-राजनीतिक खींचतान में अब रूस भी खुलकर सामने आ गया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य हमले की धमकी दिए जाने के बाद रूस ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी धमकियों को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' करार दिया है और चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी कदम के मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर और विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। यह स्थिति क्षेत्र में पहले से ही नाजुक शांति को और अधिक अस्थिर कर सकती है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में चिंताएं बढ़ गई हैं।
रूस की कड़ी चेतावनी
रूसी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका के रुख की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईरान पर किसी भी प्रकार का हमला न केवल मध्य पूर्व की स्थिति को और बिगाड़ेगा, बल्कि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत बुरे परिणाम लेकर आएगा। रूस ने अमेरिका पर यह भी आरोप लगाया कि वह ईरान के मित्र देशों को टैरिफ बढ़ाकर डराने की कोशिश कर रहा है, जिसे रूस ने 'साफ-साफ ब्लैकमेलिंग' बताया। यह आरोप दर्शाता है कि रूस अमेरिका की नीतियों को एकतरफा और दबाव बनाने वाली रणनीति के रूप में देखता है, जो अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।
ईरान में विदेशी साजिश का आरोप
रूसी विदेश मंत्रालय ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के पीछे बाहरी ताकतों का हाथ होने का गंभीर आरोप लगाया है और मंत्रालय के अनुसार, ईरान में विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के कारण शुरू हुए हैं, जो पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई हैं। इन प्रतिबंधों ने ईरानी अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और रूस का मानना है कि बाहरी ताकतें इस बढ़ते हुए सामाजिक तनाव का फायदा उठा रही हैं, जिसका उद्देश्य ईरान की सरकार को अस्थिर करना और अंततः उसे बर्बाद करना है। बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि ईरान में हो रहे बवाल के पीछे। विदेश से निर्देशित कुछ प्रशिक्षित हथियारबंद लोग हैं, जो हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।
स्थिति सामान्य होने की उम्मीद
इन गंभीर आरोपों के बावजूद, रूसी विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि ईरान में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। रूस ने ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों को भी सलाह दी है कि वे। भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। यह सलाह मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में रूसी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक एहतियाती कदम है। रूस का यह रुख दर्शाता है कि वह स्थिति को शांत होते देखना चाहता। है, लेकिन साथ ही वह अमेरिकी हस्तक्षेप के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहा है।
ट्रंप ने बंद किया बातचीत का रास्ता
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर की जा रही कार्रवाई के बीच ईरानी अधिकारियों से बातचीत का रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया है। ट्रंप ने ईरानी नागरिकों से सीधे तौर पर कहा कि 'मदद जल्दी आ रही है। ' हालांकि, ट्रंप ने मंगलवार को यह स्पष्ट नहीं किया कि यह 'मदद' किस रूप में होगी, लेकिन उनके इस बयान को ईरान पर संभावित हमले की धमकी के रूप में देखा जा रहा है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस बयान के कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने कहा था कि। ईरान वॉशिंगटन से बातचीत करना चाहता है, जिससे उनके रुख में अचानक आए बदलाव पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रंप का ईरानी लोगों के नाम संदेश
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरानी देशभक्तों को संबोधित करते हुए लिखा, 'विरोध प्रदर्शन जारी रखो, अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो! और हत्यारों और अत्याचार करने वालों के नाम याद रखो। वे बड़ी कीमत चुकाएंगे। मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकें तब तक के लिए रद्द कर दी हैं जब तक कि प्रदर्शनकारियों की बेवजह हत्याएं बंद नहीं होतीं। मदद जल्दी आ रही है। ' ट्रंप ने मिशिगन में एक ऑटो फैक्ट्री में दिए भाषण में भी इस पोस्ट को दोहराया। जब रिपोर्टरों ने उनसे पूछा कि यह 'मदद' क्या होगी, तो उन्होंने रहस्यमय ढंग से कहा, 'आपको खुद पता लगाना होगा।
बढ़ती हिंसा और मरने वालों की संख्या
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों में हिंसा लगातार बढ़ रही है और मानवाधिकार निगरानीकर्ताओं के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या 2,000 से भी ज्यादा हो गई है। यह आंकड़ा स्थिति की गंभीरता और मानवीय संकट को दर्शाता है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इन मौतों पर चिंता व्यक्त कर रहा है, और अमेरिका तथा। रूस के बीच की यह बयानबाजी इस संकट को और गहरा सकती है। ईरान में आंतरिक अशांति और बाहरी दबाव के बीच, क्षेत्र में। शांति और स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।