अमेरिका मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की ताकत की अग्निपरीक्षा आज, पढ़ें पूरी रिपोर्ट विस्तार से

अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के लिए मतदान जारी है जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक भविष्य और उनकी ताकत की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होंगे।

दुनिया के देशों को टैरिफ की धमकी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज अपने ही देश के वोटर्स के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ये ट्रंप की ताकत का सबसे बड़ा इम्तिहान है और अमेरिका में हो रहे मिड-टर्म चुनावों ने पिछले कई दिनों से ट्रंप की रातों की नींद खराब कर दी है। ट्रंप ने पिछले 32 दिनों में 20 राज्यों में ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां की हैं। वो किसी भी कीमत पर हारना नहीं चाहते हैं, लेकिन इस समय अमेरिका में उनकी किस्मत और उनकी ताकत दोनों का ही एक साथ फैसला हो रहा है। यानी दुनिया के नक्शे पर अपनी मर्जी से लकीर खींचने वाले ट्रंप, आज खुद अमेरिका के सियासी नक्शे पर अपनी पैनी नजरें गड़ाए बैठे हैं।

ट्रंप के सामने अमेरिका के अंदर से सबसे बड़ी चुनौती

ईरान से लेकर यूरोप तक और चीन से लेकर भारत तक, दुनिया भर के देशों पर अपनी शर्तें थोपने की कोशिश करने वाले ट्रंप के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती खुद अमेरिका के अंदर से खड़ी हो गई है। आज का मिड-टर्म चुनाव सिर्फ कांग्रेस की सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर ट्रंप की ताकत का इम्तिहान है। यह चुनाव इस बात का फैसला करेगा कि व्हाइट हाउस में बैठे ट्रंप अपने कार्यकाल के अगले दो वर्ष अपनी मर्जी से चला पाएंगे, या फिर हर बड़े फैसले पर उन्हें कांग्रेस के सामने हाथ बांधकर खड़ा होना पड़ेगा। इस समय ट्रंप की सियासी किस्मत का फैसला हो रहा है और सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप एक पावरलेस प्रेसिडेंट बन जाएंगे।

ट्रंप के लिए मिडटर्म चुनाव जीतना क्यों है जरूरी

इस वक्त अमेरिका में लाइव वोटिंग चल रही है। भारतीय समय के मुताबिक शाम साढ़े चार बजे से वोटिंग शुरू हुई है और यह कल सुबह साढ़े चार बजे तक चलेगी। इसके बाद चुनावी रुझान आने शुरू हो जाएंगे। लेकिन मतदान से पहले इन चुनावों से जुड़ी कुछ बेहद खास बातें जान लेना जरूरी है और अमेरिका में राष्ट्रपति के चार वर्ष के कार्यकाल के ठीक बीच में चुनाव होते हैं, जिन्हें मिड-टर्म इलेक्शन या मध्यावधि चुनाव कहा जाता है। देश के राष्ट्रपति खुद इस चुनाव में सीधे उम्मीदवार नहीं होते हैं, लेकिन ये चुनावी नतीजे राष्ट्रपति के अब तक के कामकाज पर जनता की साफ राय बताते हैं। इस बार संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत दांव पर लगा हुआ है। ट्रंप ने यदि एक भी सदन में बहुमत खो दिया तो वह अपना कोई भी मुख्य एजेंडा सुचारू रूप से नहीं चला पाएंगे।

मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के लिए क्यों बनती है खतरे की घंटी

ट्रंप के लिए खतरे की घंटी इसलिए भी तेजी से बज रही है क्योंकि अमेरिका में राष्ट्रपति की पार्टी का मिड-टर्म चुनावों में कमजोर होना कोई नई बात नहीं है और इतिहास गवाह है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ज्यादातर मिड-टर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को कांग्रेस में अपनी सीटें गंवानी पड़ी हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्ष 1946 से वर्ष 2022 के बीच कुल 20 मिड-टर्म चुनाव हुए हैं। इनमें से 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में अपनी सीटें गंवाई हैं। इतिहास में सिर्फ दो ही बार ऐसा हुआ है जब राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस में अपनी सीटें बढ़ाई हों और ये दोनों बड़े अपवाद बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल के दौरान देखने को मिले थे।

