भवानीपुर चुनाव परिणाम: कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, सुरक्षित रखें सीसीटीवी फुटेज

कलकत्ता हाई कोर्ट ने भवानीपुर चुनाव मामले में मतगणना केंद्र के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। ममता बनर्जी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़े भवानीपुर चुनाव मामले में एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि मतगणना केंद्र के सभी सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें किसी भी स्थिति में डिलीट न किया जाए और यह फैसला ममता बनर्जी द्वारा दायर उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने चुनाव परिणामों को चुनौती देते हुए मतगणना के दौरान धांधली का गंभीर आरोप लगाया था। न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साक्ष्यों की सुरक्षा पर जोर दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए दो महीने बाद की तारीख तय की है।

चुनाव परिणाम और कानूनी चुनौती का आधार

ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में अपनी हार को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। ज्ञात हो कि इस चुनाव में वह भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से 15105 वोटों के अंतर से हार गई थीं। इस परिणाम के बाद, उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि मतगणना के शुरुआती चरणों में स्थिति सामान्य थी और 12 राउंड की गिनती पूरी होने तक ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए थीं। हालांकि, इसके बाद के राउंड में अचानक आए बदलावों ने चुनाव के नतीजों को पूरी तरह बदल दिया, जिसे याचिकाकर्ता ने संदिग्ध बताया है।

वकील कल्याण बनर्जी की प्रमुख दलीलें

ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति से अनुरोध किया कि इस मामले में जल्द से जल्द आदेश जारी किया जाए ताकि मामले का शीघ्र निपटारा हो सके। कल्याण बनर्जी ने मतगणना के दिन की घटनाओं का विवरण देते हुए कहा कि 12वें दौर तक सब कुछ ठीक चल रहा था और ममता बनर्जी आगे चल रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि 13वें दौर से स्थिति असामान्य रूप से बदल गई। वकील का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस के एजेंटों की पिटाई की गई और उन्हें मतगणना केंद्र से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय बलों ने भाजपा एजेंटों की सक्रिय रूप से मदद की थी और यह सारा रिकॉर्ड सीसीटीवी कैमरों में दर्ज है।

रिटर्निंग ऑफिसर और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

याचिका में चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि भवानीपुर के रिटर्निंग ऑफिसर वही व्यक्ति थे जो नंदीग्राम चुनाव के दौरान भी अधिकारी थे, और आपत्तियों के बावजूद उन्हें इस पद पर बनाए रखा गया। उन्होंने अदालत को बताया कि बाद में इस अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव का पद दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य के तत्कालीन मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मुख्य सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। इन तथ्यों को अदालत के सामने रखते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह व्यक्त किया गया।

एजेंटों के साथ मारपीट और साक्ष्यों की सुरक्षा

अदालत को बताया गया कि मतगणना के दौरान सूर्यनील और ममता बनर्जी के एक अन्य एजेंट के साथ मारपीट की गई थी और कल्याण बनर्जी का दावा है कि जनरल ऑब्जर्वर को सूचित करने और बुलाने के बावजूद उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी आधार पर ममता बनर्जी के वकील ने अंतरिम आदेश की मांग की और सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ ईवीएम को भी सुरक्षित रखने का अनुरोध किया और उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि समाज में यह धारणा बनी हुई है कि ऐसे चुनावी मामले लंबे समय तक लटके रहते हैं और कभी सुलझते नहीं हैं, इस सोच को बदलने की जरूरत है। न्यायमूर्ति गौरांग कांत ने इन दलीलों को सुनने के बाद सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश देकर मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है।