इंडोनेशिया में राष्ट्रपति का फोन टैप करने के आरोप में तीन पुलिस जनरल गिरफ्तार

इंडोनेशिया में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अन्य प्रमुख हस्तियों के अवैध फोन टैपिंग मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस जनरलों को गिरफ्तार किया गया है।

इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां देश के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और कई अन्य प्रमुख हस्तियों की अवैध फोन टैपिंग करने के गंभीर आरोप में तीन वरिष्ठ पुलिस जनरलों को हिरासत में लिया गया है। इस सनसनीखेज घटना की आधिकारिक जानकारी इंडोनेशियाई पुलिस ने मंगलवार को दी। राष्ट्रीय पुलिस की आपराधिक जांच एजेंसी के प्रमुख असेप सफरुद्दीन ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि इन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों पर बिना किसी कानूनी अनुमति के संचार माध्यमों को इंटरसेप्ट करने, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाने और मामले से जुड़े डिजिटल डेटा को मिटाने के गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं।

पुलिस से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस मामले में जिन बड़े अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है, उनमें राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल लिस्त्यो सिगित प्रबोवो, राष्ट्रीय पुलिस के कानूनी विभाग के प्रमुख इंस्पेक्टर जनरल अहरी सोंटा नसुशन और राष्ट्रीय पुलिस के शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के वरिष्ठ प्रशिक्षक इंस्पेक्टर जनरल एको हादी संतुसो शामिल हैं। इन तीनों आरोपियों को फिलहाल राष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय के विशेष हिरासत केंद्र में रखा गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।

जकार्ता स्थित राष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आपराधिक जांच एजेंसी के प्रमुख असेप सफरुद्दीन ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इन आरोपियों ने देश के सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति, कई प्रमुख सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं, मीडिया की जानी-मानी हस्तियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, गैर-सरकारी संगठनों यानी एनजीओ के कार्यकर्ताओं और देश के जाने-माने कारोबारियों के फोन नंबरों की पूरी तरह से अवैध और अनधिकृत निगरानी की थी।

पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह अवैध फोन टैपिंग और जासूसी की गतिविधियां मुख्य रूप से वर्ष 2025 से वर्ष 2026 के बीच अंजाम दी गईं। इन गतिविधियों को अंजाम देते समय वर्ष 2010 के राष्ट्रीय पुलिस नियमों के तहत निर्धारित की गई किसी भी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। इस संबंध में जांचकर्ताओं ने बताया कि कई संवेदनशील फोन नंबरों को बिना किसी उचित और वैध सत्यापन के लॉफुल इंटरसेप्शन मैनेजमेंट सिस्टम यानी एलआईएमएस में दर्ज कर दिया गया था।

मामले में सबूतों को मिटाने की साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है और जांच एजेंसियों का आरोप है कि हाल ही में इन आरोपियों ने लॉफुल इंटरसेप्शन मैनेजमेंट सिस्टम से इंटरसेप्ट की गई बातचीत से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों को भी हटाने के स्पष्ट आदेश दिए थे, ताकि उनकी इन कथित अवैध गतिविधियों के सभी सबूतों को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस अब तक कुल 10 गवाहों और 3 प्रमुख विशेषज्ञों से आमने-सामने पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा जांच के दौरान पुलिस ने 11 मोबाइल फोन, एक आईपैड और 4 पेन ड्राइव भी बरामद कर जब्त किए हैं।

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर देश के राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इंडोनेशिया के कानून, मानवाधिकार, आव्रजन और सुधार मंत्री युसरिल इहजा महेंद्र ने एक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि शुरुआती जांच में फिलहाल इन तीनों सक्रिय वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ राजद्रोह का कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संकेत नहीं मिला है। उन्होंने मीडिया को बताया कि इन आरोपियों पर इंडोनेशिया की नई आपराधिक संहिता की धारा 258 के तहत औपचारिक मुकदमा चलाया जाएगा। यह विशेष धारा किसी भी निजी इलेक्ट्रॉनिक संचार को गैर-कानूनी तरीके से इंटरसेप्ट करने, उसे रिकॉर्ड करने, उसमें फेरबदल करने या उसकी निगरानी करने से पूरी तरह संबंधित है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इंडोनेशिया की नई आपराधिक संहिता की धारा 258 के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। इसके अलावा इन आरोपियों पर आपराधिक संहिता की अन्य गंभीर धाराओं जैसे धारा 332 और इलेक्ट्रॉनिक सूचना एवं लेन-देन कानून की धारा 32 के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इन अन्य धाराओं में क्रमशः 6 साल और 8 साल तक की कैद का स्पष्ट प्रावधान किया गया है, जिससे इन जनरलों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी समयावधि के आसपास इंडोनेशिया में महज 24 घंटे के भीतर कई बड़े भूकंप के झटके भी महसूस किए गए थे, जिससे देश में प्रशासनिक और प्राकृतिक दोनों मोर्चों पर तनाव का माहौल बना हुआ था।