क्लिंटन और जॉर्ज बुश कैसे जीते थे चुनाव

आखिर इतिहास में मिड-टर्म इलेक्शन के दौरान बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू बुश की जीत कैसे संभव हुई थी, इस पर भी गौर करना जरूरी है। बिल क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने वर्ष 1998 में हाउस में चार सीटें बढ़ाई थीं, जबकि वर्ष 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश की रिपब्लिकन पार्टी ने लोअर हाउस में आठ और सीनेट में दो सीटें हासिल की थीं। बिल क्लिंटन के खिलाफ चलाए गए महाभियोग को जनता का समर्थन नहीं मिला था, जिसके कारण उनकी स्थिति मजबूत हुई, जबकि वर्ष 2001 में हुए नौ ग्यारह (9/11) आतंकी हमलों के बाद देश में उपजे हालातों की वजह से जॉर्ज बुश की लोकप्रियता में भारी उछाल आया था।

मिड-टर्म चुनाव पर क्या बोले थे डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन ऐतिहासिक तथ्यों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। वह खुद कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अमेरिका के राजनीतिक इतिहास का यह दस्तूर रहा है कि मौजूदा राष्ट्रपति के लिए मिड-टर्म चुनाव जीतना कभी भी इतना आसान नहीं होता है। ट्रंप ने अपने एक बयान में कहा था कि मैंने पिछले चुनाव में रिकॉर्ड जीत हासिल की थी, उन सभी रिकॉर्ड्स के साथ, यह कोई मायने नहीं रखता कि क्या हम मूर्ख बनेंगे और अपने देश से नफरत करने वाले लोगों को कोई चुनाव जीतने देंगे। उन्होंने कहा कि क्योंकि यदि वो लोग जिन्होंने मुझे वोट दिया और पिछले चुनाव में हमारे पक्ष में वोट दिया, जहां हमारी इतनी बड़ी जीत हुई थी, यदि वो सभी लोग बाहर जाकर वोट देते हैं तो उनमें हम भारी बहुमत से जीतेंगे। ट्रंप ने आगे कहा कि अब, ऐसा आमतौर पर नहीं होता है, क्योंकि अक्सर मौजूदा राष्ट्रपति चाहे वे रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, अच्छे हों या बुरे, ठीक-ठाक हों या बहुत बेहतरीन हों, किसी न किसी वजह से मध्यावधि चुनाव नहीं जीत पाते हैं, लेकिन हमने इस बार बहुत कड़ी टक्कर दी है।

अमेरिकी संसद में किस पार्टी की कितनी ताकत

अब यह देख लेते हैं कि वर्तमान में अमेरिकी संसद में किस पार्टी के पास कितनी ताकत है। प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन्स के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर वोटिंग हो रही है। वहीं दूसरी ओर सीनेट में रिपब्लिकन्स के पास 53 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें मौजूद हैं। सीनेट की कुल 100 सीटों में से इस बार 35 सीटों पर वोटिंग हो रही है। यदि दोनों सदनों में रिपब्लिकन्स को स्पष्ट बहुमत मिलता है तो ट्रंप के सभी फैसलों को और अधिक ताकत मिलेगी। इसके विपरीत यदि डेमोक्रेट्स को बहुमत मिल जाता है तो ट्रंप के फैसलों पर बड़ा अंकुश लग जाएगा।

ट्रंप के हारने पर सरकार चलाना होगा मुश्किल

यदि इन चुनावों में ट्रंप की पार्टी हार जाती है तो सरकारी नीतियों और बजट को संसद से मंजूरी दिलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। ट्रंप के हारने की स्थिति में उनकी सभी न्यायिक नियुक्तियों को भी रोका जा सकता है। इसके साथ ही यह परिणाम ट्रंप प्रशासन के खिलाफ नए सिरे से भ्रष्टाचार और अन्य मामलों की जांच का रास्ता पूरी तरह खोल देगा। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने के लिए सिर्फ तीन सीटों का फायदा चाहिए, जबकि सीनेट में उन्हें चार सीटें जीतनी होंगी। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स की वापसी की संभावना राजनीतिक गलियारों में ज्यादा आंकी जा रही है, लेकिन सीनेट की जंग अभी भी कांटे की बनी हुई है।

