सोमवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने आधिकारिक तौर पर भारत में अपना पदभार ग्रहण किया। इस नियुक्ति को दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। राजदूत गोर की यह भूमिका ऐसे समय में शुरू हुई है जब भारत और अमेरिका विभिन्न वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर गहन सहयोग कर रहे हैं। अपने पहले संबोधन में, उन्होंने भारत के साथ अमेरिका के संबंधों की अद्वितीय प्रकृति पर जोर दिया, यह स्पष्ट करते हुए कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए भारत से अधिक महत्वपूर्ण कोई अन्य देश नहीं है। यह बयान दोनों राष्ट्रों के बीच गहरे होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को रेखांकित करता है।
ट्रेड डील पर कल होगी महत्वपूर्ण चर्चा
राजदूत गोर ने भारत और अमेरिका के बीच लंबित ट्रेड डील के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को लेकर कल, यानी मंगलवार को दोनों देशों के उच्चाधिकारियों के बीच फोन पर विस्तृत बातचीत होने वाली है। यह चर्चा दोनों पक्षों के लिए व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और आर्थिक। सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गोर ने स्वीकार किया कि भारत जैसे विशाल और विविध देश के साथ व्यापार समझौता करना एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
ट्रम्प और मोदी की दोस्ती: एक सच्चा संबंध
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के व्यक्तिगत संबंधों की गहराई पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस दोस्ती को "असली" और "सच्चा" बताया, जो कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक दुर्लभ और मूल्यवान पहलू है। गोर ने इस बात पर जोर दिया कि सच्चे दोस्त कभी-कभी असहमत हो सकते। हैं, लेकिन अंततः वे हमेशा अपने मतभेदों को सुलझाने का रास्ता खोज लेते हैं। यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच अतीत में कुछ मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद उनके मजबूत बंधन को दर्शाती है। राजदूत ने यह भी उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले एक से दो साल के भीतर भारत का दौरा कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
भारत: दुनिया का सबसे पुराना और सबसे बड़ा लोकतंत्र का संगम
अपने पहले सार्वजनिक संबोधन की शुरुआत में, राजदूत गोर ने पारंपरिक भारतीय अभिवादन 'नमस्ते' का प्रयोग किया, जो भारत की संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है और उन्होंने भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में सेवा करने को अपने लिए "गर्व की बात" बताया। गोर ने भारत को एक "असाधारण राष्ट्र" के रूप में वर्णित किया और यहां काम करने को एक "सम्मान" के रूप में देखा। उन्होंने भारत और अमेरिका के संबंधों को "दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र। का संगम" कहकर परिभाषित किया, जो दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों को उजागर करता है।
व्यापार से परे: सहयोग के व्यापक क्षेत्र
राजदूत गोर ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग केवल व्यापारिक संबंधों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी फैला हुआ है। उन्होंने बताया कि दोनों देश सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयासों, ऊर्जा क्षेत्र, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी,। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण डोमेन में मिलकर काम कर रहे हैं। यह व्यापक सहयोग दोनों देशों के बीच एक बहुआयामी साझेदारी को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता, समृद्धि और नवाचार को बढ़ावा देना है। यह साझेदारी केवल आर्थिक लाभों से परे जाकर साझा चुनौतियों का। समाधान करने और साझा अवसरों का लाभ उठाने पर केंद्रित है।
गोर की नियुक्ति: ट्रम्प की वफादारी का प्रतिफल
सर्जियो गोर को भारत का राजदूत नियुक्त करने में राष्ट्रपति ट्रम्प को लगभग सात महीने का समय लगा, जो जनवरी 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद से उनकी नियुक्तियों में एक उल्लेखनीय देरी थी। ट्रम्प ने अगस्त 2025 में गोर को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना। गोर को राष्ट्रपति ट्रम्प के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है और वे उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के कट्टर समर्थक हैं। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रम्प के लिए धन जुटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिससे ट्रम्प के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। यह नियुक्ति ट्रम्प प्रशासन में वफादारी के महत्व को दर्शाती है।
ट्रम्प जूनियर के साथ साझेदारी और 'विनिंग टीम पब्लिशिंग'
