अमेरिकी मिडटर्म चुनाव आज, ट्रंप की नीतियों और रिपब्लिकन पार्टी की अग्निपरीक्षा

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के तहत संसद के दोनों सदनों की सीटों पर मतदान हो रहा है। यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और रिपब्लिकन पार्टी का भविष्य तय करेगा।

अमेरिका में आज लोकतंत्र का एक बड़ा और अहम इम्तिहान हो रहा है, जहां मिडटर्म इलेक्शन के इस मुकाबले में अमेरिकी जनता यह तय करने जा रही है कि संसद के दोनों सदनों में किसका दबदबा रहेगा। यह चुनाव अमेरिकी कांग्रेस पर नियंत्रण के साथ-साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक कड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है और सीनेट से लेकर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स तक हर एक सीट के नतीजे का असर आने वाले दो साल की अमेरिकी राजनीति और वैश्विक भू-राजनीति पर पड़ना पूरी तरह से तय माना जा रहा है।

अमेरिकी कांग्रेस और सदनों का गणित

अमेरिका की संसद यानी कांग्रेस के दो मुख्य सदन हैं और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कुल 435 सीटें हैं, जहां बहुमत का जादुई आंकड़ा 218 सीटों का है। मौजूदा स्थिति यह है कि रिपब्लिकन पार्टी के पास 218 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 214 सीटें मौजूद हैं। दूसरी तरफ, सीनेट में कुल 100 सीटें हैं, जिनमें से इस बार 35 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटों की आवश्यकता होती है। वर्तमान में सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 सीटें हैं, जबकि डेमोक्रेट्स के पास 45 सीटें हैं और 2 सीटें खाली हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सीनेट में बहुमत बनाए रखना बेहद जरूरी है क्योंकि मात्र 4 सीटें कम होने पर राष्ट्रपति ट्रंप अपना बहुमत खो देंगे और अमेरिकी संसद पर उनका नियंत्रण भी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और आरोप

भले ही इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद सीधे तौर पर उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन पूरी चुनावी बहस के केंद्र में वही बने हुए हैं। मतदान से ठीक पहले अपने एक अहम संबोधन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, जैसा कि आप जानते हैं, आज मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले का आखिरी दिन है। मेरा मानना है कि ये हमारी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण मिडटर्म चुनाव हैं और डेमोक्रेट्स ने उम्मीदवारों की ऐसी सूची उतारी है जिसे अमेरिकी इतिहास में सबसे कट्टरपंथी और खतरनाक कहा जा सकता है। ये ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्हें अब तक के सबसे खतरनाक उम्मीदवार बताया गया है। उनकी मुस्लिम ब्रदरहुड वाली सोच है। वो बॉर्डर्स खोल देंगे, खरबों रुपये का टैक्स लगा देंगे, हथियारों पर प्रतिबंध और तेल-प्राकृतिक गैस को खत्म करने की कोशिश करेंगे। साथ ही वो दुनियाभर के शरणार्थियों के लिए अमेरिका के दरवाजे खोल देंगे।

मतदान के आंकड़े और पोलिंग ट्रेंड

मिडटर्म इलेक्शन को अमेरिका में राष्ट्रपति के कार्यकाल के ठीक बीच में जनता की प्रतिक्रिया समझने का एक बहुत बड़ा पैमाना माना जाता है और अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में 5 करोड़ 70 लाख से अधिक लोगों ने पहले ही अर्ली वोटिंग के तहत अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर लिया है। अगर रिपब्लिकन पार्टी दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने में सफल रहती है तो ट्रंप को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत राजनीतिक समर्थन मिलेगा। हालांकि, पोलिंग ट्रेंड में डेमोक्रेट्स काफी आगे दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय जेनेरिक बैलेट में डेमोक्रेट्स लगभग 8 से 10 अंक आगे चल रहे हैं। पोल के अनुसार डेमोक्रेट्स करीब 51 प्रतिशत से 54 प्रतिशत और रिपब्लिकन पार्टी 42 प्रतिशत से 45 प्रतिशत के दायरे में हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत से 38 प्रतिशत फीसदी के बीच दर्ज की जा रही है, जो उनकी घटती लोकप्रियता को दर्शाती है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स को 230 से 243 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है, जबकि सीनेट में भी उनकी पकड़ मजबूत होने की पूरी उम्मीद है।

अमेरिकी मतदाताओं के सामने प्रमुख सवाल

आज अमेरिकी मतदाताओं के सामने केवल यह सवाल नहीं है कि अमेरिका दुनिया में कितनी बड़ी महाशक्ति बना रहता है, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आम अमेरिकी परिवार की जेब में कितनी आर्थिक राहत है।

  • महंगाई और रोजमर्रा की जिंदगी का लगातार बढ़ता हुआ खर्च।
  • पेट्रोल और ऊर्जा की आसमान छूती कीमतें।
  • ट्रंप की टैरिफ यानी आयात शुल्क से जुड़ी नीतियां।
  • अमेरिका की विदेश नीति और ईरान के साथ चल रहा संघर्ष।
  • इमिग्रेशन और देश की सीमा सुरक्षा।
  • रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य सेवाएं और देश की अर्थव्यवस्था।

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की चिंताएं

इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी देश की मौजूदा स्थिति और सुरक्षा पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं और बराक ओबामा ने अपने बयान में कहा, ये जंग कैसी चल रही है… हमारे सहयोगी देशों और सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं। कई अमेरिकी मारे गए हैं और सैकड़ों अमेरिकी घायल हुए हैं। हमारी मिसाइलों का भंडार भी कम हो गया है, जिससे हम पर हमले का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है और वहीं अब होर्मुज़ की खाड़ी से तेल की आवाजाही पर ईरान का ऐसा नियंत्रण हो गया है कि वो इसे रोक भी सकता है। इसी रास्ते से दुनिया के कई देशों तक तेल पहुंचता है। इन तमाम परिस्थितियों के बीच यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिकी जनता व्हाइट हाउस के साथ खड़ी होती है या फिर कांग्रेस के जरिए देश में सत्ता के संतुलन को पूरी तरह से बदल देती है।