संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब लोकसभा में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार हो गए हैं। विपक्षी दल पिछले कई दिनों से इस मामले पर गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहे थे, जिसके कारण सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही थी। लोकसभा अध्यक्ष जल्द ही वह समय निर्धारित करेंगे जब गृह मंत्री सदन के पटल पर अपनी बात रखेंगे। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रहा है और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है।
चर्चा के लिए तैयार है सरकार: किरेन रिजिजू
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को विपक्षी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वह छात्र आंदोलन और उससे जुड़ी तमाम परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने विपक्ष से अनुरोध किया कि जब सरकार चर्चा के लिए आगे आ रही है, तो उन्हें डरना और भागना नहीं चाहिए। रिजिजू ने इस बात पर जोर दिया कि चर्चा के दौरान विपक्ष को हंगामा नहीं करना चाहिए और गृह मंत्री के जवाब को शांतिपूर्वक सुनना चाहिए और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर कुछ आंतरिक मतभेद भी हो सकते हैं, जो सदन की कार्यवाही में बाधा बन रहे हैं।
विपक्ष का कड़ा रुख और मल्लिकार्जुन खरगे का बयान
इससे पहले, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गृह मंत्री के बयान की मांग को दोहराते हुए सरकार पर तीखा हमला बोला और उन्होंने कहा कि पिछले 17 दिनों से विपक्ष लगातार यह कोशिश कर रहा है कि अमित शाह सदन में आएं और छात्रों के साथ हुए अन्याय पर अपनी बात रखें। खरगे ने सवाल उठाया कि सरकार सदन की अनदेखी क्यों कर रही है। उन्होंने इसे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का अपमान करार दिया। खरगे ने राज्यसभा के स्थगन पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि सरकार चर्चा से भाग रही है क्योंकि उनके पास विपक्ष के सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है। उन्होंने सदन न चल पाने के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराया।
महत्वपूर्ण विधेयकों पर अनिश्चितता के बादल
मानसून सत्र के अब केवल 4 कार्य दिवस ही शेष बचे हैं। संसद में जारी इस गतिरोध की वजह से कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य अटके हुए हैं और महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी एफसीआरए (FCRA) से जुड़े अहम बिलों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। सोमवार की लोकसभा कार्यसूची में इनमें से एक भी बिल शामिल नहीं किया गया था, जो सदन की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है। सरकार इस गतिरोध को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। पिछले हफ्ते सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के लिए अपने सहयोगी दलों और विपक्ष का समर्थन हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस सिलसिले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से 2 बार मुलाकात की है और उनसे फोन पर भी बातचीत की है, ताकि सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाया जा सके।