सर्जियो गोर का राष्ट्रपति ट्रम्प के परिवार के साथ भी गहरा। संबंध है; वे ट्रम्प के बेटे ट्रम्प जूनियर के करीबी दोस्त हैं। दोनों ने मिलकर 'विनिंग टीम पब्लिशिंग' नामक एक प्रकाशन कंपनी की स्थापना की थी और यह कंपनी राष्ट्रपति ट्रम्प की पुस्तकों के प्रकाशन का कार्य करती है। इस कंपनी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें अपनी उच्च कीमतों के लिए जानी जाती हैं, जिसमें सबसे सस्ती किताब की कीमत भी लगभग 6500 रुपए है। इस कंपनी के माध्यम से ट्रम्प ने अब तक तीन किताबें प्रकाशित करवाई हैं। इनमें से एक किताब में उनकी वह प्रसिद्ध तस्वीर भी शामिल है, जिसमें पेनसिल्वेनिया में एक रैली के दौरान उन पर हुए जानलेवा हमले के बाद खून से लथपथ हालत में उन्होंने मुट्ठी बांधकर ताकत दिखाने वाला पोज दिया था और यह घटना ट्रम्प की दृढ़ता और उनके समर्थकों के बीच उनकी छवि को दर्शाती है।
व्हाइट हाउस में गोर की पर्दे के पीछे की शक्ति
सर्जियो गोर को व्हाइट हाउस में नियुक्तियों की जांच-परख में भी शामिल किया गया था, जिससे। उन्हें ट्रम्प प्रशासन में पर्दे के पीछे की सबसे शक्तिशाली शख्सियतों में से एक माना जाता है। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद, ट्रम्प ने गोर को प्रेसिडेंसियल पर्सनल ऑफिस का डायरेक्टर नियुक्त किया, जो एक अत्यंत प्रभावशाली पद है। यह पद सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर आने वाले व्यक्तियों का निर्धारण करता है। इस बार, ट्रम्प ने ऐसे व्यक्तियों को चुनने पर विशेष ध्यान दिया जो उनके प्रति पूर्ण निष्ठा रखते हों। पिछले कार्यकाल में, ट्रम्प की टीम में कुछ ऐसे लोग शामिल हो गए थे जिन्हें वे वफादार नहीं मानते थे, और इसे बाद में उनकी सबसे बड़ी गलती के रूप में देखा गया। इस बार, ट्रम्प ने यह गलती नहीं दोहराई और अपनी टीम के लिए आवश्यक पदों पर नियुक्तियों के लिए सर्जियो गोर को चुना, जिन्हें उनके 'दाएं हाथ' के रूप में जाना जाता है।
एलोन मस्क के साथ विवाद और नासा नियुक्ति का मामला
मार्च 2025 में, व्हाइट हाउस की एक कैबिनेट मीटिंग के दौरान सर्जियो गोर और टेस्ला के सीईओ एलोन मस्क के बीच तीखी बहस हो गई थी। मस्क ने गोर द्वारा व्हाइट हाउस में लोगों को नौकरी पर लाने के तरीके पर आपत्ति जताई थी। इस पर गोर नाराज हो गए और उन्होंने गुस्से में मस्क से बदला लेने की धमकी दी और इसके बाद, मस्क ने स्पष्ट कर दिया कि वे गोर के साथ व्हाइट हाउस में काम नहीं करेंगे। 30 मई को, मस्क ने अपने बनाए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) से इस्तीफा दे दिया। इसके दो दिन बाद, गोर सीधे ट्रम्प के पास गए और उन्हें बताया कि मस्क के करीबी कारोबारी जैरेड इसाकमैन ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं और संगठनों को पैसे दिए हैं और गोर ने ट्रम्प से कहा कि इसाकमैन भरोसेमंद नहीं हैं और उन्हें नासा का प्रमुख नहीं बनाया जाना चाहिए। गोर की बात सुनकर ट्रम्प ने उसी दिन मस्क से इस मुद्दे पर बात की और अगले ही दिन इसाकमैन का नाम नासा प्रमुख के पद से वापस ले लिया और इस घटना से मस्क की नाराजगी और बढ़ गई, उन्हें लगा कि गोर ने उनके खिलाफ चाल चली है और ट्रम्प ने भी उनकी राय को नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद मस्क ने एक्स पर गोर को "एक सांप" बताया।
जन्मस्थान को लेकर विवाद: ताशकंद से माल्टा तक का सफर
सर्जियो गोर पहली बार अमेरिकी राजनीति और मीडिया में 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान। के दौरान चर्चा में आए थे, जब ट्रम्प ने उन्हें अपना कैंपेन एडवाइजर बनाया था। बाद में वे ट्रम्प के पर्सनल चीफ बने। उनकी मुख्य जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना था कि यदि ट्रम्प चुनाव जीतते हैं, तो नए प्रशासन में किसे नियुक्त किया जाए और हजारों पदों के लिए नामों का चयन करना तथा उनकी ट्रम्प के प्रति निष्ठा की जांच करना। जैसे ही गोर को यह जिम्मेदारी मिली, अमेरिकी और यूरोपीय मीडिया ने उनकी 'जन्मकुंडली' खंगालनी शुरू की। तब पता चला कि उनका असली नाम सर्जियो गोरोखोव्सकी है और उनका जन्म 1986। में ताशकंद, उज्बेकिस्तान में हुआ था, जो उस समय सोवियत संघ का हिस्सा था। यह बात हैरान करने वाली थी क्योंकि गोर हमेशा दावा करते। आए थे कि वे माल्टा (एक यूरोपीय देश) में जन्मे हैं। जब इस मामले ने तूल पकड़ा, तो माल्टा सरकार खुद हरकत में आई। और कहा कि उनके पास गोर के जन्म का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसके बाद गोर के जन्म से जुड़े ताशकंद वाले रिकॉर्ड सामने आ गए। तब गोर ने पहली बार स्वीकार किया कि वे माल्टा में पैदा नहीं हुए थे। उनके वकील रॉबर्ट गार्सन ने मीडिया को बताया कि सर्जियो गोर का जन्म ताशकंद में हुआ था, लेकिन वे कुछ ही समय बाद माल्टा आ गए थे और उनकी पढ़ाई वहीं से हुई थी, इसलिए वे अपनी पहचान माल्टा से बताते हैं। यह विवाद उनकी सार्वजनिक छवि का एक महत्वपूर्ण पहलू बन गया था।
भारत-अमेरिका संबंधों की नई दिशा
राजदूत सर्जियो गोर की भारत में नियुक्ति और उनके प्रारंभिक बयान भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देते हैं। उनके अनुभव, ट्रम्प प्रशासन में उनकी गहरी पैठ और भारत के प्रति उनकी व्यक्त प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यापार, सुरक्षा, और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के साथ-साथ, व्यक्तिगत संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर देना इस रिश्ते को और गहरा करेगा।