मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड और दुनिया के दिग्गज वित्तीय संस्थान बैंक ऑफ अमेरिका ने जियो क्रेडिट लिमिटेड में एक संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है। इस बड़े सौदे के तहत बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में 49.9 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी हासिल करेगा। इस निवेश की कुल राशि 1 अरब 90 करोड़ डॉलर है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 18,268 करोड़ रुपये के बराबर है। बुधवार को शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक सूचना के अनुसार, बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) यह हिस्सेदारी तरजीही शेयर आवंटन और वारंट के माध्यम से प्राप्त करेगा। यह साझेदारी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की डिजिटल पहुंच और भारतीय बाजार की गहरी समझ को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय सेवा विशेषज्ञता के साथ जोड़ने का काम करेगी।
रणनीतिक साझेदारी और बाजार विस्तार
दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि यह समझौता भारत के वित्तीय परिदृश्य में एक नया अध्याय लिखेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह बैंक ऑफ अमेरिका का एक प्रमुख विकासशील बाजार में रणनीतिक वित्तीय निवेश है। इसे बैंक के सीधे रिटेल लोन कारोबार में प्रवेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जियो क्रेडिट ने पिछले दो वर्षों में भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। यह कंपनी मुख्य रूप से छोटे कारोबारियों और रिटेल ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और वर्तमान में हाउसिंग लोन जैसे उत्पाद प्रदान कर रही है। इस साझेदारी का उद्देश्य तकनीक और वैश्विक अनुभव के माध्यम से ऋण वितरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना है।
जियो क्रेडिट का शानदार प्रदर्शन
मात्र दो साल पहले स्थापित हुई जियो क्रेडिट आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (एनबीएफसी) में शुमार हो चुकी है। कंपनी के परिचालन के केवल दो वर्षों के भीतर, 30 जून 2026 तक इसकी प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) 30,667 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी तक पर्सनल लोन जैसे बिना गारंटी वाले ऋण और कंज्यूमर फाइनेंस सेक्टर में कदम नहीं रखा है, जबकि शुरुआत में इन क्षेत्रों को कंपनी के मुख्य लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा था। वर्तमान में कंपनी सुरक्षित ऋण और व्यापारिक ऋणों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे इसकी परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत बनी हुई है।
सौदे का वित्तीय ढांचा और निवेश प्रक्रिया
यह सौदा कई चरणों में पूरा होगा, जो जियो की वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी करने की रणनीति का हिस्सा है। समझौते के अनुसार, बैंक ऑफ अमेरिका की सहायक कंपनी एनबी होल्डिंग्स तरजीही शेयरों के माध्यम से 6,613 करोड़ रुपये तक का निवेश करेगी, जिससे उसे 4 करोड़ 29 लाख इक्विटी शेयर मिलेंगे। इस शुरुआती निवेश से एनबी होल्डिंग्स को जियो क्रेडिट में 26.50 प्रतिशत की हिस्सेदारी प्राप्त होगी। इसके बाद, एनबी होल्डिंग्स 11,655 करोड़ रुपये की लागत से 7 करोड़ 56 लाख वारंट खरीदेगी। इन वारंटों को 18 महीने की अवधि के भीतर इक्विटी शेयरों में बदला जा सकेगा। वारंट खरीदते समय कुल राशि का 25 प्रतिशत भुगतान करना होगा और शेष 75 प्रतिशत राशि शेयरों में परिवर्तन के समय देनी होगी। वारंट के पूरी तरह से इक्विटी शेयरों में बदलने के बाद, एनबी होल्डिंग्स के पास जियो क्रेडिट की कुल चुकता इक्विटी पूंजी में 49.90 प्रतिशत की हिस्सेदारी होगी।
वैश्विक दिग्गजों के साथ जियो का गठबंधन
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लगातार दुनिया की बेहतरीन कंपनियों के साथ हाथ मिला रही है। इससे पहले कंपनी ने भारत में बीमा कारोबार के लिए जर्मनी की दिग्गज कंपनी आलियांज और म्यूचुअल फंड कारोबार के लिए अमेरिका की प्रसिद्ध एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक के साथ सफल साझेदारी की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस मौके पर कहा कि एक विकसित भारत के निर्माण के लिए एक ऐसी वित्तीय प्रणाली की आवश्यकता है जो बड़े पैमाने, भरोसे और समावेश पर आधारित हो। उन्होंने विश्वास जताया कि बैंक ऑफ अमेरिका के साथ यह साझेदारी भारतीयों के लिए कर्ज लेना आसान और पारदर्शी बनाएगी।
भारत के भविष्य पर बैंक ऑफ अमेरिका का भरोसा
बैंक ऑफ अमेरिका के चेयर और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ब्रायन मोयनिहान ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत के भविष्य में हमारे अटूट विश्वास को प्रदर्शित करता है। मोयनिहान ने जियो फाइनेंशियल द्वारा बहुत कम समय में हासिल की गई प्रगति की सराहना की और कहा कि दोनों कंपनियों की संयुक्त ताकत वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने में सहायक होगी। यह डील न केवल जियो के लिए बल्कि पूरे भारतीय वित्तीय क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो वैश्विक निवेशकों के बढ़ते आकर्षण को दर्शाता है।
