अमेरिका मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की हार, विपक्ष के साथ काम करने का ऐलान

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लिया है और ट्रंप ने हार स्वीकार कर ली है।

अमेरिका के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद अहम और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की खबर सामने आ रही है, जहां अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है और वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल यानी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया है और रिपब्लिकन पार्टी से नियंत्रण पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हार को खुले दिल से स्वीकार कर लिया है और कहा है कि वे डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर देश हित में काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। अमेरिकी राजनीति में इस बदलाव को एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिसके दूरगामी परिणाम आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस पूरे घटनाक्रम पर कहना है कि वह खुद सीधे तौर पर बैलेट यानी चुनाव मैदान में नहीं थे और अगर ऐसा होता यानी वह खुद चुनाव लड़ रहे होते, तो उनकी पार्टी भारी बहुमत से जीत दर्ज करती। इसके बावजूद उन्होंने अमेरिकी वोटर्स का तह दिल से धन्यवाद किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल के साथ खास बातचीत में यह साफ तौर पर कहा कि वे इन चुनाव नतीजों को पूरी तरह से स्वीकार करते हैं और भविष्य में वह डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर देश को आगे बढ़ाने का काम करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस चुनावी परिणाम को लेकर उन्हें किसी भी प्रकार का कोई पछतावा नहीं है, क्योंकि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और वे इसका सम्मान करते हैं।

सीनेट चुनाव के आंकड़े और सीटों की स्थिति

अगर सीनेट के चुनावी आंकड़ों पर बारीकी से नजर डालें, तो भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे तक डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट की 51 सीटों पर अपना मजबूत कब्जा जमा लिया है। इसके विपरीत, राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी केवल 39 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई है। इस प्रकार डेमोक्रैट्स ने सीनेट में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है और वर्तमान में वे 2 सीटों पर अभी भी बढ़त बनाए हुए हैं। अमेरिकी संसद की संरचना के तहत सीनेट में कुल 100 सीटें होती हैं, जहां अमेरिका के हर राज्य से 2 सीनेटर चुने जाते हैं। इन सीनेटरों का कार्यकाल पूरे 6 साल का होता है। सीनेट में किसी भी दल को नियंत्रण हासिल करने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 51 सीटों का होता है, जिसे डेमोक्रैट्स ने आसानी से प्राप्त कर लिया है।

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का विस्तृत चुनावी गणित

दूसरी तरफ, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा के नतीजों की बात करें तो भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे तक डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 154 सीटों पर आधिकारिक जीत हासिल कर ली है और वह इसके अलावा 107 सीटों पर अभी भी बढ़त बनाए हुए है। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन्स ने 101 सीटों पर अपना कब्जा जमा लिया है और वे 62 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटों पर मतदान संपन्न होता है, जहां बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 218 सीटों की आवश्यकता होती है। हाउस के सदस्यों का कार्यकाल 2 साल का होता है, जिससे यह सदन अमेरिकी जनता की नब्ज का सबसे सटीक पैमाना माना जाता है।

गवर्नर चुनावों के नतीजे और राज्यों की तस्वीर

केवल संसद ही नहीं, बल्कि राज्यों के गवर्नर पदों के लिए हुए चुनावों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने उल्लेखनीय बढ़त बनाई है। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे तक डेमोक्रेटिक पार्टी कुल 22 गवर्नरों की सीटें जीत चुकी है, जबकि इसके मुकाबले ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन्स केवल 13 सीटों पर ही अपनी जीत दर्ज कर पाई है। इन सबके बीच, अभी भी 15 सीटों पर चुनावी परिणाम घोषित होना पूरी तरह से बाकी है, जिसके आने के बाद तस्वीर और अधिक साफ हो जाएगी। इन गवर्नर चुनावों के नतीजे आने वाले वर्षों में अमेरिकी राज्यों की स्थानीय नीतियों और राजनीतिक समीकरणों को तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

डेमोक्रेट्स द्वारा कई अहम सीटों पर बाजी पलटना

डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस चुनाव में कई बेहद अहम और रणनीतिक सीटों पर बाजी पलटकर सबको चौंका दिया। उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना का एक ऐसा महत्वपूर्ण जिला जीत लिया, जिस पर पिछले 15 साल से भी ज्यादा लंबे समय से लगातार रिपब्लिकन्स का ही कब्जा चला आ रहा था। इसके अलावा, उन्होंने पेंसिल्वेनिया, केंटकी और कोलोराडो जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्यों में भी शानदार सीटें जीतीं। दिलचस्प बात यह है कि टेक्सास और फ्लोरिडा समेत कई बड़े राज्यों में रिपब्लिकन्स ने मिडटर्म चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने और बढ़त हासिल करने के लिए चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय यानी रीडिस्ट्रिक किया था, लेकिन इसके बावजूद कुछ नए तय किए गए क्षेत्रों में भी अंततः डेमोक्रेट्स ही विजयी होकर उभरे।

मतदाताओं की नाराजगी और ट्रंप के खिलाफ मुद्दे

विश्लेषकों का मानना है कि साल 2023 से हाउस पर नियंत्रण रखने वाले रिपब्लिकन अपनी मामूली बढ़त को बचाने में पूरी तरह असफल रहे। अमेरिकी मतदाताओं के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में चीजों का महंगा होना सबसे बड़ी और मुख्य चिंता का विषय बना रहा। इसके अलावा ईरान युद्ध और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रशासन की ओर से लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के कारण आम अमेरिकियों के रोजमर्रा के खर्च में काफी इजाफा हो गया, जिससे मतदाताओं में असंतोष पैदा हुआ। अमेरिका के ज्यादातर हिस्सों में मतदान की प्रक्रिया अब समाप्त हो चुकी है, जहां हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों के लिए चुनाव संपन्न हुए। हाउस की मौजूदा स्थिति में 218 रिपब्लिकन, एक निर्दलीय जो रिपब्लिकन के साथ मिलकर काम करता है और 214 डेमोक्रेट शामिल हैं, जबकि दो सीटें इस समय खाली हैं। डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन के कब्जे वाली कई पारंपरिक सीटें अपने नाम कर ली हैं और कुछ ऐसी सीटों पर भी बेहद कड़ी टक्कर दी है, जहां से उनकी जीत की दूर-दूर तक उम्मीद नहीं की जा रही थी।