अनंत सिंह: दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली जमानत, मोकामा विधायक की रिहाई।

मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में कोर्ट से जमानत मिल गई है। चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस हत्या के मामले में वह पटना की बेउर जेल में बंद थे। जेल में रहते हुए ही उन्होंने विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी।

बिहार की राजनीति के चर्चित चेहरे और मोकामा विधानसभा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक अनंत सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है और पटना की एक अदालत ने उन्हें दुलारचंद यादव हत्याकांड के मामले में जमानत दे दी है। अनंत सिंह पिछले काफी समय से पटना की बेउर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद थे। इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है और माना जा रहा है कि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद वे जल्द ही जेल से बाहर आ जाएंगे।

अनंत सिंह पर आरोप था कि पिछले साल नवंबर में बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मोकामा के टाल क्षेत्र में हुई दुलारचंद यादव की हत्या में उनकी भूमिका थी। दुलारचंद यादव प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता थे और चुनाव के दौरान अपनी पार्टी के प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहे थे। इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था और चुनावी माहौल पर गहरा असर डाला था, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था।

दुलारचंद यादव हत्याकांड की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई

यह मामला नवंबर 2023 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान का है। मोकामा विधानसभा क्षेत्र के टाल इलाके में चुनावी सरगर्मी चरम पर थी। इसी दौरान जनसुराज पार्टी के कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दुलारचंद यादव इलाके में एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। हत्या के बाद इलाके में तनाव फैल गया था और विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला था। पुलिस जांच में अनंत सिंह का नाम सामने आने के बाद उन्हें मतदान से ठीक पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने इस मामले में कई अन्य लोगों को भी नामजद किया था और साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया था।

जेल की सलाखों के पीछे से चुनावी जीत का इतिहास

अनंत सिंह की राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने जेल में रहते हुए ही मोकामा विधानसभा सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, जदयू उम्मीदवार के रूप में अनंत सिंह ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी वीणा सिंह को 28,206 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। वीणा सिंह बाहुबली नेता सूरजभान सिंह की पत्नी हैं, जिससे यह मुकाबला काफी दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल हो गया था। चुनाव परिणामों में अनंत सिंह को कुल 91,416 वोट प्राप्त हुए, जबकि वीणा देवी को 63,210 वोटों से संतोष करना पड़ा। यह जीत उनके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाती है, जो जेल में रहने के बावजूद कम नहीं हुआ।

न्यायालय में जमानत की प्रक्रिया और कानूनी दलीलें

अनंत सिंह के अधिवक्ताओं ने अदालत में दलील दी कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के कारण इस मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं है। लंबी सुनवाई के बाद, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अनंत सिंह को जमानत देने का आदेश जारी किया। जमानत मिलने के बाद अब बेउर जेल प्रशासन को अदालत का आदेश भेजा जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत अनिवार्य नहीं है, तो वे गुरुवार शाम या शुक्रवार तक जेल से बाहर आ सकते हैं।

मोकामा की राजनीति और अनंत सिंह का प्रभाव

मोकामा विधानसभा क्षेत्र दशकों से अनंत सिंह का गढ़ रहा है। उन्हें स्थानीय स्तर पर 'छोटे सरकार' के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र में उनका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव इतना गहरा है कि वे विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर या निर्दलीय भी चुनाव जीतते रहे हैं और दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी गिरफ्तारी के बाद मोकामा की राजनीति में एक शून्यता की स्थिति देखी जा रही थी, लेकिन उनकी चुनावी जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनका जनाधार अभी भी मजबूत है। जमानत मिलने के बाद उनके निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर तेज होने की संभावना है।

रिहाई की प्रक्रिया और वर्तमान सुरक्षा स्थिति

अदालत से जमानत मिलने के बाद अब बेल बॉन्ड भरने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पटना की बेउर जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, क्योंकि बड़ी संख्या में समर्थकों के वहां जुटने की संभावना है और जेल प्रशासन के अनुसार, जैसे ही अदालत का आधिकारिक आदेश (रिलीज वारंट) प्राप्त होगा, रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अनंत सिंह के समर्थकों ने उनके स्वागत के लिए मोकामा और पटना में तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि रिहाई के दौरान कानून-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो।