Business News / अमेरिका कर्ज से बेहाल- जापान-ब्रिटेन का बुरा हाल, अब भारत होगा मालामाल

Zoom News : Feb 16, 2024, 09:45 AM
Business News: इस समय दुनिया में कुछ ही ऐसे देश हैं, जो ग्रोथ की इंजन पर सवार हैं. भारत उनमें सबसे आगे खड़ा है. यह इकलौता ऐसा देश है, जो इस मंदी के दौर में भी बुलेट ट्रेन की स्पीड में विकास कर रहा है. जापान से लेकर ब्रिटेन तक सभी देश मंदी की चपेट में आ चुके हैं. अमेरिका कर्ज के बोझ से बेहाल है. भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश की बात करें तो यहां की आर्थिक स्थिति बेहद खराब दौर से गुजर रही है. ऐसे में सवाल ये है कि क्या भारत इस मंदी के दौर में विकास की पटरी पर रफ्तार भरते हुए ग्लोबल इंजन का लीडर बन पाएगा? चलिए टॉप इकोनॉमी की हालत को डीकोड कर इस सवाल का जवाब समझते हैं. साथ में भारत की विकास दर पर भी नजर डालेंगे.

जापान के हाथ से गया ये ताज

मंदी की चपेट में आने के बाद जापान ने दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का ताज खो दिया है, यानी अब वह जर्मनी से नीचे आ गया है. इस रैंक में गिरावट का कारण कमजोर येन और देश की बढ़ती उम्र, घटती आबादी है. जापान की अर्थव्यवस्था, जो अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, 2023 में वह 1.9% के दर से बढ़ी है, जिसका मतलब ये निकलता है कि वहां मौजूद महंगाई को कंट्रोल करने के लिए ग्रोथ पर्याप्त नहीं है.

बता दें कि चीन के दूसरे स्थान पर चले जाने के एक दशक से भी अधिक समय बाद आए इस बदलाव को पिछले दो वर्षों में डॉलर के मुकाबले येन की तेज गिरावट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. 2022 और 2023 में जापानी मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग पांचवें हिस्से तक गिर गई, जिसमें पिछले साल 7% की गिरावट भी शामिल है.

मंदी की चपेट में ब्रिटेन

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की बात करें तो 2023 की दूसरी छमाही में उसे मंदी ने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है, प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के लिए यह सबसे मुश्किल समय है, क्योंकि उन्होंने चुनाव में 2024 में देश की इकोनॉमी को बढ़ाने का वादा किया था. ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स (ONS) ने कहा कि दिसंबर तक के तीन महीनों में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में अपेक्षा से अधिक 0.3% की गिरावट आई है, जो जुलाई और सितंबर के बीच 0.1% कम हो गई है. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था करीब दो साल से स्थिर बनी हुई है. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने कहा है कि उसे उम्मीद है कि 2024 में इसमें थोड़ी तेजी आएगी, लेकिन वर्तमान के हालात ऐसा कई भी संकेत नहीं दे रहे हैं.

इकोनॉमी से भी अधिक है अमेरिका पर कर्ज

अमेरिका के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका पर 33.91 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है. ताज्जुब की बात तो ये है कि अमेरिका की इकोनॉमी 26.95 ट्रिलियन डॉलर की है. इसका मतलब है कि अमेरिका पर कर्ज उसकी कुल इकोनॉमी से भी 7 ट्रिलियन डॉलर ज्यादा है. करीब एक साल पहले इसी कर्ज की वजह से डेट की सीलिंग का संकट खड़ा हो गया था. जिसकी वजह से ग्लोबल इकोनॉमी में हहाकार मच गया. अमेरिकी संसद से डेट सीलिंग के इस संकट को टालने का काम किया. वैसे आने वाले महीनों में फिर से अमेरिका को डेट सीलिंग के संकट का सामना करना पड़ सकता है. जिसका असर दुनिया की सभी इकोनॉमी पर पड़ता हुआ दिखाई दे सकता है.

बता दें कि अमेरिका पर जितना कर्ज है, उतने पैसों में ब्रिक्स के 10 देश और उसमें जापान यानी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी जापान जैसे देशों को बनाया जा सकता है. यानी दुनिया के 11 बड़े देशों के मुकाबले नए देशों को खड़ा किया जा सकता है वो भी उतनी की मजबूती के साथ. वहीं दूसरी ओर यूरोपीय यूनियन के 48 देशों की जीडीपी को भी मिला ली जाए तो भी अमेरिका के कुल कर्ज के बराबर भी नहीं पहुंच सकते हैं. इन देशों की कुल जीडीपी करीब 27 ट्रिलियन डॉलर है. इसका मतलब है कि दुनिया के 50 ऐसे देशों को दोबारा से नए सिरे से खड़ा किया जा सकता है.

विकास की पटरी पर भारत?

कहा जा रहा है कि भारत 2024 में अपनी ताकत दुनिया को दिखाएगा. आम चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने देश की जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी किए हैं. इसके हिसाब से देश की ग्रोथ रेट इतनी जबरदस्त रहेगी कि इकोनॉमी में भरपूर पैसे की बरसात होगी. एनएसओ के डेटा के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में देश की रीयल जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहेगी. ये 2022-23 के 7.2 प्रतिशत से काफी अधिक है. एनएसओ ने पहली बार देश के जीडीपी को लेकर इस तरह का अनुमान जारी किया है.

ग्लोबल इंजन का लीडर बनेगा भारत

भारत आज दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी है. ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ते हुए भारत इस मुकाम पर पहुंचा है. भारत के 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का अनुमान है. मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ा है. बीते 9 साल में ये 615.73 अरब डॉलर रहा है. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से बढ़ा है. आज ये 620.44 अरब डॉलर के लेवल पर पहुंच चुका है. यानी कुल मिलाकर देखें तो वह दिन भी नजदीक है, जब भारत ग्लोबल इंजन का हब बनेगा.

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