राम मंदिर दान विवाद: 3 किलो का चांदी का दीपक और 200 किलो चांदी गायब होने का दावा

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। दानदाताओं ने दावा किया है कि उनके द्वारा दिए गए करोड़ों रुपये के चांदी के आभूषण और ईंटें अब मंदिर में दिखाई नहीं दे रहे हैं। एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था और उनके द्वारा किए गए दान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है और प्रभु राम के मंदिर में देश-दुनिया के करोड़ों लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार नकद राशि, सोना, चांदी और बहुमूल्य जेवर दान किए हैं। हालांकि, हाल ही में मंदिर में हुई चोरी की वारदात ने इन सभी दानदाताओं के मन में गहरी चिंता पैदा कर दी है और इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया गया है जो पूरे मामले की तहकीकात कर रहा है। वर्तमान में जांच का मुख्य केंद्र चढ़ावे में आए पैसे की चोरी है, लेकिन अब भक्तों ने उन आभूषणों और कीमती वस्तुओं पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है जो उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में रामलला को अर्पित किए थे।

3 किलो चांदी के दीपक का रहस्य

इस विवाद में सबसे प्रमुख नाम अनुराग रस्तोगी का सामने आया है, जो इंडियन बुलियन ऐंड जूलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड हैं। अनुराग रस्तोगी ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए बताया कि उन्होंने 7 जुलाई 2020 को राम मंदिर में 3 किलो वजन का एक चांदी का दीपक दान किया था। यह दीपक अखंड ज्योति के लिए दिया गया था। उस समय भगवान राम टेंट से निकलकर एक अस्थाई मंदिर में विराजमान थे। अनुराग के अनुसार, उस समय उस चांदी के दीपक की कीमत लगभग 175000 रुपये यानी एक लाख 75000 रुपये थी, जो आज के बाजार भाव के हिसाब से लगभग 1000000 रुपये यानी 10 लाख रुपये हो चुकी है।

अनुराग रस्तोगी ने बताया कि उन्होंने न केवल स्वयं दान दिया, बल्कि अपने व्यापारिक समुदाय के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया। दो अलग-अलग किस्तों में कुल मिलाकर 40 किलो से अधिक चांदी एकत्र की गई और उसे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को सौंपा गया। अनुराग का कहना है कि उन्हें इस दान की बाकायदा रसीद भी मिली थी और कुछ समय तक उन्होंने उस दीपक को अस्थाई मंदिर में जलते हुए भी देखा था। लेकिन जब से भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है, उन्हें वह दीपक कहीं दिखाई नहीं दिया। एसोसिएशन द्वारा दी गई 40 किलो चांदी की कीमत उस समय करीब 2100000 रुपये यानी 21 लाख रुपये थी, जो आज बढ़कर 12000000 रुपये यानी 1 करोड़ 20 लाख रुपये के करीब पहुंच गई है। चोरी की खबरों के बाद अब अनुराग और उनके साथी यह जानने को उत्सुक हैं कि उनकी दी हुई चांदी सुरक्षित है या नहीं।

सिंधी समाज की 200 किलो चांदी की ईंटें

दान के गायब होने का यह मामला केवल एक दीपक तक सीमित नहीं है। मुंबई के रहने वाले और सिंधी समाज के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट राजू मनवानी ने भी एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में फैले सिंधी समाज के लोगों ने मिलकर राम मंदिर के लिए 200 किलो चांदी दान की थी। यह दान 200 चांदी की ईंटों के रूप में था। राजू मनवानी ने इन ईंटों को 26 जनवरी 2021 को अयोध्या में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को सौंपा था। इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद हैं।

राजू मनवानी ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि भगवान के दरबार में भी चोरी जैसी घटना हो सकती है। इसी अटूट विश्वास के कारण उन्होंने ट्रस्ट से कोई रसीद नहीं मांगी और न ही उन्हें कोई रसीद दी गई। अब जिन लोगों ने श्रद्धा के साथ ये चांदी की ईंटें दी थीं, वे राजू मनवानी से सवाल कर रहे हैं कि आखिर उनके चढ़ावे का क्या हुआ। भक्तों का कहना है कि भूमि पूजन से लेकर अब तक किसी ने चांदी की खड़ाऊं दी तो किसी ने सोने के गहने, लेकिन अब इन सभी वस्तुओं का कोई हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं होने से संदेह की स्थिति पैदा हो गई है।

एसआईटी जांच और भक्तों की मांग

फिलहाल एसआईटी की टीम मंदिर में हुए वित्तीय गबन और चोरी की जांच कर रही है। लेकिन भक्तों की मांग है कि जांच का दायरा बढ़ाया जाए और मंदिर को मिले सभी आभूषणों और कीमती धातुओं का एक विस्तृत ऑडिट किया जाए और राम मंदिर ट्रस्ट के सामने अब यह बड़ी चुनौती है कि वह भक्तों के भरोसे को बनाए रखे और यह स्पष्ट करे कि दान में मिली हर एक वस्तु सुरक्षित है। जब तक इन कीमती वस्तुओं की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक दानदाताओं के मन में उठ रहे ये सवाल शांत होने वाले नहीं हैं।