चुनाव से पहले ही ट्रंप को लग चुके हैं कई झटके

ट्रंप के लिए राजनीतिक खतरा सिर्फ एक सदन तक ही सीमित नहीं है। चुनाव शुरू होने से पहले ही ट्रंप को अदालतों और जनता की तरफ से झटके पर झटके मिल चुके हैं। अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की उस मांग को पूरी तरह ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने बीस हजार से ज्यादा वोटर्स के मेल-इन बैलेट की गिनती रोकने का आग्रह किया था। प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रैटिक पार्टी के बहुमत हासिल करने की संभावना सबसे ज्यादा जताई जा रही है। हालिया रुझानों और बयानों के मुताबिक छियालीस प्रतिशत वोटर्स ने कहा है कि वह डेमोक्रेट्स को वोट देंगे, जबकि केवल अड़तीस प्रतिशत वोटर्स ने रिपब्लिकन पार्टी का खुलकर समर्थन किया है। इस बार के मिड-टर्म इलेक्शन में अर्ली वोटिंग का भी अब तक का नया रिकॉर्ड बन चुका है।

अर्ली वोटिंग में टूटा पिछले सभी चुनावों का रिकॉर्ड

फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी की इलेक्शन लैब के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार दोपहर तक करीब पांच करोड़ सत्तर लाख लोग पहले ही अपना मतदान कर चुके थे। आपको बता दें कि वर्ष 2022 के पूरे मध्यावधि चुनाव में कुल साढ़े चार करोड़ वोट पड़े थे, यानी इस बार मतदान के दिन से आधिकारिक शुरुआत होने से पहले ही पिछले चुनाव का यह पूरा रिकॉर्ड काफी पीछे छूट चुका है। इतने भारी पैमाने पर शुरुआती मतदान होने से राजनीतिक पंडितों के समीकरण पूरी तरह हिल गए हैं और दोनों ही दलों के नेता अपनी अपनी जीत के बड़े दावे कर रहे हैं।

खतरे से निपटने के लिए ट्रंप ने तैयार की वैकल्पिक रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप को इस राजनीतिक खतरे का पूरा अंदाजा पहले से ही था और यही मुख्य वजह है कि व्हाइट हाउस ने काफी समय पहले से ही एक मजबूत वैकल्पिक रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी थी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने इस बात की पुख्ता तैयारी कर ली है कि यदि डेमोक्रेट्स कांग्रेस के किसी भी सदन पर कब्जा कर लेते हैं तो बिना कांग्रेस की मंजूरी के किन-किन कार्यकारी अधिकारों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा सकता है। इमिग्रेशन, टैरिफ, हाउसिंग और सरकारी खर्च जैसे अहम मुद्दों पर सीधे कार्यकारी आदेशों के जरिए आगे बढ़ने के तमाम विकल्पों पर गहराई से विचार किया जा रहा है।

क्या सिर्फ राष्ट्रपति के आदेशों के दम पर चल पाएगी सरकार

डोनाल्ड ट्रंप ने खुद भी ऐसे स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि ऐसी विपरीत स्थिति पैदा होती है तो वह अमेरिका के सबसे बड़े वीटो पावर यानी मिस्टर वीटो की भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि क्या सिर्फ राष्ट्रपति के एकतरफा आदेशों और हुक्म के दम पर देश की इतनी बड़ी सरकार को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है। आज की रात आने वाले चुनावी नतीजे ही यह तय करेंगे कि अमेरिका का सियासी ऊँट किस करवट बैठता है और क्या दुनिया पर रौब जमाने वाले ट्रंप अपने ही घर में बेबस साबित होंगे या नहीं।