भारत के अमीर परिवारों की ताकत हर दिन 4076 करोड़ की कमाई अंबानी अडानी टॉप पर

2026 बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 300 सबसे मूल्यवान पारिवारिक व्यवसायों की कुल वैल्यू 138 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इन व्यवसायों ने पिछले दो वर्षों में हर दिन 4076 करोड़ रुपये की संपत्ति जोड़ी है। अंबानी परिवार सबसे अमीर है जबकि पहली पीढ़ी के कारोबारियों में अडानी परिवार शीर्ष पर है।

भारत के बड़े बिजनेस घरानों की संपत्ति में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। 2026 बार्कलेज प्राइवेट क्लाइंट्स हुरुन इंडिया मोस्ट वैल्यूएबल फैमिली बिजनेस लिस्ट के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत के टॉप 300 फैमिली बिजनेस ने पिछले दो वर्षों में हर दिन 4076 करोड़ रुपये की वैल्यू जोड़ी है। इस भारी बढ़ोतरी के साथ ही इन 300 सबसे मूल्यवान पारिवारिक कारोबारियों की कुल वैल्यू अब 138 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। अगर इसे वैश्विक स्तर पर देखें तो यह कुल वैल्यू दुनिया की 18वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी के बराबर मानी जा रही है। यह आंकड़ा नीदरलैंड, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और पोलैंड जैसे विकसित देशों की अर्थव्यवस्था से भी कहीं अधिक है। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 के एडिशन के बाद से इन व्यवसायों की संयुक्त दौलत में 27 और 5 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है जबकि इसी दौरान शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में 3 और 7 प्रतिशत और निफ्टी में 1 और 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।

अंबानी परिवार का दबदबा बरकरार

देश के सबसे अमीर बिजनेस घरानों की सूची में अंबानी परिवार अभी भी शीर्ष पर बना हुआ है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की सफलता के कारण इस परिवार की कुल वैल्यूएशन 25 लाख करोड़ और 82 पैसे है। हालांकि पिछले एक साल के दौरान इनकी वैल्यू में 8 और 5 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है लेकिन इसके बावजूद अंबानी परिवार बाकी सभी से काफी आगे है। दूसरे स्थान पर कुमार मंगलम बिड़ला का परिवार है जिसकी कुल वैल्यू 8 लाख करोड़ और 14 पैसे आंकी गई है। बिड़ला परिवार की वैल्यू में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन यह अभी भी अंबानी परिवार की वैल्यू के एक तिहाई से भी कम है। वहीं जिंदल परिवार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया है। जिंदल परिवार की वैल्यू 40 प्रतिशत बढ़कर 8 लाख करोड़ और 2 पैसे हो गई है।

टॉप 10 परिवारों की ताकत और संपत्ति का गणित

रिपोर्ट के अनुसार भारत के टॉप तीन परिवारों यानी अंबानी, बिड़ला और जिंदल की कुल वैल्यू लगभग 42 लाख करोड़ रुपये है जो भारत के कुल लिस्टेड मार्केट कैपिटलाइजेशन का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा है। सूची में चौथे स्थान पर बजाज परिवार है जिसकी वैल्यू 7 लाख करोड़ और 70 पैसे है हालांकि इनकी वैल्यू में 3 और 9 प्रतिशत की गिरावट आई है। महिंद्रा परिवार 5 लाख करोड़ और 15 पैसे की वैल्यू के साथ पांचवें स्थान पर है जिसमें 5 और 4 प्रतिशत की कमी देखी गई है। अनिल अग्रवाल परिवार इस सूची में सबसे ज्यादा बढ़त हासिल करने वालों में से एक रहा है। वेदांता के पांच अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंटवारे के बाद अग्रवाल परिवार की वैल्यू 75 प्रतिशत बढ़कर 4 लाख करोड़ और 45 पैसे हो गई है। पिछले तीन सालों में इस परिवार की संपत्ति में 212 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई है। टॉप 10 परिवारों की कुल वैल्यू पूरी 300 परिवारों की लिस्ट की कुल वैल्यू का 51 प्रतिशत है।

पहली पीढ़ी के उद्यमियों का उदय

इस साल की रिपोर्ट में पहली पीढ़ी के 100 पारिवारिक व्यवसायों की अलग से रैंकिंग की गई है जिनकी कुल वैल्यू 77 लाख करोड़ और 80 पैसे है। जब दोनों सूचियों को मिलाया जाता है तो कुल 400 परिवारों की वैल्यू 215 लाख करोड़ और 80 पैसे हो जाती है। पहली पीढ़ी वाली कैटेगरी में अडानी परिवार सबसे आगे है जिसकी वैल्यू 19 लाख करोड़ और 60 पैसे है। इसके बाद सुनील भारती मित्तल का परिवार 12 लाख करोड़ और 10 पैसे के साथ दूसरे नंबर पर और सन फार्मा के दिलीप सांघवी का परिवार 4 लाख करोड़ और 55 पैसे के साथ तीसरे नंबर पर है। सीरम इंस्टीट्यूट का पूनावाला परिवार 2 लाख करोड़ और 98 पैसे के साथ चौथे और एवेन्यू सुपरमार्ट्स का दमानी परिवार 2 लाख करोड़ और 86 पैसे के साथ पांचवें स्थान पर है। अरबपति परिवारों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है और अब 230 परिवारों की कुल संपत्ति 1 बिलियन डॉलर से ज्यादा है जो पिछले साल की तुलना में 48 प्रतिशत अधिक है।

रोजगार और टैक्स में बड़ा योगदान

ये 300 परिवार न केवल संपत्ति बना रहे हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती भी दे रहे हैं। ये परिवार मिलकर 54 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। इनका कुल रेवेन्यू लगभग 56 लाख करोड़ रुपये है और ये 5 लाख करोड़ और 60 पैसे का शुद्ध मुनाफा कमाते हैं। टैक्स के मोर्चे पर भी इनका योगदान सराहनीय है क्योंकि इन्होंने लगभग 1 लाख करोड़ और 90 पैसे का टैक्स चुकाया है जो भारत के कुल कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन का लगभग 17 प्रतिशत है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि अब फैमिली ऑफिस का चलन बढ़ रहा है। टॉप 300 परिवारों में से 79 परिवार फैमिली ऑफिस चलाते हैं जबकि पहली पीढ़ी के 36 प्रतिशत परिवारों ने भी ऐसे स्ट्रक्चर बना लिए हैं।

मुंबई बना बिजनेस का केंद्र और उभरते क्षेत्र

मुंबई अभी भी पारिवारिक कारोबारी घरानों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है जहां 95 कंपनियों के मुख्यालय हैं। इसके बाद एनसीआर में 58 और कोलकाता में 26 कंपनियां हैं। हालांकि हैदराबाद पहली पीढ़ी की कंपनियों के लिए एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। उद्योगों की बात करें तो इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेक्टर से सबसे ज्यादा 47 कंपनियां लिस्ट में शामिल हैं। ऑटोमोबाइल और केमिकल्स सेक्टर से 31-31 कंपनियां हैं। मेटल्स और माइनिंग सेक्टर की औसत वैल्यू सबसे ज्यादा 84019 करोड़ रुपये है। पहली पीढ़ी के बिजनेस में फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर सबसे अहम है जिसकी 22 कंपनियां लिस्ट में हैं और उनकी औसत वैल्यू 74218 करोड़ रुपये है।

तेजी से बढ़ने वाले और पिछड़ने वाले परिवार

शाही एक्सपोर्ट्स के आहूजा परिवार ने पिछले तीन सालों में अपनी वैल्यू में 352 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है जो अब 37500 करोड़ रुपये हो गई है। गरवारे हाई-टेक फिल्म्स के शशिकांत भालचंद्र गरवारे परिवार की वैल्यू भी 300 प्रतिशत बढ़कर 15600 करोड़ रुपये पहुंच गई है। दूसरी ओर एचसीएल टेक्नोलॉजीज के नाडर परिवार की संपत्ति में तीन साल में सबसे बड़ी गिरावट आई है जो 32 प्रतिशत या 1 लाख करोड़ और 39 पैसे कम हुई है। राजीव सिंह परिवार की संपत्ति में भी 25 प्रतिशत की कमी आई है। महिलाओं के नेतृत्व की बात करें तो लिस्ट में 18 कंपनियां ऐसी हैं जिनकी कमान महिलाओं के हाथ में है। हिंदुस्तान जिंक की प्रिया अग्रवाल हेब्बार 4 लाख करोड़ और 45 पैसे की वैल्यू वाली कंपनी चलाती हैं जबकि रोशनी नाडर मल्होत्रा 2 लाख करोड़ और 91 पैसे की वैल्यू वाली एचसीएल का नेतृत्व कर रही हैं।